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सत्य जीवन का सबसे ऊंचा सूत्र है

I

"सत्य" जीवन के सब सूत्रों में सबसे सच्चा है,

और मानवता में सबसे ऊंचा है।

जीवन का वह सूत्र है क्योंकि वो है,

वो है जो परमेश्वर इंसान से चाहता

और वह काम जो उसने खुद किया है,

परमेश्वर इंसान से चाहता

और वह काम जो उसने खुद किया है।

यह किन्हीं बातों से बनाई उक्ति नहीं है,

ना कहावत किसी महत की, महत की।

पर यह कथन है मानव जाति को,

आकाश और धरती के स्वामी का।

II

ये मनुष्यों द्वारा जोड़े गए शब्द नहीं,

यह जीवन है प्रभु का, स्वयं प्रभु।

इसलिए जीवन के सब सूत्रों में सबसे ऊंचा है।

सत्य का अभ्यास है फर्ज अपने पूरे करना,

और परमेश्वर की अपेक्षाओं को पूरा करना।

इन "अपेक्षाओं" का मर्म है सबसे असली सत्य,

ना कि खाली सिद्धांत जो हो नायाब।

"वचन देह में प्रकट होता है" से

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प्रश्न 24: तुम यह प्रमाण देते हो कि प्रभु यीशु पहले से ही सर्वशक्तिमान परमेश्वर के रूप में वापस आ चुका है, कि वह पूरी सच्चाई को अभिव्यक्त करता है जिससे कि लोग शुद्धिकरण प्राप्त कर सकें और बचाए जा सकें, और वर्तमान में वह परमेश्वर के घर से शुरू होने वाले न्याय के कार्य को कर रहा है, लेकिन हम इसे स्वीकार करने की हिम्मत नहीं करते। यह इसलिए है क्योंकि धार्मिक पादरियों और प्राचीन लोगों का हमें बहुधा यह निर्देश है कि परमेश्वर के सभी वचन और कार्य बाइबल में अभिलेखित हैं और बाइबल के बाहर परमेश्वर का कोई और वचन या कार्य नहीं हो सकता है, और यह कि बाइबल के विरुद्ध या उससे परे जाने वाली हर बात विधर्म है। हम इस समस्या को समझ नहीं सकते हैं, तो तुम कृपया इसे हमें समझा दो। परमेश्वर सम्पूर्ण मानवजाति के भाग्य का नियन्ता है केवल परमेश्वर के प्रबंधन के मध्य ही मनुष्य बचाया जा सकता है बुलाए हुए बहुत हैं, परन्तु चुने हुए कुछ ही हैं