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परमेश्वर विश्वास को पूर्ण बनाता है

I

उत्कृष्ट आस्था और प्रेम की उम्मीद तुम से की जाती है

कार्य के इस चरण में।

ग़र लापरवाह हुए तुम लड़खड़ा सकते हो

क्योंकि ये कार्य अब पहले सा नहीं।

परमेश्वर परिपूर्ण मानव की आस्था को कर रहा।

जिसे ना कोई देख सके, और ना कोई छू सका।

ईश्वर वचन को बदले आस्था, प्रेम और जीवन में।

परमेश्वर परिपूर्ण मानव की आस्था को कर रहा।

II

होगा करना सामना लोगों को सैंकड़ों बार शुद्धिकरण का,

होगा अय्यूब से भी ज़्यादा आस्था रखना।

यातनाएं उन्हें सहनी होंगी, परमेश्वर से बिना दूर हुए।

परमेश्वर परिपूर्ण मानव की आस्था को कर रहा।

जिसे ना कोई देख सके, और ना कोई छू सका।

ईश्वर वचन को बदले आस्था, प्रेम और जीवन में।

परमेश्वर परिपूर्ण मानव की आस्था को कर रहा।

परमेश्वर परिपूर्ण मानव की आस्था को कर रहा।

III

जब लोग हों आज्ञाकारी मरने तक आस्था सहित,

तब होगा पूर्ण ईश्वर के कार्य का यह चरण।

ये आसां नहीं जितना तुम सबको लगता है।

लोगों के मत से जितना भिन्न,

उतना ही गहरा महत्व इसका...

इन बातों पर विचार करो!

परमेश्वर परिपूर्ण मानव की आस्था को कर रहा।

जिसे ना कोई देख सके, और ना कोई छू सका।

ईश्वर वचन को बदले आस्था, प्रेम और जीवन में।

परमेश्वर परिपूर्ण मानव की आस्था को कर रहा।

परमेश्वर परिपूर्ण मानव की आस्था को कर रहा।

जिसे ना कोई देख सके, और ना कोई छू सका।

ईश्वर वचन को बदले आस्था, प्रेम और जीवन में।

परमेश्वर परिपूर्ण मानव की आस्था को कर रहा।

परमेश्वर परिपूर्ण मानव की आस्था को कर रहा।

परमेश्वर परिपूर्ण मानव की आस्था को कर रहा।

"वचन देह में प्रकट होता है" से

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बुलाए हुए बहुत हैं, परन्तु चुने हुए कुछ ही हैं प्रश्न 24: तुम यह प्रमाण देते हो कि प्रभु यीशु पहले से ही सर्वशक्तिमान परमेश्वर के रूप में वापस आ चुका है, कि वह पूरी सच्चाई को अभिव्यक्त करता है जिससे कि लोग शुद्धिकरण प्राप्त कर सकें और बचाए जा सकें, और वर्तमान में वह परमेश्वर के घर से शुरू होने वाले न्याय के कार्य को कर रहा है, लेकिन हम इसे स्वीकार करने की हिम्मत नहीं करते। यह इसलिए है क्योंकि धार्मिक पादरियों और प्राचीन लोगों का हमें बहुधा यह निर्देश है कि परमेश्वर के सभी वचन और कार्य बाइबल में अभिलेखित हैं और बाइबल के बाहर परमेश्वर का कोई और वचन या कार्य नहीं हो सकता है, और यह कि बाइबल के विरुद्ध या उससे परे जाने वाली हर बात विधर्म है। हम इस समस्या को समझ नहीं सकते हैं, तो तुम कृपया इसे हमें समझा दो। परमेश्वर सम्पूर्ण मानवजाति के भाग्य का नियन्ता है केवल परमेश्वर के प्रबंधन के मध्य ही मनुष्य बचाया जा सकता है