3. मैं स्वीकार करता हूँ कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया जिसे प्रचारित करती है, वह सही मार्ग है, लेकिन चूँकि हमारी कलीसिया में लोगों को पादरियों और एल्डर्स द्वारा फैलाए गए झूठों और भ्रांतियों से धोखा दिया गया है, वे सभी सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया के विरोधी हैं। मुझे चिंता है कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर का अंत के दिनों का कार्य स्वीकार करने के बाद मुझे मेरी पुरानी कलीसिया के भाई-बहनों द्वारा अस्वीकार और निन्दित किया जाएगा। मेरा आध्यात्मिक कद बहुत छोटा है और मैं इन सब का सामना करने के लिए पर्याप्त साहसी नहीं हूँ—मुझे क्या करना चाहिए?
संदर्भ के लिए बाइबल के पद :
“तौभी अधिकारियों में से बहुतों ने उस पर विश्वास किया, परन्तु फरीसियों के कारण प्रगट में नहीं मानते थे, कहीं ऐसा न हो कि वे आराधनालय में से निकाले जाएँ : क्योंकि मनुष्यों की ओर से प्रशंसा उनको परमेश्वर की ओर से प्रशंसा की अपेक्षा अधिक प्रिय लगती थी” (यूहन्ना 12:42-43)।
“धन्य हैं वे, जो धार्मिकता के कारण सताए जाते हैं, क्योंकि स्वर्ग का राज्य उन्हीं का है। धन्य हो तुम, जब मनुष्य मेरे कारण तुम्हारी निन्दा करें, और सताएँ और झूठ बोल बोलकर तुम्हारे विरोध में सब प्रकार की बुरी बात कहें। तब आनन्दित और मगन होना, क्योंकि तुम्हारे लिये स्वर्ग में बड़ा फल है। इसलिये कि उन्होंने उन भविष्यद्वक्ताओं को जो तुम से पहले थे इसी रीति से सताया था” (मत्ती 5:10-12)।
“सकेत फाटक से प्रवेश करो, क्योंकि चौड़ा है वह फाटक और सरल है वह मार्ग जो विनाश को पहुँचाता है; और बहुत से हैं जो उस से प्रवेश करते हैं। क्योंकि सकेत है वह फाटक और कठिन है वह मार्ग जो जीवन को पहुँचाता है; और थोड़े हैं जो उसे पाते हैं” (मत्ती 7:13-14)।
परमेश्वर के प्रासंगिक वचन :
तुम्हें इस या उस चीज से नहीं डरना चाहिए; चाहे तुम्हें कितनी भी मुसीबतों या खतरों का सामना करना पड़े, तुम्हें किसी भी अड़चन से बाधित हुए बिना मेरे सम्मुख अडिग रहने में सक्षम होना चाहिए ताकि मेरी इच्छा बेरोक-टोक कार्यान्वित हो सके। यह तुम्हारा कर्तव्य है; अन्यथा मैं अपना क्रोध तुम पर उतारूँगा और अपने हाथ से मैं...। फिर तुम अपने दिल में अंतहीन पीड़ा सहोगे। तुम्हें सब कुछ सहना होगा; मेरे लिए तुम्हें हर चीज छोड़ने और अपनी पूरी ताकत से मेरा अनुसरण करने को तैयार रहना होगा और कोई भी कीमत चुकाने के लिए तैयार रहना होगा। अब वह समय है जब मैं तुम्हें परखूँगा : क्या तुम अपनी वफादारी मुझे अर्पित करोगे? क्या तुम मार्ग के अंत तक वफादारी से मेरा अनुसरण कर सकते हो? डरो मत; तुम्हारे सहारे के रूप में मेरे रहते कौन कभी तुम्हारे रास्ते को अवरुद्ध कर सकता है? यह याद रखो! याद रखो! हर चीज में मेरे अच्छे इरादे निहित हैं और हर चीज मेरी जाँच-पड़ताल के अधीन है। क्या तुम्हारे हर शब्द और कर्म में मेरे वचन का पालन होता है? जब तुम पर अग्नि परीक्षाएँ आएँगी, तो क्या तुम घुटने टेकोगे और पुकारोगे? या तुम दुबक जाओगे और आगे बढ़ने में असमर्थ रहोगे?
तुममें मेरा साहस होना चाहिए और जब अविश्वासी रिश्तेदारों का सामना करने की बात आए तो तुम्हारे पास सिद्धांत होने चाहिए। लेकिन मेरी खातिर तुम्हें किसी भी अंधकार की शक्ति के आगे झुकना नहीं चाहिए। तुम्हें पूर्ण मार्ग पर चलने के लिए मेरी बुद्धि पर निर्भर रहना चाहिए और शैतान की किसी भी साजिश को कामयाब नहीं होने देना चाहिए। अपने दिल को मेरे सम्मुख रखने के लिए जो बन पड़े वह सब करो, मैं तुम्हें दिलासा दूँगा और तुम्हारे दिल को शांति और आनंद प्रदान करूँगा। यह परवाह मत करो कि लोगों को तुम कैसे प्रतीत होते हो; क्या मुझे संतुष्ट करना अधिक मूल्य और महत्व नहीं रखता है? क्या यह तुम्हारे लिए इस तरह और भी अनंत और जीवनपर्यंत आनंद और शांति लेकर नहीं आएगा? तुम्हारा आज का कष्ट बताता है कि तुम्हारे भविष्य के आशीष कितने बड़े होंगे; वे अवर्णनीय हैं। तुम्हें जो आशीष प्राप्त होंगे, वे कितने बड़े होंगे, ये तुम नहीं जानते; तुम उसकी कल्पना भी नहीं कर सकते। आज यह वास्तविक बन गया है; बिल्कुल वास्तविक! यह बहुत दूर नहीं है—क्या तुम उसे देख सकते हो? इसका हर अंतिम अंश मुझमें है; भविष्य कितना रोशन है! अपने आँसू पोंछो तथा और अधिक दुःख या दर्द महसूस मत करो। हर चीज का आयोजन मेरे हाथों से होता है और मेरा लक्ष्य यह है कि तुम लोगों को जल्द विजेता बनाऊँ और तुम्हें अपने साथ महिमा में ले चलूँ। तुम्हारे साथ जो सब होता है, उसके लिए तुममें इस तरह का आभार और प्रशंसा होनी चाहिए; इससे मुझे संतुष्टि मिलेगी।
—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, आरंभ में मसीह के कथन, अध्याय 10
जो लोग सच्चे मन से परमेश्वर का अनुसरण करते हैं, वे अपने कार्य की परीक्षा लिया जाना सह पाते हैं, जबकि जो लोग सच्चे मन से परमेश्वर का अनुसरण नहीं करते, वे परमेश्वर के किसी भी परीक्षण को सहने में अक्षम हैं। देर-सवेर उन्हें बाहर निकाल दिया जाएगा, जबकि विजेता राज्य में बने रहेंगे। मनुष्य सच्चे मन से परमेश्वर को खोजता है या नहीं, इसका निर्धारण उसके कार्य का परीक्षण करने के द्वारा ही किया जाता है, अर्थात्, परमेश्वर के परीक्षणों द्वारा, और इसका स्वयं मनुष्य द्वारा किए गए निर्धारण से कोई लेना-देना नहीं है। परमेश्वर किसी मनुष्य को हल्के में अस्वीकार नहीं करता; वह जो कुछ भी करता है, वह मनुष्य को पूर्ण रूप से कायल कर सकता है। वह ऐसा कुछ नहीं करता, जो मनुष्य के लिए अदृश्य हो, या कोई ऐसा कार्य जो मनुष्य को कायल न कर सके। मनुष्य का विश्वास सच्चा है कि नहीं, यह तथ्यों द्वारा साबित होता है और मनुष्य द्वारा निर्धारित नहीं किया जा सकता है। इसमें कोई संदेह नहीं कि “गेहूँ को जंगली दाने नहीं बनाया जा सकता, और जंगली दानों को गेहूँ नहीं बनाया जा सकता।” जो सच्चे मन से परमेश्वर से प्रेम करते हैं, वे सभी अंततः राज्य में बने रहेंगे और परमेश्वर ऐसे किसी व्यक्ति के साथ अन्याय नहीं करेगा जो सच्चे मन से उससे प्रेम करता है।
—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, परमेश्वर का कार्य और मनुष्य का अभ्यास
आज अधिकतर लोगों के पास यह ज्ञान नहीं है। वे मानते हैं कि कष्ट सहने का कोई मूल्य नहीं है और दुनिया उन्हें ठुकरा देती है, उनका पारिवारिक जीवन अशांत रहता है, परमेश्वर उनसे प्रसन्न नहीं होता और उनका भविष्य अंधकारमय है। कुछ लोग तो एक निश्चित सीमा तक कष्ट सहते हुए मर ही जाना चाहते हैं। यह परमेश्वर के प्रति सच्चा प्रेम नहीं है; ऐसे लोग कायर होते हैं, उनमें दृढ़ता नहीं होती है, वे रीढ़विहीन और अक्षम होते हैं! परमेश्वर उत्सुक है कि मनुष्य उससे प्रेम करे, परंतु मनुष्य जितना अधिक उससे प्रेम करता है, उसके कष्ट उतने अधिक बढ़ते हैं और जितना अधिक मनुष्य उससे प्रेम करता है, उसके परीक्षण उतने अधिक बढ़ते हैं। यदि तुम उससे प्रेम करते हो तो तुम्हारे ऊपर हर प्रकार के कष्ट आ पड़ेंगे—और यदि तुम उससे प्रेम नहीं करते, तब शायद सब कुछ तुम्हारे लिए सुचारु रूप से चलता रहेगा और तुम्हारे चारों ओर सब कुछ शांतिपूर्ण होगा। जब तुम परमेश्वर से प्रेम करते हो तो तुम हमेशा यह महसूस करोगे कि तुम्हारे चारों ओर बहुत-कुछ अजेय है। और चूँकि तुम्हारा आध्यात्मिक कद बहुत छोटा है, इसलिए तुम्हारा शोधन किया जाएगा और तुम परमेश्वर को संतुष्ट करने में असमर्थ रहोगे—तुम हमेशा यह महसूस करोगे कि परमेश्वर के इरादे बहुत ही ऊँचे हैं और वे मनुष्य की पहुँच से बाहर हैं। इन सबकी वजह से तुम्हारा शोधन किया जाएगा—क्योंकि तुममें बहुत कमजोरी है और तुम कई मायनों में परमेश्वर के इरादे पूरे करने में असमर्थ हो, इसलिए तुम्हारा भीतर से शोधन किया जाएगा। फिर भी तुम लोगों को यह स्पष्ट देखना चाहिए कि शुद्धिकरण केवल शोधन के द्वारा ही प्राप्त किया जाता है। इस प्रकार, इन अंत के दिनों में तुम लोगों को परमेश्वर के लिए गवाही देनी चाहिए। चाहे तुम्हारे कष्ट कितने भी बड़े क्यों न हों, तुम्हें बिल्कुल अंत तक चलना चाहिए, यहाँ तक कि अपनी अंतिम साँस तक तुम्हें परमेश्वर के प्रति वफादार होना चाहिए और खुद को परमेश्वर के आयोजन की दया पर छोड़ देना चाहिए; केवल यही वास्तव में परमेश्वर से प्रेम करना है और केवल यही सशक्त और गुंजायमान गवाही है। जब शैतान तुम्हें लुभाए, तो तुम्हें कहना चाहिए : “मेरा हृदय परमेश्वर का है, और परमेश्वर ने मुझे पहले ही प्राप्त कर लिया है। मैं तुम्हें संतुष्ट नहीं कर सकता—मुझे परमेश्वर को सही ढंग से संतुष्ट करना चाहिए।” तुम जितना अधिक परमेश्वर को संतुष्ट करोगे, परमेश्वर तुम्हें उतना ही अधिक आशीष देगा और परमेश्वर से प्रेम करने की तुम्हारी प्रेरणा उतनी ही अधिक हो जाएगी; तुम्हारे पास आस्था और संकल्प भी होंगे और तुम महसूस करोगे कि परमेश्वर से प्रेम करने में बिताया गया जीवन सबसे मूल्यवान और सार्थक जीवन है। यह कहा जा सकता है कि जैसे ही तुम परमेश्वर से प्रेम करोगे, तुम दुख से मुक्त हो जाओगे। यद्यपि ऐसे समय होते हैं जब तुम्हारी देह कमजोर होती है और तुम्हें कई वास्तविक कठिनाइयाँ होती हैं, फिर भी यदि इन समयों के दौरान तुम वास्तव में परमेश्वर पर भरोसा करते हो तो तुम्हें सांत्वना मिलेगी और तुम अपनी आत्मा के भीतर सहज और समर्थित महसूस करोगे। इस तरह तुम कई स्थितियों से पार पाने में सक्षम होगे और तुम अपने द्वारा सहे जाने वाले कष्ट के कारण परमेश्वर के बारे में शिकायत नहीं करोगे। इसके बजाय तुम भजन गाना, नाचना और प्रार्थना करना, इकट्ठे होकर संगति करना और परमेश्वर को याद करना चाहोगे और तुम महसूस करोगे कि तुम्हारे आस-पास के सभी लोग, घटनाएँ और चीजें, जिनकी परमेश्वर ने व्यवस्था की है, उपयुक्त हैं। यदि तुम परमेश्वर से प्रेम नहीं करते, तो तुम जो कुछ भी देखोगे वह तुम्हारी पसंद का नहीं होगा और कुछ भी तुम्हारी आँखों को नहीं भाएगा; तुम्हें कोई रिहाई नहीं मिलेगी और तुम अपनी आत्मा के भीतर दबा हुआ महसूस करोगे और तुम हमेशा परमेश्वर के बारे में शिकायतें पालोगे और हमेशा महसूस करोगे कि तुम जो कष्ट सहते हो वह बहुत बड़ा है और तुम्हारे साथ बहुत बड़ा अन्याय हुआ है। यदि तुम खुशी की खातिर अनुसरण नहीं करते बल्कि परमेश्वर को संतुष्ट करने और शैतान द्वारा दोषी न ठहराए जाने के लिए अनुसरण करते हो, तो ऐसा अनुसरण तुम्हें परमेश्वर से प्रेम करने की एक बड़ी प्रेरणा देगा। जब तुम उस सबका अभ्यास करने में सक्षम होते हो जो परमेश्वर द्वारा बोला जाता है, और तुम जो कुछ भी करते हो वह परमेश्वर को संतुष्ट करने में सक्षम होता है, तो इसे वास्तविकता से युक्त होना कहा जाता है। परमेश्वर की संतुष्टि का अनुसरण करना अपने परमेश्वर-प्रेमी दिल का उसके वचनों को अभ्यास में लाने के लिए उपयोग करना है। चाहे जो भी समय हो, यहाँ तक कि जब दूसरे शक्तिहीन होते हैं तब भी तुम्हारे पास हमेशा एक परमेश्वर-प्रेमी दिल होता है और तुम अपने दिल की गहराई में परमेश्वर के लिए तरसते हो और उसे याद करते हो। यह वास्तविक आध्यात्मिक कद है। तुम्हारा आध्यात्मिक कद असल में कितना बड़ा है, यह इस बात पर निर्भर करता है कि तुम्हारे पास कितनी मात्रा में परमेश्वर-प्रेमी हृदय है, जब तुम्हारी परीक्षा ली जाती है तब तुम अडिग रह पाते हो या नहीं, अपने सामने कोई खास परिवेश आने पर तुम कमजोर तो नहीं पड़ जाते, और अपने भाई-बहनों द्वारा ठुकराए जाने पर तुम अडिग रह पाते हो या नहीं; तथ्यों के सामने आने से पता चलेगा कि तुम्हारा परमेश्वर-प्रेमी हृदय कैसा है।
—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, पीड़ादायक परीक्षणों के अनुभव से ही तुम परमेश्वर की मनोहरता को जान सकते हो
परमेश्वर उन लोगों की खोज कर रहा है जो उसके प्रकट होने की लालसा करते हैं। वह उन लोगों की खोज कर रहा है जो उसके वचनों को सुनते हैं, जो उसके आदेश को नहीं भूलते और अपना तन-मन उसे समर्पित करते हैं। वह उनकी खोज कर रहा है जो उसके सामने शिशुओं के समान समर्पित और प्रतिरोध न करने वाले हों। यदि तुम किसी भी बल से बाधित हुए बिना खुद को परमेश्वर के प्रति समर्पित करते हो, तो परमेश्वर तुम्हारे ऊपर अनुग्रह की दृष्टि डालेगा और तुम्हें अपने आशीष प्रदान करेगा। यदि तुम्हारे पास ऊँचा रुतबा है, अत्यधिक प्रतिष्ठा है, प्रचुर ज्ञान है, असंख्य संपत्तियाँ हैं और बहुत-से लोगों का सहारा है, लेकिन तुम इन बातों से अप्रभावित रहते हो और परमेश्वर की पुकार और आदेश को स्वीकार करने और परमेश्वर तुमसे जो कुछ कहता है वह करने के लिए अभी भी उसके सम्मुख आते हो तो फिर तुम जो कुछ भी करोगे वह सब पृथ्वी पर सर्वाधिक सार्थक ध्येय होगा और मनुष्य का सर्वाधिक न्यायसंगत उपक्रम होगा। यदि तुम अपने रुतबे या लक्ष्यों की खातिर परमेश्वर के आह्वान को अस्वीकार करोगे, तो जो कुछ भी तुम करोगे, वह परमेश्वर द्वारा शापित किया जाएगा, और भी अधिक यह उसके लिए घृणित होगा।
—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, परिशिष्ट 2 : परमेश्वर संपूर्ण मानवजाति के भाग्य पर संप्रभु है