2. पादरी हमसे अक्सर कहते हैं कि हालाँकि आपदा के बाद आपदा टूट पड़ती है, हमें डरना नहीं चाहिए, क्योंकि बाइबल हमें बताती है: “तेरे निकट हज़ार, और तेरी दाहिनी ओर दस हज़ार गिरेंगे; परन्तु वह तेरे पास न आएगा” (भजन संहिता 91:7)। अगर हमें प्रभु पर भरोसा है, और हम प्रार्थना करना, बाइबल पढ़ना और मिलकर सहभागिता करना जारी रखते हैं, तो आपदा हम पर नहीं आएगी। लेकिन कुछ धार्मिक याजक और ईसाई ऐसे भी हैं जो इन आपदाओं में मारे गए हैं। वे सभी बाइबल पढ़ते थे, प्रार्थना करते थे, और प्रभु की सेवा करते थे, तो परमेश्वर ने उनकी रक्षा क्यों नहीं की?
संदर्भ के लिए बाइबल के पद :
“जो मुझ से, ‘हे प्रभु! हे प्रभु!’ कहता है, उनमें से हर एक स्वर्ग के राज्य में प्रवेश नहीं करेगा, बल्कि वह करेगा जो मेरे स्वर्गिक पिता की इच्छा के अनुसार चलता है। उस दिन बहुत से लोग मुझ से कहेंगे, ‘हे प्रभु, हे प्रभु, क्या हम ने तेरे नाम से भविष्यद्वाणी नहीं की, और तेरे नाम से दुष्टात्माओं को नहीं निकाला, और तेरे नाम से बहुत से आश्चर्यकर्म नहीं किए?’ तब मैं उनसे खुलकर कह दूँगा, ‘मैं ने तुम को कभी नहीं जाना। हे कुकर्म करनेवालो, मेरे पास से चले जाओ’” (मत्ती 7:21-23)।
“देख, मैं शीघ्र आनेवाला हूँ; और हर एक के काम के अनुसार बदला देने के लिये प्रतिफल मेरे पास है। मैं अल्फा और ओमेगा, पहला और अन्तिम, आदि और अन्त हूँ। धन्य वे हैं, जो अपने वस्त्र धो लेते हैं, क्योंकि उन्हें जीवन के वृक्ष के पास आने का अधिकार मिलेगा, और वे फाटकों से होकर नगर में प्रवेश करेंगे। पर कुत्ते, और टोन्हें, और व्यभिचारी, और हत्यारे और मूर्तिपूजक, और हर एक झूठ का चाहनेवाला और गढ़नेवाला बाहर रहेगा” (प्रकाशितवाक्य 22:12-15)।
परमेश्वर के प्रासंगिक वचन :
अब वह समय है जब मैं प्रत्येक व्यक्ति का परिणाम निर्धारित करता हूँ, न कि वह चरण जिसमें मैंने मनुष्य पर काम करना आरंभ किया था। मैं अपनी अभिलेख-पुस्तक में एक-एक करके प्रत्येक व्यक्ति के शब्द और कार्य, मेरा अनुसरण करने में उनका मार्ग, उनका अंतर्निहित वर्गीकरण, और उनकी अंतिम अभिव्यक्तियाँ लिखता हूँ। इस तरह, चाहे वे किसी भी तरह के व्यक्ति हों, कोई भी मेरे हाथ से नहीं बच पाएगा, और मेरे आवंटन के आधार पर सभी अपने किस्म के अनुसार छाँटे जाएँगे। मैं प्रत्येक व्यक्ति की मंजिल उसकी आयु, वरिष्ठता और उसके द्वारा सही गई पीड़ा की मात्रा के आधार पर निर्धारित नहीं करता और इस आधार पर तो और भी नहीं कि वह कितना दयनीय है, बल्कि इस बात के अनुसार तय करता हूँ कि उसके पास सत्य है या नहीं। इसके अतिरिक्त अन्य कोई विकल्प नहीं है। तुम लोगों को यह समझना चाहिए कि जो लोग परमेश्वर की इच्छा का अनुसरण नहीं करते, वे सब निरपवाद रूप से दंडित किए जाएँगे। यह एक ऐसा तथ्य है जिसे कोई व्यक्ति नहीं बदल सकता। इसलिए जो लोग दंडित किए जाते हैं, वे सब इस तरह परमेश्वर की धार्मिकता के कारण और अपने अनगिनत बुरे कार्यों के प्रतिफल के रूप में दंडित किए जाते हैं।
—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, अपनी मंजिल के लिए पर्याप्त अच्छे कर्म तैयार करो
लोग कहते हैं, “परमेश्वर एक धार्मिक परमेश्वर है। अगर मनुष्य अंत तक उसका अनुसरण करता रहे, तो वह निश्चित रूप से मनुष्य के प्रति निष्पक्ष होगा, क्योंकि वह सबसे धार्मिक है। यदि मनुष्य अंत तक उसका अनुसरण करता रहे, तो क्या वह मनुष्य को दरकिनार कर सकता है?” मैं सभी लोगों के प्रति निष्पक्ष हूँ और सभी लोगों का न्याय अपने धार्मिक स्वभाव से करता हूँ, फिर भी मैं लोगों से जो अपेक्षाएँ रखता हूँ उन सबमें उचित शर्तें शामिल होती हैं, और मैं जो अपेक्षा करता हूँ वह सभी लोगों के लिए पूरा करना जरूरी है, चाहे वे कोई भी हों। मैं इसकी परवाह नहीं करता कि तुम कितने वरिष्ठ हो या कितने अनुभवी हो; मैं सिर्फ इसकी परवाह करता हूँ कि तुम मेरे मार्ग का अनुसरण कर रहे हो या नहीं, सत्य के लिए तुममें प्रेम और प्यास है या नहीं। यदि तुममें सत्य की कमी है, और इसकी बजाय तुम मेरे नाम का अनादर करते हो, और मेरे मार्ग के अनुसार क्रिया-कलाप नहीं करते हो, कोई परवाह या चिंता किए बगैर सिर्फ अनुसरण मात्र कर रहे हो, तो मैं उस समय तुम पर प्रहार करूँगा और तुम्हारी बुराई के लिए तुम्हें दंड दूँगा, तब तुम्हारे पास कहने के लिए क्या होगा? क्या तुम यह कह पाओगे कि परमेश्वर धार्मिक नहीं है? यदि तुमने आज मेरे द्वारा बोले गए सभी वचनों का पालन किया है, तो तुम एक ऐसे इंसान हो जिसे मैं स्वीकृति देता हूँ। तुम कहते हो कि तुमने परमेश्वर का अनुसरण करते हुए हमेशा पीड़ा सही है, कि तुमने तूफानों के बीच उसका अनुसरण किया है और उसके साथ अच्छा और बुरा समय बिताया है, लेकिन तुमने परमेश्वर द्वारा बोले गए वचनों को नहीं जिया है; तुम हर दिन सिर्फ परमेश्वर के लिए भाग-दौड़ करना और उसके लिए स्वयं को खपाना चाहते हो, तुमने कभी भी एक अर्थपूर्ण जीवन जीने के बारे में नहीं सोचा है। तुम यह भी कहते हो, “चाहे जो हो, मैं मानता हूँ कि परमेश्वर धार्मिक है। मैं उसके लिए पीड़ा सहता हूँ, उसके लिए भाग-दौड़ करता हूँ और अपने आपको उसे समर्पित करता हूँ, और भले ही मेरे पास कोई उपलब्धियाँ न हो, फिर भी मैंने कठिनाई सही है; वह निश्चित ही मुझे याद रखेगा।” यह सच है कि परमेश्वर धार्मिक है, फिर भी इस धार्मिकता पर किसी अशुद्धता का दाग नहीं है : इसमें कोई मानवीय इच्छा नहीं है, और यह देह या मानवीय लेन-देनों से दूषित नहीं है। जो लोग विद्रोही हैं और विरोध में हैं, जो उसके मार्ग का पालन नहीं करते हैं, उन सबको दंडित किया जाएगा; न तो किसी को क्षमा किया जाएगा, न ही किसी को बख्शा जाएगा! कुछ लोग कहते हैं, “आज मैं तुम्हारे लिए भाग-दौड़ करता हूँ; अंत में क्या तुम मुझे थोड़ा-सा आशीष दे सकते हो?” इसलिए मैं तुमसे पूछता हूँ, “क्या तुमने मेरे वचनों का पालन किया है?” तुम जिस धार्मिकता की बात करते हो, वह एक लेन-देन पर आधारित है। तुम केवल यह सोचते हो कि मैं धार्मिक हूँ, कि मैं सब लोगों के प्रति निष्पक्ष हूँ, और जो बिल्कुल अंत तक मेरा अनुसरण करेंगे वे सब निश्चित रूप से बचा लिए जाएँगे और मेरे आशीष प्राप्त करेंगे। “जो बिल्कुल अंत तक मेरा अनुसरण करेंगे वे सब निश्चित रूप से बचा लिए जाएँगे,” मेरे इन वचनों का एक आंतरिक अर्थ है : जो लोग बिल्कुल अंत तक मेरा अनुसरण करेंगे वे ऐसे लोग होंगे जिन्हें मेरे द्वारा पूरी तरह से प्राप्त कर लिया जाएगा, वे ऐसे लोग हैं जो मेरे द्वारा जीते जाने के बाद, सत्य खोजते हैं और जिन्हें पूर्ण बनाया जाता है। तुम कितनी अपेक्षाएँ पूरी कर चुके हो? तुमने केवल अंत तक मेरा अनुसरण करने की अपेक्षा पूरी की है, लेकिन और क्या? क्या तुमने मेरे वचनों का पालन किया है? तुमने मेरी पाँच अपेक्षाओं में से एक को पूरा किया है, लेकिन बाकी चार को पूरा करने का तुम्हारा कोई इरादा नहीं है। तुमने बस सबसे सरल और आसान रास्ता ढूँढ़ लिया है और भाग्यशाली होने की उम्मीद के रवैये के साथ अनुसरण किया है। तुम्हारे जैसे इंसान के लिए मेरे धार्मिक स्वभाव का अर्थ सिर्फ ताड़ना और न्याय और धार्मिक प्रतिफल है; इसका अर्थ है बुरा काम करने वाले सभी लोगों के लिए धार्मिक दंड। जो लोग मेरे मार्ग का अनुसरण नहीं करते हैं उन सबको निश्चित ही दंड दिया जाएगा, भले ही वे बिल्कुल अंत तक अनुसरण करते रहें। यह परमेश्वर की धार्मिकता है।
—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, पतरस के अनुभव : ताड़ना और न्याय का उसका ज्ञान
परमेश्वर ऐसे लोग चाहता है जो उसके पदचिह्नों का अनुसरण करें। भले ही जो तुमने पहले समझा था वह कितना ही अद्भुत और शुद्ध क्यों न हो, परमेश्वर उसे नहीं चाहता और यदि तुम ऐसी चीजों को दूर नहीं कर सकते, तो वो भविष्य में तुम्हारे प्रवेश के लिए एक भयंकर बाधा होंगी। वे सभी धन्य हैं, जो पवित्र आत्मा की आज की रोशनी का अनुसरण करने में सक्षम हैं। पिछले युगों और पीढ़ियों के लोग भी परमेश्वर के पदचिह्नों पर चलते थे, फिर भी वे आज तक अनुसरण करना जारी नहीं रख सके; यह अंत के दिनों के लोगों के लिए आशीष है। जो लोग पवित्र आत्मा के वर्तमान कार्य का अनुसरण कर सकते हैं और जो परमेश्वर के पदचिह्नों पर चलने में सक्षम हैं, चाहे परमेश्वर उन्हें जहाँ भी ले जाए वो उसका अनुसरण करते हैं—ये वो लोग हैं, जिन्हें परमेश्वर का आशीष प्राप्त है। जो लोग पवित्र आत्मा के वर्तमान कार्य का अनुसरण नहीं करते हैं, उन्होंने परमेश्वर के वचनों के कार्य में प्रवेश नहीं किया है और चाहे वो कितना भी कार्य करें या उनकी पीड़ा कितनी भी अधिक हो या वे कितनी ही भागदौड़ करें, इनमें से किसी भी चीज का परमेश्वर के लिए कोई महत्व नहीं है और वह उन्हें स्वीकृति नहीं देगा। आज वो सभी जो परमेश्वर के वर्तमान वचनों का अनुसरण करते हैं, वो पवित्र आत्मा के प्रवाह में हैं; जो परमेश्वर के वर्तमान वचनों से बाहर हैं वे पवित्र आत्मा के प्रवाह से बाहर हैं और ऐसे लोगों को परमेश्वर द्वारा स्वीकृति नहीं दी जाती है। जो सेवा पवित्र आत्मा के वर्तमान वचनों से बाहर हो वह देह और धारणाओं की सेवा है और इसका परमेश्वर के इरादों के अनुरूप होना असंभव है। यदि लोग धार्मिक धारणाओं के बीच जीते हैं तो वे ऐसा कुछ भी करने में असमर्थ होते हैं जो परमेश्वर के इरादों के अनुरूप हो और भले ही वे परमेश्वर की सेवा करें, वे अपनी कल्पनाओं और धारणाओं के घेरे में ही सेवा करते हैं और परमेश्वर के इरादों के अनुसार सेवा करने में पूरी तरह असमर्थ होते हैं। जो लोग पवित्र आत्मा के कार्य का अनुसरण करने में असमर्थ हैं, वो परमेश्वर के इरादों को नहीं समझते और जो परमेश्वर के इरादों को नहीं समझते, वो परमेश्वर की सेवा नहीं कर सकते। परमेश्वर ऐसी सेवा चाहता है जो उसके इरादों के अनुरूप हो; वह ऐसी सेवा नहीं चाहता, जो धारणाओं और देह की हो। यदि लोग पवित्र आत्मा के कार्य के चरणों का पालन करने में असमर्थ हैं, तो वो धारणाओं के बीच रहते हैं। ऐसे लोगों की सेवा गड़बड़ी और विघ्न पैदा करती है और ऐसी सेवा परमेश्वर के विरुद्ध चलती है। इस प्रकार, जो लोग परमेश्वर के पदचिह्नों पर चलने में असमर्थ हैं, वे परमेश्वर की सेवा करने में असमर्थ हैं; जो लोग परमेश्वर के पदचिह्नों पर चलने में असमर्थ हैं, वे निश्चित रूप से परमेश्वर का विरोध करते हैं और वे निश्चित रूप से परमेश्वर के अनुरूप होने में अक्षम हैं। “पवित्र आत्मा के कार्य का अनुसरण” करने का मतलब है परमेश्वर के वर्तमान इरादों को समझना और परमेश्वर की वर्तमान अपेक्षाओं के अनुसार कार्य करने में सक्षम होना, आज के परमेश्वर का अनुसरण करना और उसके प्रति समर्पण करना और परमेश्वर के नवीनतम वचनों के अनुरूप प्रवेश करना। केवल यही ऐसा है जो पवित्र आत्मा के कार्य का अनुसरण करता है और पवित्र आत्मा के प्रवाह में है। ऐसे लोग न केवल परमेश्वर की स्वीकृति प्राप्त करने और परमेश्वर को देखने में सक्षम हैं बल्कि परमेश्वर के नवीनतम कार्य से उसके स्वभाव को भी जान सकते हैं और परमेश्वर के नवीनतम कार्य से मनुष्य की धारणाओं और उसके विद्रोहीपन को, मनुष्य की प्रकृति और सार को जान सकते हैं; इसके अलावा, वो अपनी सेवा के दौरान धीरे-धीरे अपने स्वभाव में परिवर्तन हासिल करने में सक्षम होते हैं। केवल ऐसे लोग ही हैं, जो परमेश्वर को प्राप्त करने में सक्षम हैं और जो सचमुच में सच्चा मार्ग पा चुके हैं। जिन लोगों को पवित्र आत्मा के कार्य द्वारा हटा दिया गया है वे ऐसे लोग हैं जो परमेश्वर के नवीनतम कार्य का अनुसरण करने में अक्षम हैं और जो परमेश्वर के नवीनतम कार्य के विरुद्ध हो जाते हैं। ऐसे लोग खुलेआम परमेश्वर का विरोध इसलिए करते हैं क्योंकि परमेश्वर ने नया कार्य किया है और क्योंकि परमेश्वर की छवि उनकी धारणाओं के अनुरूप नहीं है—जिसके परिणामस्वरूप वो परमेश्वर का खुलेआम विरोध करते हैं और परमेश्वर पर निर्णय देते हैं, जिसके नतीजे में परमेश्वर उन्हें ठुकरा देता है। परमेश्वर के नवीनतम कार्य का ज्ञान रखना कोई आसान बात नहीं है, लेकिन अगर लोग उद्देश्यपूर्ण ढंग से परमेश्वर के कार्य के प्रति समर्पण कर सकते हैं और परमेश्वर के कार्य को खोज सकते हैं तो उन्हें परमेश्वर को देखने का मौका मिलेगा, और उन्हें पवित्र आत्मा का नवीनतम मार्गदर्शन प्राप्त करने का मौका मिलेगा। जो जानबूझकर परमेश्वर के कार्य का विरोध करते हैं, वे पवित्र आत्मा का प्रबोधन या परमेश्वर का मार्गदर्शन प्राप्त नहीं कर सकते हैं; इस प्रकार, लोग परमेश्वर का नवीनतम कार्य प्राप्त कर सकते हैं या नहीं, यह परमेश्वर के अनुग्रह पर निर्भर करता है, साथ ही यह उनके अनुसरण और उनके इरादों पर निर्भर करता है।
जो पवित्र आत्मा के वर्तमान वचनों के प्रति समर्पण कर पाते हैं वे सब धन्य हैं। इस बात से कोई फ़र्क नहीं पड़ता कि लोग कैसे हुआ करते थे या उनमें पवित्र आत्मा कैसे कार्य किया करता था—जिन्होंने परमेश्वर का नवीनतम कार्य प्राप्त किया है, वे सब सर्वाधिक धन्य हैं और जो आज नवीनतम कार्य का अनुसरण नहीं कर पाते हैं, वे सब हटा दिए जाएँगे।
—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, परमेश्वर के सबसे नए कार्य को जानो और उसके पदचिह्नों का अनुसरण करो
आजकल वे जो अनुसरण करते हैं और वे जो अनुसरण नहीं करते, दो प्रकार के लोग हैं, जिनकी मंजिलें अलग हैं। वे जो सत्य को जानने का अनुसरण करते हैं और सत्य का अभ्यास करते हैं, वे लोग हैं जिनका परमेश्वर उद्धार करेगा। जो सच्चे मार्ग को नहीं जानते, वे राक्षस और शत्रु हैं; वे प्रधान स्वर्गदूत के वंशज हैं और विनाश के पात्र होंगे। यहाँ तक कि एक अज्ञात परमेश्वर के धर्मपरायण विश्वासीजन—क्या वे भी राक्षस नहीं हैं? जिन लोगों के पास अच्छी अंतरात्मा है परंतु वे सच्चे मार्ग को स्वीकार नहीं करते हैं, वे राक्षस हैं; उनका सार भी परमेश्वर का प्रतिरोध करने का सार है। सच्चे मार्ग को स्वीकार न करने वाले वे लोग होते हैं जो परमेश्वर का प्रतिरोध करते हैं और भले ही ऐसे लोग बहुत कष्ट झेलें, तब भी वे नष्ट किए जाएँगे। वे सभी जो संसार को त्यागना नहीं चाहते, जो अपने माता-पिता से अलग होना नहीं सह सकते और जो स्वयं को देह के सुखों से दूर रखना सहन नहीं कर सकते, परमेश्वर के प्रति विद्रोही हैं और वे सब विनाश के पात्र बनेंगे। जो कोई भी देहधारी परमेश्वर में विश्वास नहीं करता है वह राक्षस है और यही नहीं, उसे नष्ट कर दिया जाएगा। वे सब जो विश्वास तो करते हैं लेकिन सत्य का अभ्यास नहीं करते, वे जो परमेश्वर के देहधारण में विश्वास नहीं करते और वे जो परमेश्वर के अस्तित्व पर लेशमात्र भी विश्वास नहीं रखते, वे सब विनाश के लक्ष्य होंगे। वे सभी जो बने रह सकते हैं, वे लोग हैं जो शोधन की पीड़ा से गुजरे हैं और अडिग रहे हैं; ये वे लोग हैं जो वास्तव में परीक्षणों से गुजरे हैं। जो कोई परमेश्वर को नहीं मानता शत्रु है; यानी जो कोई भी देहधारी परमेश्वर को नहीं मानता है—चाहे वह इस धारा के भीतर हो या बाहर—मसीह-विरोधी है!
—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, परमेश्वर और मनुष्य साथ-साथ विश्राम में प्रवेश करेंगे
मेरी दया उन पर अभिव्यक्त होती है जो मुझसे प्रेम करते हैं और स्वयं का त्याग करते हैं। इस बीच, कुकर्मियों को मिला दंड निश्चित रूप से मेरे धार्मिक स्वभाव का प्रमाण है, और उससे भी बढ़कर, मेरे क्रोध की गवाही है। जब आपदा आएगी, तो मेरा विरोध करने वाले सभी अकाल और महामारी के शिकार हो जाएँगे और विलाप करेंगे। जिन्होंने कई वर्षों तक मेरा अनुसरण किया है, लेकिन सभी तरह के बुरे कर्म किए हैं, वे अपने पापों का फल भुगतने से नहीं बचेंगे; वे भी लाखों वर्षों में कभी-कभार ही दिखने वाली आपदा में डुबा दिए जाएँगे, और वे लगातार आतंक और भय की स्थिति में जिएँगे। और मेरे वे अनुयायी, जिन्होंने मेरे प्रति परम निष्ठा दर्शाई है, वे आनंद लेंगे और गुणगान करेंगे, मेरी शक्ति की प्रशंसा करेंगे। वे बेफिक्र खुशी की अवर्णनीय मनोदशा का अनुभव करेंगे और ऐसे आनंद में रहेंगे जो मैंने मानवजाति को पहले कभी प्रदान नहीं किया है। क्योंकि मैं मनुष्य के अच्छे कर्मों को सँजोकर रखता हूँ और उसके बुरे कर्मों से घृणा करता हूँ। जबसे मैंने पहली बार मानवजाति की अगुआई करनी आरंभ की, तबसे मैं उत्सुकतापूर्वक मनुष्यों के ऐसे समूह को पाने की आशा करता रहा हूँ, जो मेरे साथ एकचित्त हों। इस बीच मैं उन लोगों को कभी नहीं भूलता, जो मेरे साथ एकचित्त नहीं हैं; अपने हृदय में मैं हमेशा उनसे नफरत करता हूँ, उन्हें बुरे कर्मों के जवाब देने को मजबूर करने के अवसर की प्रतीक्षा करता हूँ, जो कुछ ऐसा है जिसे देखकर मुझे खुशी होगी। अब अंततः मेरा दिन आ गया है, और मुझे अब और प्रतीक्षा करने की आवश्यकता नहीं है!
—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, अपनी मंजिल के लिए पर्याप्त अच्छे कर्म तैयार करो
पुराने संसार के अस्तित्वमान रहते हुए, मैं अपना क्रोध हर देश के ऊपर पूरी जोर से बरसाऊंगा और प्रशासनिक आदेश लागू करूँगा जो समूचे ब्रह्मांड में सार्वजनिक किए जाते हैं और जो कोई भी उनका उल्लंघन करेगा उन्हें ताड़ना दी जाएगी :
जब मैं पूरे ब्रह्मांड से बोलता हूँ, सब लोग मेरी आवाज सुनते हैं, यानी सभी लोग उन सभी कर्मों को देखते हैं जिन्हें मैंने समूचे ब्रह्मांड में अंजाम दिया है। जो मेरे इरादों के विरुद्ध जाते हैं, अर्थात जो मनुष्य के कर्मों से मेरा विरोध करते हैं, वे मेरी ताड़ना के बीच गिरेंगे। मैं स्वर्ग के असंख्य तारों को नया बनाऊँगा; मेरी बदौलत, सूर्य और चंद्रमा नए हो जाएँगे, आकाश अब वैसा नहीं रहेगा जैसा वह था; और पृथ्वी पर सभी चीजें फिर से नई बना दी जाएँगी—यह सब मेरे वचनों के कारण संपन्न किया जाएगा। ब्रह्मांड के भीतर सारे देशों को नए सिरे से बाँटा जाएगा और मेरे राज्य द्वारा प्रतिस्थापित किया जाएगा, जिससे पृथ्वी पर विद्यमान देश हमेशा के लिए विलुप्त हो जाएँगे, और केवल वह राज्य होगा जो मेरी आराधना करता है; पृथ्वी के सभी देशों को नष्ट कर दिया जाएगा और उनका अस्तित्व समाप्त हो जाएगा। ब्रह्मांड के भीतर मनुष्यों में से वे सभी जो दानवों के हैं पूर्णतया नष्ट कर दिए जाएँगे। वे सभी जो शैतान की आराधना करते हैं वे मेरी जलती हुई आग के बीच गिर पड़ेंगे—अर्थात् उनको छोड़कर जो अभी धारा के अन्तर्गत हैं, शेष सभी को राख में बदल दिया जाएगा। जब मैं प्रत्येक जनसमूह को ताड़ना दूँगा तो धार्मिक समुदाय मेरे राज्य में अलग-अलग पैमाने पर लौट आएँगे और मेरे कर्मों के माध्यम से जीत लिए जाएँगे, क्योंकि वे यह देख चुके होंगे कि “सफेद बादल पर सवार पवित्र दिव्य जन” पहले ही आ चुका है। सब लोग अपनी किस्म के अनुसार छाँटे जाएँगे और वे अपने क्रियाकलापों के अनुरूप विविध प्रकार की ताड़नाएँ प्राप्त करेंगे; वे सब जिन्होंने मेरा प्रतिरोध किया है नष्ट हो जाएँगे और जहाँ तक उनकी बात है जिनके पृथ्वी पर कर्मों ने मुझे शामिल नहीं किया है, उन्होंने जिस तरह का व्यवहार किया है उस कारण वे पृथ्वी पर मेरी संतान और मेरे लोगों के शासन के अधीन अस्तित्व में बने रहेंगे। मैं असंख्य देशों और असंख्य लोगों के सामने प्रकट होऊँगा और अपनी वाणी को पृथ्वी पर व्यक्त करूँगा, अपने महान कार्य के पूरे होने की उद्घोषणा करूँगा और सब लोगों को अपनी-अपनी आँखों से यह देखने दूँगा।
—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन, अध्याय 26