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863 अंत के दिनों के लोगों ने परमेश्वर के क्रोध को कभी नहीं देखा

1 ऐसा कहा जा सकता है कि सृजन के समय से लेकर आज तक, किसी भी समूह ने परमेश्वर के अनुग्रह या दया और करूणा का उतना आनन्द नहीं लिया है जितना इस अंतिम समूह ने लिया है। यद्यपि, अंतिम चरण में, परमेश्वर ने न्याय और ताड़ना का कार्य किया है, और उसने अपना कार्य प्रताप और कोप के साथ किया है, फिर भी अधिकांश बार परमेश्वर अपने कार्य को पूरा करने के लिए केवल वचनों का ही उपयोग करता है; वह सिखाने, सींचने, भरण पोषण करने, और पोषित करने के लिए वचनों का उपयोग करता है। इसी बीच, परमेश्वर के कोप को हमेशा छिपाकर रखा गया है, और परमेश्वर के वचनों में उसके कुपित स्वभाव का अनुभव करने के अलावा, बहुत ही कम लोगों ने व्यक्तिगत रूप से उसके क्रोध का अनुभव किया है।

2 कहने का तात्पर्य है, न्याय और ताड़ना के परमेश्वर के कार्य के दौरान, यद्यपि परमेश्वर के वचनों में व्यक्त कोप लोगों को परमेश्वर की महिमा और अपमान के प्रति उसकी असहिष्णुता अनुभव करने देता है, फिर भी यह कोप उसके वचनों से परे नहीं जाता है। दूसरे शब्दों में, परमेश्वर मनुष्य को झिड़कने, मनुष्य को उजागर करने, मनुष्य का न्याय करने, मनुष्य को ताड़ना देने, और यहाँ तक कि मनुष्य की निंदा करने के लिए वचनों का उपयोग करता है—परन्तु परमेश्वर अभी तक मनुष्य के प्रति अत्यंत क्रोधित नहीं हुआ है, और अपने वचनों से परे मुश्किल से ही मनुष्य पर अपने कोप को उन्मुक्त किया है। इसलिए, मनुष्य के द्वारा इस युग में अनुभव की गई परमेश्वर की दया और करूणा परमेश्वर के सच्चे स्वभाव का प्रकाशन हैं, जबकि मनुष्य के द्वारा अनुभव किया गया परमेश्वर का कोप महज उसके कथनों के स्वर और भाव का प्रभाव है। बहुत से लोग इस प्रभाव को ग़लत ढंग से लेते हैं कि यह परमेश्वर के कोप का सच्चा अनुभव करना और सच्चा ज्ञान है।

3 परिणामस्वरूप, अधिकतर लोग मानते हैं कि उन्होंने परमेश्वर के वचनों में उसकी दया और करूणा को देखा है, कि उन्होंने मनुष्य द्वारा अपमान में परमेश्वर की असहिष्णुता को भी देखा है, और उनमें से अधिकांश लोग तो मनुष्य के प्रति परमेश्वर की करुणा और सहिष्णुता की सराहना भी करने लगे हैं। परन्तु भले ही मनुष्य का व्यवहार कितना ही बुरा क्यों न हो, या उसका स्वभाव कितना ही भ्रष्ट क्यों न हो, परमेश्वर ने हमेशा सहन किया है। सहन करने में, उसका उद्देश्य इस बात की प्रतीक्षा करना है कि जो वचन उसने कहे हैं, जो प्रयास उसने किए हैं और जो क़ीमत उसने चुकाई है वे उन लोगों में एक प्रभाव प्राप्त करें जिन्हें वह प्राप्त करना चाहता है।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर II" से रूपांतरित

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