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पूर्ण किये जाने के लिये परमेश्वर से सामान्य संबंध बनाओ

I

जब रिश्ता सामान्य होगा तुम्हारा परमेश्वर से,

तभी तुम पा सकोगे पूर्णता परमेश्वर से,

तब तुम्हारे अंदर परमेश्वर का अनुशासन, शुद्धिकरण

और काट-छाँट लाएगा मनचाहा परिणाम।

अपने दिल में जगह रख पाते हो तुम परमेश्वर के लिये,

नहीं खोजते फ़ायदे अपने, नहीं सोचते भविष्य के बारे में।

बल्कि उठाते हो भार जीवन में प्रवेश का,

समर्पित होते हो परमेश्वर के कार्य को, अनुसरण करते उसके सत्य का।

इस तरह, ग़लत नहीं लक्ष्य तुम्हारे,

सामान्य हैं परमेश्वर से रिश्ते तुम्हारे।

रिश्ते ठीक करना परमेश्वर से,

प्रवेश का पहला कदम है आत्मिक सफ़र में।

हालाँकि परमेश्वर के हाथ में है नियति इंसान की,

पूर्व-निर्धारित है, अपने आप बदली जा नहीं सकती,

पूर्ण किये जा सकते हो तुम

या हासिल हो सकते हो परमेश्वर को तुम,

निर्भर है इस बात पर,

रिश्ते सामान्य हैं या नहीं तुम्हारे परमेश्वर से।

II

शायद कमज़ोर हैं या आज्ञाकारी नहीं हैं कुछ हिस्से तुम्हारे,

लेकिन अगर नज़रिया ठीक है, मंशा सही है तुम्हारी,

परमेश्वर से अगर रिश्ता ठीक रखा है तुमने,

तब परमेश्वर के हाथों पूर्ण बनाए जाने के काबिल होगे तुम।

III

अगर परमेश्वर से तुम्हारे संबंध ठीक न होंगे,

अगर अपने परिवार या देह के लिये ही काम करोगे,

कितनी भी कड़ी मेहनत कर लो,

किसी काम की न होगी ये, ज़ाया हो जाएगी सब।

अगर परमेश्वर से तुम्हारे संबंध सामान्य होंगे,

तो अच्छी बात है ये,

हर चीज़ सही और ठीक हो जाएगी।

सिर्फ़ ये देखता है परमेश्वर

क्या परमेश्वर में आस्था का नज़रिया तुम्हारा सही राह पर है:

किसमें विश्वास है तुम्हारा, किसके लिये विश्वास है,

और क्यों तुम्हें विश्वास है।

अगर तुम देख पाओ, समझ पाओ साफ़ तौर पर इन्हें,

विचार अपने सही कर पाओ, अमल में ला पाओ,

तो विकसित होगा जीवन तुम्हारा, सही राह पर होगे तुम।

"वचन देह में प्रकट होता है" से

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