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246 पश्चाताप करके एक नई शुरुआत करना

1 मैं जागा क्यों नहीं? मैंने सब-कुछ प्रतिष्ठा और नाम पाने में झोंक दिया। मैंने केवल काम और उपदेश पर ध्यान दिया, लेकिन कभी परमेश्वर के वचनों का अभ्यास या उनका अनुभव नहीं किया। मैं जागा क्यों नहीं? मैंने सिर्फ़ पुरस्कारों के लिए मेहनत की। फ़िज़ूल की इच्छाओं और मांगों से भरा हुआ, मैं बेहद स्वार्थी और नीच था। परमेश्वर के वचनों ने मुझे कितनी बार पुकारा, लेकिन मैंने अनसुना कर दिया। मेरा दिल स्वार्थी इच्छाओं से भरा हुआ था, मैं परमेश्वर के उपदेशों पर कैसे ध्यान देता? हे परमेश्वर! मेरी हरकतों ने तुझे बहुत गहरी चोट दी है। मुझे तेरी उपस्थिति में रहकर, तेरे प्रेम का आनंद लेने में शर्म आ रही है। मैं अतीत की बातों को देखना सहन नहीं कर पाता, वह मेरे विद्रोह और कुरूपता से भरा है। मैं अहंकारी, आत्माभिमानी, लंपट और अविवेकी था, मैंने अपने शैतानी स्वभाव की लगाम पूरी तरह खुली छोड़ दी। मेरे अपराध मेरी अंतरात्मा का पीछा करते हैं, मैं अपने पापों को स्वीकार करके रोता हूँ, मैं अपने खोए हुए समय की पूर्ति कैसे करूँ?

2 मैं न्याय के ज़रिए ही जान पाया कि मैं एक पाखंडी हूँ। कितनी ही बार मैंने अपने अमर प्रेम की कसमें खाईं, लेकिन फिर भी परीक्षण के इम्तहान की कसौटी पर खरा नहीं उतर सका। कितनी ही बार मैंने यह दावा करते हुए पश्चाताप और प्रार्थना की, कि मैं एक नया इंसान बन गया हूँ, लेकिन वो सब झूठ था। केवल न्याय के ज़रिए ही मैंने अच्छी तरह से देखा कि अगर मैंने सत्य का अभ्यास नहीं किया, तो मुझे अंततः उजागर किया जाएगा। कठिन इम्तहानों से गुज़रकर मैंने गहराई से पश्चाताप किया, मुझे इस बात से नफ़रत हो गई कि मैं बुरी तरह से भ्रष्ट हूँ और मुझमें इंसानियत नहीं है। मैं परमेश्वर के सामने गिरता हूँ, मैं पश्चाताप से भरा हूँ, मैं परमेश्वर के दिल को सुकून देने के लिए स्वयं को एक नया इंसान बनाऊँगा। हे परमेश्वर! मेरी हरकतों ने तुझे बहुत गहरी चोट दी है। मुझे तेरी उपस्थिति में रहकर, तेरे प्रेम का आनंद लेने में शर्म आ रही है; मैं अपना दिल केवल अपने कर्तव्य को अच्छी तरह से पूरा करने में लगाना चाहता हूँ। मैं अपने आपको तेरे हवाले करना चाहता हूँ, तेरी व्यवस्थाओं और नियम का पालन करना चाहता हूँ। मैं सत्य का अभ्यास करने का संकल्प लेता हूँ, रास्ते में चाहे जितने भी मोड़ और घुमाव आएँ, मैं अंत तक तेरा अनुसरण करने का निश्चय कर चुका हूँ!

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