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परमेश्वर का भय मानने से ही बुराई दूर रह सकती है

I

परमेश्वर का स्वभाव प्रतापी है और क्रोध से भरा है।

वो मेमना नहीं है जो उसका कोई भी वध कर दे।

वो कठपुतली नहीं है जो हो जैसा चाहे नचा ले,

न वो है हवा जो कोई उसपर, हुक्म चला ले।

परमेश्वर का भय मानने से ही बुराई दूर रह सकती है।

परमेश्वर का भय मानने से ही बुराई दूर रह सकती है।

गर परमेश्वर के वजूद में सचमुच यकीं रखते हो,

तो जिसमें ख़ौफ़ हो उसका, तुम ऐसा दिल रखो।

परमेश्वर के सार का अपमान नहीं हो सकता, इस बात को तुम जान लो।

अपमान की वजह हो सकता है कोई शब्द,

विचार, मत, सिद्धांत या कोई बुरा काम।

वजह हो सकता है कोई सौम्य व्यवहार, जिसे मंज़ूर करता हो सदाचार।

मगर एक बार जो तुमने परमेश्वर का अपमान कर दिया,

तो तुमने ख़ुद को बचाने का अवसर गँवा दिया,

और तुम्हारे अंत के दिन जल्द ही आयेंगे,

इसमें ना संदेह है कोई, ये बेहद ख़ौफ़नाक है।

परमेश्वर का भय मानने से ही बुराई दूर रह सकती है।

परमेश्वर का भय मानने से ही बुराई दूर रह सकती है।

II

अपमान परमेश्वर का हो नहीं सकता, अगर तुम जानते नहीं,

शायद तुम में भय ना हो उसका,

मगर अपमान तुम करते रहोगे सर्वदा उसका।

अगर तुम जानते नहीं कैसे, तो परमेश्वर का भय तुम मान नहीं सकते,

परमेश्वर का भय मानने के, बुराई से दूर रहने के,

पथ पर भी चल नहीं सकते।

परमेश्वर का भय मानने से ही बुराई दूर रह सकती है।

परमेश्वर का भय मानने से ही बुराई दूर रह सकती है।

एक बार दिल में जान लिया, परमेश्वर का उल्लंघन संभव नहीं है,

तो फिर जान जाओगे, परमेश्वर का भय मानने

और बुराई से दूर रहने के मायने क्या हैं।

परमेश्वर का भय मानने से ही बुराई दूर रह सकती है।

परमेश्वर का भय मानने से ही बुराई दूर रह सकती है।

परमेश्वर का भय मानने से ही बुराई दूर रह सकती है।

परमेश्वर का भय मानने से ही बुराई दूर रह सकती है।

"वचन देह में प्रकट होता है" से

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