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चूँकि परमेश्वर मनुष्यों को बचाता है, वह उन्हें पूर्ण रूप से बचायेगा

I

चूँकि मानव को परमेश्वर ने बनाया, उसकी रहनुमाई वो करेगा;

चूँकि वो उसे बचाता है,

वो उसे पूरी तरह हासिल करेगा और बचायेगा;

चूँकि वो करता है रहनुमाई मानव की,

उसे सही मंज़िल तक भी वो लाएगा।

चूँकि मानवों को सृजा था परमेश्वर ने,

और उनका प्रबंधन भी वही करता है,

उनके भविष्य और नियति की ज़िम्मेदारी

भी लेनी होगी उसे अपने कांधों पे।

यही है वो कार्य जो सृष्टिकर्ता करता है।

हाँ, सच है कि मानवजाति के भविष्य की आशा को दूर करके ही

विजय कार्य हासिल किया जाता है,

फिर भी परमेश्वर ने बनाई जो मंज़िल मनुष्यों के लिए,

उस तक उन्हें पहुंचाया जायेगा, अंत में।

चूँकि परमेश्वर मानव को ढालता है,

इसलिए तो उसके पास एक मंज़िल है,

और एक भविष्य जो सुनिश्चित है, और एक भविष्य जो सुनिश्चित है।

II

बजाय उस मंज़िल के जो उसे प्रदान की जानी है,

जिसकी इच्छा और अनुसरण मनुष्य करता है, वे हैं वो चाहतें,

जो होती हैं देह की असंयत लालसाओं को पाने की कोशिश में।

दूसरी ओर, परमेश्वर ने तैयार किया है मनुष्य के लिए जो,

वे आशीषें और वायदे हैं जो मिलेंगे मनुष्य को जब शुद्ध हो जायेगा वो।

दुनिया की सृष्टि के बाद मानव के लिए,

परमेश्वर ने की थी इसकी तैयारी।

उन आशीषों और वायदों पर नहीं पड़ी है मनुष्य की देह या,

उसके चुनाव, कल्पना और धारणा की काली छाया।

मंज़िल की तैयारी नहीं की गयी है किसी एक इंसान के लिए,

पर है ये विश्राम का स्थान पूरी मानवजाति के लिए।

यही है सबसे उपयुक्त मंज़िल,

है सबसे उपयुक्त मंज़िल मानवजाति के लिए,

है सबसे उपयुक्त मंज़िल मानवजाति के लिए।

"वचन देह में प्रकट होता है" से

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प्रश्न 24: तुम यह प्रमाण देते हो कि प्रभु यीशु पहले से ही सर्वशक्तिमान परमेश्वर के रूप में वापस आ चुका है, कि वह पूरी सच्चाई को अभिव्यक्त करता है जिससे कि लोग शुद्धिकरण प्राप्त कर सकें और बचाए जा सकें, और वर्तमान में वह परमेश्वर के घर से शुरू होने वाले न्याय के कार्य को कर रहा है, लेकिन हम इसे स्वीकार करने की हिम्मत नहीं करते। यह इसलिए है क्योंकि धार्मिक पादरियों और प्राचीन लोगों का हमें बहुधा यह निर्देश है कि परमेश्वर के सभी वचन और कार्य बाइबल में अभिलेखित हैं और बाइबल के बाहर परमेश्वर का कोई और वचन या कार्य नहीं हो सकता है, और यह कि बाइबल के विरुद्ध या उससे परे जाने वाली हर बात विधर्म है। हम इस समस्या को समझ नहीं सकते हैं, तो तुम कृपया इसे हमें समझा दो। बुलाए हुए बहुत हैं, परन्तु चुने हुए कुछ ही हैं परमेश्वर सम्पूर्ण मानवजाति के भाग्य का नियन्ता है केवल परमेश्वर के प्रबंधन के मध्य ही मनुष्य बचाया जा सकता है