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परमेश्वर के कर्मों को जानने से ही आती है सच्ची आस्था

I

परमेश्वर का कार्य है अभी कहने का,

कोई इशारे नहीं, कोई चमत्कार नहीं।

नहीं है अनुग्रह का युग। परमेश्वर है सामान्य और वास्तविक।

अंतिम दिनों में वो नहीं अलौकिक यीशु,

बल्कि है देहधारी व्यावहारिक परमेश्वर, जो नहीं है इंसान से अलग।

इंसान का परमेश्वर पर है विश्वास परमेश्वर के

अनेक कार्यों, वचनों, और कृत्यों के कारण।

हाँ, परमेश्वर का कथन पाता है

विजय इंसान पर, करता है पूर्ण उसे।

संकेत और चमत्कार नहीं होते आस्था का आधार।

परमेश्वर के कृत्यों से ही जान पाता है उसे इंसान।

II

परमेश्वर प्रकट करता है हर युग में अलग स्वभाव,

अपने कृत्यों का एक अलग अंश।

लेकिन ये सब, फिर भी देते हैं उसके बारे में गहरा ज्ञान,

परमेश्वर पर अधिक व्यावहारिक और सच्चा विश्वास।

हाँ, परमेश्वर का कथन पाता है

विजय इंसान पर, करता है पूर्ण उसे।

संकेत और चमत्कार नहीं होते आस्था का आधार।

परमेश्वर के कृत्यों से ही जान पाता है उसे इंसान।

III

उसकी वास्तविकता को जानो, समझो उसके स्वभाव को

सिर्फ़ उसके वास्तविक कृत्यों को जानकर,

कार्य करने और बोलने के तरीकों को जानकर,

बुद्धि के उसके उपयोग को जानकर,

इंसान को पूर्ण करने के तरीके को जानकर।

समझो कैसे करता है वो कार्य इंसान पर,

समझो उसकी पसंद नापसंद को।

इस प्रकार जान पाओगे तुम सही और गलत का अंतर।

परमेश्वर को जानने से होगी तुम्हारे जीवन में प्रगति।

"वचन देह में प्रकट होता है" से

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