सत्य को खोजने वाले सभी लोगों का हम से सम्पर्क करने का स्वागत करते हैं

मेमने का अनुसरण करना और नए गीत गाना

ठोस रंग

विषय-वस्तुएँ

फॉन्ट

फॉन्ट का आकार

लाइन स्पेस

पृष्ठ की चौड़ाई

0 खोज परिणाम

कोई परिणाम नहीं मिला

`

इंसान को परमेश्वर की राह पर कैसे चलना चाहिए

I

ईश्वर की राह पे चलना नियमों का पालन नहीं है।

ये है देखना हर चीजों को जैसे ईश्वर ने व्यवस्थित है किया,

ज़िम्मेदारी जो है तुम्हें प्रदान की गई,

तुम्हें सौंपी गयी कोई चीज़, परीक्षण दिए गए द्वारा उसके।

ईश्वर की राह पे चलते हुये, ईश्वर को नाराज़ न करो।

ईश्वर के स्वभाव का अपमान न करो।

ईश्वर की राह पे चलते हुए।

II

किसी चीज़ का सामना करो जब, होना चाहिए एक स्तर तुम्हारा,

जानकर की ये है आता ईश्वर के हाथ से। ओ...

ईश्वर की राह पे चलते हुये, ईश्वर को नाराज़ न करो।

ईश्वर के स्वभाव का अपमान न करो।

ईश्वर की राह पे चलते हुए।

ओ....

III

तुम्हे सोचना चाहिए कैसे इस मामले से निपटना चाहिए,

करने को पूरी ज़िम्मेदारियाँ

और होने को वफ़ादार उसके प्रति, उसके प्रति।

ईश्वर की राह पे चलते हुये, ईश्वर को नाराज़ न करो।

ईश्वर के स्वभाव का अपमान न करो।

ईश्वर की राह पे चलते हुए।

ईश्वर की राह पे चलते हुए।

ओ...

"वचन देह में प्रकट होता है" से

पिछला:पवित्र आत्मा के कार्य के सिद्धांत

अगला:परमेश्वर का खुला प्रशासन अखिल ब्रह्माण्ड में

शायद आपको पसंद आये

बुलाए हुए बहुत हैं, परन्तु चुने हुए कुछ ही हैं परमेश्वर सम्पूर्ण मानवजाति के भाग्य का नियन्ता है केवल परमेश्वर के प्रबंधन के मध्य ही मनुष्य बचाया जा सकता है प्रश्न 26: बाइबल ईसाई धर्म का अधिनियम है और जो लोग प्रभु में विश्वास करते हैं, उन्होंने दो हजार वर्षों से बाइबल के अनुसार ऐसा विश्वास किया हैं। इसके अलावा, धार्मिक दुनिया में अधिकांश लोग मानते हैं कि बाइबल प्रभु का प्रतिनिधित्व करती है, कि प्रभु में विश्वास बाइबल में विश्वास है, और बाइबल में विश्वास प्रभु में विश्वास है, और यदि कोई बाइबल से भटक जाता है तो उसे विश्वासी नहीं कहा जा सकता। कृपया बताओ, क्या मैं पूछ सकता हूँ कि इस तरीके से प्रभु पर विश्वास करना प्रभु की इच्छा के अनुरूप है या नहीं?