2. हम मानते हैं कि प्रकाशितवाक्य में जिसकी भविष्यवाणी की गई है उस महान श्वेत सिंहासन का लक्ष्य वे अविश्वासी हैं जो शैतान के होते हैं। जब प्रभु आता है, तो जो लोग उस पर विश्वास करते हैं, उन्हें स्वर्ग में उठाया जाएगा, जिसके बाद परमेश्वर अविश्वासियों को नष्ट करने के लिए आपदाओं की वृष्टि करेंगे। यही महान श्वेत सिंहासन का न्याय है, फिर भी आप गवाही देते हैं कि अंतिम दिनों के परमेश्वर का न्याय पहले ही शुरू हो चुका है। तो हमने परमेश्वर को अविश्वासियों का नाश करने के लिए आपदाओं को बरसाते क्यों नहीं देखा है? यह महान श्वेत सिंहासन का न्याय कैसे हो सकता है?

संदर्भ के लिए बाइबल के पद :

“क्योंकि वह समय आ चुका है कि परमेश्वर के घर से न्याय शुरू किया जाए” (1 पतरस 4:17)

“यदि कोई मनुष्य मेरे वचन सुनता है लेकिन इनका पालन नहीं करता है तो मैं उसका न्याय नहीं करता हूँ : क्योंकि मैं संसार का न्याय करने नहीं, बल्कि संसार को बचाने आया हूँ। वो जो मुझे नकार देता है, और मेरे वचन नहीं स्वीकारता, उसका भी न्याय करने वाला कोई है : मैंने जो मार्ग बताया है वही अंत के दिन उसका न्याय करेगा” (यूहन्ना 12:47-48)

परमेश्वर के प्रासंगिक वचन :

अंत के दिनों का कार्य सभी को अपनी किस्म के अनुसार छाँटना और परमेश्वर की प्रबंधन योजना का समापन करना है, क्योंकि समय निकट है और परमेश्वर का दिन आ गया है। परमेश्वर उन सभी को, जो उसके राज्य में प्रवेश करते हैं—उन सभी को जो अंत तक उसके वफादार रहे हैं—स्वयं परमेश्वर के युग में ले जाता है। फिर भी, स्वयं परमेश्वर के युग के आगमन से पूर्व, परमेश्वर का कार्य मनुष्य के कर्मों की जाँच करना या मनुष्य के जीवन की जाँच-पड़ताल करना नहीं, बल्कि मनुष्य की विद्रोहशीलता का न्याय करना है, क्योंकि परमेश्वर उन सभी को शुद्ध करेगा जो उसके सिंहासन के सामने आते हैं। वे सभी, जिन्होंने आज तक परमेश्वर के पदचिह्नों का अनुसरण किया है, वे लोग हैं जो परमेश्वर के सिंहासन के सामने आते हैं और ऐसा होने से हर वह व्यक्ति जो परमेश्वर के कार्य को उसके अंतिम चरण में स्वीकार करता है, परमेश्वर द्वारा शुद्ध किए जाने का पात्र होता है। दूसरे शब्दों में, परमेश्वर के कार्य को उसके अंतिम चरण में स्वीकार करने वाला हर व्यक्ति परमेश्वर के न्याय का पात्र होता है।

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, मसीह सत्य के द्वारा न्याय का कार्य करता है

अंत के दिनों का मसीह मनुष्य को सिखाने, उसके सार को उजागर करने और उसके वचनों और कर्मों का गहन-विश्लेषण करने के लिए विभिन्न प्रकार के सत्यों का उपयोग करता है। इन वचनों में विभिन्न सत्यों का समावेश है, जैसे कि मनुष्य का कर्तव्य, मनुष्य को परमेश्वर के प्रति समर्पण किस प्रकार करना चाहिए, मनुष्य को किस प्रकार परमेश्वर के प्रति निष्ठावान होना चाहिए, मनुष्य को किस प्रकार सामान्य मानवता जीनी चाहिए, और साथ ही परमेश्वर की बुद्धि और उसका स्वभाव, इत्यादि। ये सभी वचन मनुष्य के सार और उसके भ्रष्ट स्वभावों पर निर्देशित हैं। खास तौर पर वे वचन, जो यह उजागर करते हैं कि मनुष्य परमेश्वर को कैसे अस्वीकार करता है, और भी अधिक इस तथ्य को उजागर करने पर केंद्रित हैं कि मनुष्य शैतान का मूर्त रूप और परमेश्वर के विरुद्ध एक विरोधी शक्ति है। अपने न्याय का कार्य करने में परमेश्वर कुछ वचनों में मनुष्य की प्रकृति को पूरी तरह नहीं समझाता है; बल्कि वह लंबे समय तक उसे उजागर करता है और उसकी काट-छाँट करता है। उजागर और काट-छाँट करने की इन विभिन्न विधियों को साधारण वचनों से प्रतिस्थापित नहीं किया जा सकता है; बल्कि उजागर और काट-छाँट करने के इस कार्य को करने में उस सत्य का उपयोग किया जाता है जो मनुष्य के पास बिल्कुल भी नहीं होता है। केवल इस तरह की विधियाँ ही न्याय कही जा सकती हैं; केवल इस तरह के न्याय द्वारा ही मनुष्य को वश में किया जा सकता है और परमेश्वर के प्रति पूरी तरह से आश्वस्त किया जा सकता है, और इतना ही नहीं, बल्कि मनुष्य परमेश्वर का सच्चा ज्ञान भी प्राप्त कर सकता है। न्याय का कार्य मनुष्य में परमेश्वर के असली चेहरे और उसकी स्वयं की विद्रोहशीलता के सत्य की समझ पैदा करने का काम करता है। न्याय के कार्य ने मनुष्य को परमेश्वर के इरादों, परमेश्वर के कार्य के उद्देश्य और उन रहस्यों के बारे में काफी समझ प्राप्त करने में सक्षम बनाया है जो उसकी समझ से परे होते हैं। इसने मनुष्य को अपने भ्रष्ट सार और अपनी भ्रष्टता की जड़ को समझने और जानने, साथ ही अपने कुरूप चेहरे का पता लगाने में सक्षम बनाया है। ये सभी प्रभाव न्याय के कार्य द्वारा लाए जाते हैं, क्योंकि इस कार्य का सार वास्तव में परमेश्वर के सत्य, मार्ग और जीवन को उन सभी के लिए उद्घाटित करने का कार्य है जो उसमें आस्था रखते हैं। यह कार्य परमेश्वर के द्वारा किया जाने वाला न्याय का कार्य है।

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, मसीह सत्य के द्वारा न्याय का कार्य करता है

कुछ लोग मानते हैं कि परमेश्वर किसी अनजान समय पृथ्वी पर आकर लोगों को दिखाई दे सकता है, जिसके बाद वह व्यक्तिगत रूप से संपूर्ण मनुष्यजाति का न्याय करेगा, एक-एक करके सबकी परीक्षा लेगा, कोई भी नहीं छूटेगा। जो लोग इस ढंग से सोचते हैं, वे देहधारण के इस चरण के कार्य को नहीं जानते। परमेश्वर एक के बाद एक लोगों का न्याय नहीं करता, न ही उन्हें एक-एक करके परीक्षा से गुजारा जाता है; ऐसा करना न्याय का कार्य नहीं होगा। क्या समस्त मनुष्यजाति की भ्रष्टता एक समान नहीं है? क्या पूरी मनुष्यजाति का सार समान नहीं है? न्याय किया जाता है इंसान के भ्रष्ट सार का, शैतान द्वारा भ्रष्ट किए गए इंसानी सार का, और इंसान के सारे पापों का। परमेश्वर मनुष्य के छोटे-मोटे और मामूली दोषों का न्याय नहीं करता। न्याय का कार्य निरूपक है, और किसी व्यक्ति-विशेष के लिए कार्यान्वित नहीं किया जाता। बल्कि यह ऐसा कार्य है जिसमें समस्त मनुष्यजाति के न्याय का प्रतिनिधित्व करने के लिए लोगों के एक समूह का न्याय किया जाता है। देहधारी परमेश्वर द्वारा किया जाने वाला कार्य, संपूर्ण मनुष्यजाति के कार्य का प्रतिनिधित्व करने के लिए लोगों के एक समूह पर स्वयं द्वारा किए गए कार्य का उपयोग करना है, जिसके बाद यह धीरे-धीरे फैलता जाता है। न्याय का कार्य ऐसा ही है। परमेश्वर किसी विशिष्ट प्रकार के व्यक्ति या लोगों के किसी समूह-विशेष का न्याय नहीं करता, बल्कि संपूर्ण मनुष्यजाति की अधार्मिकता का न्याय करता है, जैसे कि परमेश्वर के प्रति मनुष्य का विरोध, या मनुष्य का उसका भय न मानना, या परमेश्वर के कार्य में व्यवधान। जिसका न्याय किया जाता है वो है इंसान का परमेश्वर-विरोधी सार, और यह न्याय का कार्य अंत के दिनों का विजय-कार्य है। देहधारी परमेश्वर का कार्य और वचन जिन्हें इंसान ने देखा है, वे अंत के दिनों के दौरान बड़े श्वेत सिंहासन के सामने न्याय के कार्य हैं, जिसे इंसान ने अतीत से अपनी धारणाओं में पाल रखा था। देहधारी परमेश्वर द्वारा वर्तमान में किया जा रहा कार्य वास्तव में बड़े श्वेत सिंहासन के सामने न्याय है। आज का देहधारी परमेश्वर वह परमेश्वर है जो अंत के दिनों के दौरान संपूर्ण मनुष्यजाति का न्याय करता है। यह देह और कार्य, वचन और इस देह का समस्त स्वभाव उसकी समग्रता हैं। यद्यपि इस देह के कार्य का दायरा सीमित है, और उसमें सीधे तौर पर संपूर्ण ब्रह्मांड शामिल नहीं है, फिर भी न्याय के कार्य का सार संपूर्ण मनुष्यजाति का प्रत्यक्ष न्याय है—यह कार्य केवल चीन के चुने हुए लोगों के लिए नहीं, न ही यह थोड़े-से लोगों के लिए किया जाता है। देह में परमेश्वर के कार्य के दौरान, यद्यपि इस कार्य के दायरे में संपूर्ण ब्रह्माण्ड नहीं है, फिर भी यह संपूर्ण ब्रह्माण्ड के कार्य का प्रतिनिधित्व करता है, जब वह अपनी देह के कार्य के दायरे में उस कार्य को समाप्त कर लेगा तो उसके बाद, वह तुरन्त ही इस कार्य को ब्रह्मांड के भीतर प्रत्येक जगह में उसी तरह से फैला देगा जैसे यीशु के पुनरुत्थान और आरोहण के बाद उसका सुसमाचार फैल गया था। चाहे यह आत्मा का कार्य हो या देह का कार्य, यह ऐसा कार्य है जिसे एक सीमित दायरे में किया जाता है, परन्तु जो संपूर्ण ब्रह्मांड के कार्य का प्रतिनिधित्व करता है। अन्त के दिनों में, परमेश्वर देहधारी पहचान में प्रकट होकर अपना कार्य करता है, और देहधारी परमेश्वर ही वह परमेश्वर है जो बड़े श्वेत सिंहासन के सामने मनुष्य का न्याय करता है। चाहे वह आत्मा हो या देह, जो न्याय का कार्य करता है वह परमेश्वर है जो अंत के दिनों के दौरान मनुष्य का न्याय करता है। इसे उसके द्वारा किए गए कार्य से तय किया जाता है, न कि उसके बाहरी रंग-रूप या अन्य विभिन्न कारकों द्वारा। यद्यपि इन वचनों के बारे में मनुष्य की धारणाएँ हैं, लेकिन कोई भी देहधारी परमेश्वर के न्याय और संपूर्ण मनुष्यजाति पर विजय के तथ्य को नकार नहीं सकता। इंसान चाहे कुछ भी सोचे, मगर तथ्य आखिरकार तथ्य ही हैं। कोई यह नहीं कह सकता है कि “कार्य परमेश्वर द्वारा किया जाता है, परन्तु देह परमेश्वर नहीं है।” यह भ्रांति है, क्योंकि इस कार्य को देहधारी परमेश्वर के सिवाय और कोई नहीं कर सकता।

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, भ्रष्ट मानवजाति को देहधारी परमेश्वर के उद्धार की ज्यादा आवश्यकता है

आज के विजय के कार्य का अभिप्राय यह खुलासा करना है कि मनुष्य का परिणाम क्या होगा। ऐसा क्यों कहा जाता है कि आज की ताड़ना और न्याय, अंत के दिनों के महान श्वेत सिंहासन के सामने का न्याय है? क्या तुम यह नहीं देखते हो? विजय का कार्य अन्तिम चरण क्यों है? क्या यह इस बात का खुलासा करने के लिए नहीं है कि मनुष्य के प्रत्येक वर्ग का परिणाम कैसा होगा? क्या यह प्रत्येक व्यक्ति को ताड़ना और न्याय के विजय कार्य के दौरान उसका असली स्वरूप दिखाने और फिर उसके प्रकार के अनुसार छाँटने के लिए नहीं है? यह कहने के बजाय कि यह मनुष्यजाति को जीतना है, यह कहना बेहतर होगा कि यह इस बात खुलासा करना है कि व्यक्ति के प्रत्येक वर्ग का परिणाम किस प्रकार का होगा। यह लोगों के पापों का न्याय करने और फिर लोगों के विभिन्न वर्गों को उजागर करने और इस प्रकार यह निर्णय करने के बारे में है कि वे दुष्ट हैं या धार्मिक। विजय-कार्य के पश्चात अच्छे को पुरस्कृत करने और बुरे को दंड देने का कार्य आता है। जो लोग पूर्णतः समर्पण करते हैं अर्थात जो पूर्ण रूप से विजय कर लिए गए हैं, उन्हें सम्पूर्ण कायनात में परमेश्वर के कार्य को फैलाने के अगले चरण में रखा जाएगा; जिन्हें विजय नहीं किया गया उनको अंधकार में रखा जाएगा और उन पर महाविपत्ति आएगी। इस प्रकार लोगों को अपनी किस्म के अनुसार छाँटा जाएगा, बुरों को बुरों की जमात में रखा जाएगा और उन्हें फिर कभी सूर्य का प्रकाश नसीब नहीं होगा और धार्मिकों को रोशनी प्राप्त करने और सर्वदा रोशनी में रहने के लिए अच्छे लोगों के साथ रखा जाएगा।

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, विजय के कार्य की वास्तविक कहानी (1)

अंत के दिन वे हैं जब सभी वस्तुएँ विजय के जरिए अपनी किस्म के अनुसार छाँटी जाएँगी। विजय, अंत के दिनों का कार्य है; दूसरे शब्दों में, प्रत्येक व्यक्ति के पापों का न्याय करना, अंत के दिनों का कार्य है। अन्यथा, लोगों की छँटाई उनकी किस्म के अनुसार कैसे की जा सकेगी? तुम लोगों के बीच किस्म के अनुसार की जाने वाली छँटाई का कार्य सम्पूर्ण ब्रह्मांड में ऐसे कार्य का आरंभ है। इसके पश्चात सभी देशों के लोगों और तमाम लोगों को भी विजय-कार्य को स्वीकार करना होगा। इसका अर्थ यह है कि सृष्टि में प्रत्येक व्यक्ति की अपनी किस्म के अनुसार छँटाई होगी और उसे न्याय के लिए न्याय के सिंहासन के समक्ष आत्मसमर्पण करना होगा। कोई भी व्यक्ति और कोई भी वस्तु इस ताड़ना और न्याय को सहने से बच नहीं सकती और न ही कोई व्यक्ति और वस्तु ऐसी है जिसकी किस्म के अनुसार छँटाई नहीं की जाती; प्रत्येक व्यक्ति की छँटाई की जाएगी, क्योंकि सभी चीजों के परिणाम निकट आ रहे हैं और समस्त स्वर्ग और पृथ्वी अपने अंत तक पहुँच गए हैं। मनुष्य उस दिन से कैसे बचेगा जिस दिन मानवीय अस्तित्व का अंत होगा?

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, विजय के कार्य की वास्तविक कहानी (1)

मैं राज्य में शासन करता हूँ, और इससे भी अधिक, मैं पूरे ब्रह्मांड में शासन करता हूँ; मैं राज्य का राजा और ब्रह्मांड का मुखिया दोनों हूँ। अब से मैं उन सभी को इकट्ठा करूँगा, जो चुने हुए लोग नहीं हैं और अन्य-जाति राष्ट्रों के बीच अपना कार्य आरंभ करूँगा, और मैं पूरे ब्रह्मांड के लिए अपने प्रशासनिक आदेशों की घोषणा करूँगा, ताकि मैं सुचारु रूप से अपने कार्य के अगले चरण की शुरुआत कर सकूँ। अन्य-जाति राष्ट्रों के बीच अपने कार्य को फैलाने के लिए मैं ताड़ना का उपयोग करूँगा, जिसका अर्थ है कि मैं उन सभी के विरुद्ध “बल” का उपयोग करूँगा, जो अन्यजातियाँ हैं। स्वाभाविक रूप से, यह कार्य उसी समय किया जाएगा, जिस समय मेरा कार्य चुने हुए लोगों के बीच किया जाएगा। जब मेरे लोग पृथ्वी पर बतौर राजा शासन करेंगे और सामर्थ्य का उपयोग करेंगे, तो यही वह दिन भी होगा जब पृथ्वी के सभी लोगों को जीत लिया जाएगा, और, इससे भी अधिक, यही वह समय होगा जब मैं विश्राम करूँगा—और तभी मैं उन सबके सामने प्रकट होऊँगा, जिन्हें जीता जा चुका है। मैं पवित्र राज्य के समक्ष प्रकट होता हूँ, और अपने आपको मलिनता की भूमि से छिपा लेता हूँ। वे सभी, जिन्हें जीता जा चुका है और जो मेरे सामने समर्पित हो गए हैं, अपनी आँखों से मेरे चेहरे को देखने और अपने कानों से मेरी वाणी सुनने में समर्थ हैं। यह उन लोगों के लिए आशीष है, जो अंत के दिनों में पैदा हुए हैं, यह मेरे द्वारा पूर्वनियत किया गया आशीष है, और यह किसी भी मनुष्य के द्वारा अपरिवर्तनीय है।

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन, अध्याय 29

पिछला: 1. हम मानते हैं कि महान श्वेत सिंहासन के न्याय का तात्पर्य स्वर्ग में परमेश्वर द्वारा स्थापित एक महान मेज से है, जहाँ प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन भर में किए गए पापों को स्वीकार करने के लिए जमीन पर घुटने टेकता है, जिसके बाद परमेश्वर इसका निर्धारण करता है कि वे स्वर्ग के राज्य में प्रवेश करें, या नरक में उतरें। बहरहाल, आप गवाही देते हैं कि परमेश्वर पृथ्वी पर देह में आ गया है और यह कि वह सत्य को व्यक्त कर रहा और अंतिम दिनों के न्याय का कार्य कर रहा है। यह हमारी अपनी समझ से भिन्न क्यों है? परमेश्वर का अंतिम दिनों का न्याय आखिर किस बारे में है?

अगला: 3. क्रूस पर, प्रभु यीशु ने कहा, “पूरा हुआ(यूहन्ना 19:30), इस तरह यह साबित करते हुए कि मानव जाति को बचाने का परमेश्वर का कार्य पूरी तरह से पूर्ण हो गया था। चूँकि हम प्रभु यीशु पर विश्वास करते हैं, हमारे पापों को पहले ही क्षमा कर दिया गया है, और हम अपने विश्वास के द्वारा धर्मी ठहराए गए हैं। जब प्रभु आता है, तो हम सीधे स्वर्ग के राज्य में उठा लिए जाएँगे। परमेश्वर को फिर भी सच्चाई क्यों व्यक्त करनी चाहिए और मनुष्य के न्याय और शुद्धिकरण का कार्य क्यों करना चाहिए?

परमेश्वर के बिना जीवन कठिन है। यदि आप सहमत हैं, तो क्या आप परमेश्वर पर भरोसा करने और उसकी सहायता प्राप्त करने के लिए उनके समक्ष आना चाहते हैं?

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5. पुराने और नए दोनों नियमों के युगों में, परमेश्वर ने इस्राएल में काम किया। प्रभु यीशु ने भविष्यवाणी की कि वह अंतिम दिनों के दौरान लौटेगा, इसलिए जब भी वह लौटता है, तो उसे इस्राएल में आना चाहिए। फिर भी आप गवाही देते हैं कि प्रभु यीशु पहले ही लौट चुका है, कि वह देह में प्रकट हुआ है और चीन में अपना कार्य कर रहा है। चीन एक नास्तिक राजनीतिक दल द्वारा शासित राष्ट्र है। किसी भी (अन्य) देश में परमेश्वर के प्रति इससे अधिक विरोध और ईसाइयों का इससे अधिक उत्पीड़न नहीं है। परमेश्वर की वापसी चीन में कैसे हो सकती है?

संदर्भ के लिए बाइबल के पद :“क्योंकि उदयाचल से लेकर अस्ताचल तक जाति-जाति में मेरा नाम महान् है..., सेनाओं के यहोवा का यही वचन है” (मलाकी...

प्रश्न 1: सर्वशक्तिमान परमेश्वर कहते हैं, "केवल अंत के दिनों का मसीह ही मनुष्य को अनंत जीवन का मार्ग दे सकता है," तो मुझे वह याद आया जो प्रभु यीशु ने एक बार कहा था, "परन्तु जो कोई उस जल में से पीएगा जो मैं उसे दूँगा, वह फिर अनन्तकाल तक प्यासा न होगा; वरन् जो जल मैं उसे दूँगा, वह उसमें एक सोता बन जाएगा जो अनन्त जीवन के लिये उमड़ता रहेगा" (यूहन्ना 4:14)। हम पहले से ही जानते हैं कि प्रभु यीशु जीवन के सजीव जल का स्रोत हैं, और अनन्‍त जीवन का मार्ग हैं। क्या ऐसा हो सकता है कि सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर और प्रभु यीशु समान स्रोत हों? क्या उनके कार्य और वचन दोनों पवित्र आत्मा के कार्य और वचन हैं? क्या उनका कार्य एक ही परमेश्‍वर करते हैं?

उत्तर: दोनों बार जब परमेश्‍वर ने देह धारण की तो अपने कार्य में, उन्होंने यह गवाही दी कि वे सत्‍य, मार्ग, जीवन और अनन्‍त जीवन के मार्ग हैं।...

प्रश्न: प्रभु यीशु कहते हैं: "मेरी भेड़ें मेरा शब्द सुनती हैं" (यूहन्ना 10:27)। तब समझ आया कि प्रभु अपनी भेड़ों को बुलाने के लिए वचन बोलने को लौटते हैं। प्रभु के आगमन की प्रतीक्षा से जुड़ी सबसे महत्वपूर्ण बात है, प्रभु की वाणी सुनने की कोशिश करना। लेकिन अब, सबसे बड़ी मुश्किल ये है कि हमें नहीं पता कि प्रभु की वाणी कैसे सुनें। हम परमेश्वर की वाणी और मनुष्य की आवाज़ के बीच भी अंतर नहीं कर पाते हैं। कृपया हमें बताइये कि हम प्रभु की वाणी की पक्की पहचान कैसे करें।

उत्तर: हम परमेश्वर की वाणी कैसे सुनते हैं? हममें कितने भी गुण हों, हमें कितना भी अनुभव हो, उससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता। प्रभु यीशु में विश्वास...

परमेश्वर का प्रकटन और कार्य परमेश्वर को जानने के बारे में अंत के दिनों के मसीह के प्रवचन मसीह-विरोधियों को उजागर करना अगुआओं और कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारियाँ सत्य के अनुसरण के बारे में सत्य के अनुसरण के बारे में न्याय परमेश्वर के घर से शुरू होता है अंत के दिनों के मसीह, सर्वशक्तिमान परमेश्वर के अत्यावश्यक वचन परमेश्वर के दैनिक वचन सत्य वास्तविकताएं जिनमें परमेश्वर के विश्वासियों को जरूर प्रवेश करना चाहिए मेमने का अनुसरण करो और नए गीत गाओ राज्य का सुसमाचार फ़ैलाने के लिए दिशानिर्देश परमेश्वर की भेड़ें परमेश्वर की आवाज को सुनती हैं परमेश्वर की आवाज़ सुनो परमेश्वर के प्रकटन को देखो राज्य के सुसमाचार पर अत्यावश्यक प्रश्न और उत्तर मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 1) मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 2) मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 3) मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 4) मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 5) मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 6) मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 7) मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 8) मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 9) मैं वापस सर्वशक्तिमान परमेश्वर के पास कैसे गया

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