परिचय
(सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों से उद्धरण)
सभी लोगों को पृथ्वी पर मेरे कार्य के प्रयोजन को समझने की आवश्यकता है, अर्थात् मैं अंततः क्या प्राप्त करने का इरादा रखता हूँ, और इस कार्य को पूरा करने से पहले मुझे इसमें कौन-सा स्तर प्राप्त कर लेना चाहिए। यदि आज तक मेरे साथ चलते रहने के बाद भी लोग यह नहीं समझते कि मेरा कार्य क्या है, तो क्या वे मेरे साथ व्यर्थ में नहीं चले? यदि लोग मेरा अनुसरण करते हैं, तो उन्हें मेरे इरादे जानने चाहिए। मैं पृथ्वी पर हज़ारों सालों से कार्य कर रहा हूँ और आज भी मैं अपना कार्य इसी तरह से जारी रखे हुए हूँ। यद्यपि मेरे कार्य में कई परियोजनाएँ शामिल हैं, किंतु इसका उद्देश्य अपरिवर्तित है; यद्यपि, उदाहरण के लिए, मैं मनुष्य के प्रति न्याय और ताड़ना से भरा हुआ हूँ, फिर भी मैं जो करता हूँ, वह उसे बचाने के वास्ते, और मनुष्य के पूर्ण किए जाने के बाद अपने सुसमाचार को बेहतर ढंग से फैलाने और अन्य-जाति देशों के बीच अपने कार्य को बेहतर ढंग से बढ़ाने के वास्ते है। इसलिए आज, एक ऐसे वक्त, जब कई लोग लंबे समय से अत्यधिक निराश रह चुके हैं, मैं अभी भी अपना कार्य जारी रखे हुए हूँ, मैं वह कार्य जारी रखे हुए हूँ जो मनुष्य को न्याय और ताड़ना देने के लिए मुझे करना चाहिए। इस तथ्य के बावजूद कि जो कुछ मैं कहता हूँ, मनुष्य उससे उकता गया है और मेरे कार्य से जुड़ने की उसकी कोई इच्छा नहीं है, मैं फिर भी वह कार्य कर रहा हूँ जो कि मुझे उचित रूप से करना चाहिए क्योंकि मेरे कार्य का उद्देश्य अपरिवर्तित है और मेरी मूल योजना भंग नहीं होगी। मेरे न्याय का उद्देश्य मनुष्य को मेरे प्रति बेहतर ढंग से समर्पण करने में सक्षम बनाना है, और मेरी ताड़ना का उद्देश्य मनुष्य को बेहतर ढंग से बदलाव हासिल करने में सक्षम बनाना है। यद्यपि मैं जो कुछ भी करता हूँ, वह मेरे प्रबंधन के वास्ते है, फिर भी मैंने कभी ऐसा कोई कार्य नहीं किया है, जो मनुष्य के लाभ के लिए न रहा हो, क्योंकि मैं इस्राएल से बाहर की सभी जातियों को इस्राएलियों के समान ही समर्पित बनाने का इरादा रखता हूँ, उन्हें वास्तविक मनुष्य बनाना चाहता हूँ, ताकि इस्राएल के बाहर की भूमियों में मेरे लिए एक आधार बन सके। यही मेरा प्रबंधन है; यही मेरा अन्य-जाति राष्ट्रों के बीच कार्य है। अभी भी बहुत-से लोग मेरे प्रबंधन को नहीं समझते, क्योंकि वे ऐसी बातों की परवाह नहीं करते हैं और इसके बजाय वे अपने स्वयं के भविष्य और मंजिल की ही परवाह करते हैं। मैं चाहे कुछ भी कहूँ, लोग उस कार्य के प्रति उदासीन रहते हैं जो मैं करता हूँ, इसके बजाय वे पूरे दिल से अपनी भविष्य की मंजिलों पर ही ध्यान केंद्रित करते हैं। अगर चीजें इसी तरह से चलती रहीं, तो मेरा कार्य कैसे फैल सकता है? मेरे सुसमाचार का पूरे संसार में कैसे प्रचार किया जा सकता है? तुम लोगों को जानना चाहिए कि जब मेरा कार्य फैलेगा, तो मैं तुम लोगों को तितर-बितर कर दूँगा और तुम्हें उसी प्रकार प्रहार करूँगा, जैसे यहोवा ने इस्राएल के प्रत्येक गोत्र पर प्रहार किया था। यह सब इसलिए किया जाएगा, ताकि मेरा सुसमाचार सारी पृथ्वी पर फैल सके और अन्य-जाति राष्ट्रों तक मेरा कार्य फैल सके, इस प्रकार मेरे नाम का वयस्कों और बच्चों, सभी के बीच, महान मानकर आदर किया जाएगा और मेरे पवित्र नाम की महिमा सभी जातियों और राष्ट्रों के लोगों के मुख से की जाएगी। इस अंतिम युग में मेरा नाम अन्य-जाति राष्ट्रों के बीच बड़ाई पा सके, मेरे कर्म अन्य-जाति राष्ट्रों के लोगों द्वारा देखे जा सकें, ताकि मेरे कर्मों के कारण वे मुझे सर्वशक्तिमान कहें और मेरे वचन शीघ्र ही साकार हो सकें। मैं सभी लोगों को ज्ञात करवाऊँगा कि मैं केवल इस्राएलियों का परमेश्वर नहीं हूँ, बल्कि समस्त अन्य-जाति राष्ट्रों के लोगों का भी परमेश्वर हूँ, यहाँ तक कि उन राष्ट्रों का भी परमेश्वर हूँ जिन्हें मैंने शाप दिया है। मैं सभी लोगों को यह दिखाऊँगा कि मैं सभी सृजित प्राणियों का परमेश्वर हूँ। यह मेरा सबसे बड़ा कार्य है, अंत के दिनों के लिए मेरी कार्य-योजना का उद्देश्य है और यह एकमात्र कार्य है जिसे मैं अंत के दिनों में पूरा करने का इरादा रखता हूँ।
—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, सुसमाचार को फैलाने का कार्य मनुष्य को बचाने का कार्य भी है
क्या तू हर युग में परमेश्वर द्वारा व्यक्त स्वभाव को ठोस ढंग से ऐसी भाषा में बता सकता है जो उपयुक्त हो और जो उस युग की सार्थकता रखती हो? क्या तू, जो अंत के दिनों के परमेश्वर के कार्य को अनुभव करता है, परमेश्वर के धार्मिक स्वभाव का विस्तार से वर्णन कर सकता है? क्या तू परमेश्वर के स्वभाव की गवाही स्पष्ट और सटीक ढंग से दे सकता है? तू जो देख और अनुभव कर चुका है उस बारे में उन दयनीय, दरिद्र और धर्मनिष्ठ धार्मिक विश्वासियों को कैसे बताएगा जो धार्मिकता के भूखे-प्यासे हैं और यह प्रतीक्षा कर रहे हैं कि तू उनकी चरवाही करेगा? किस प्रकार के लोग तेरी चरवाही की प्रतीक्षा कर रहे हैं? क्या तू कल्पना कर सकता है? क्या तू अपने कंधों के बोझ, अपने आदेश और अपने उत्तरदायित्व से अवगत है? ऐतिहासिक मिशन का तेरा बोध कहाँ है? तू अगले युग के स्वामी के रूप में उचित ढंग से सेवा कैसे करेगा? क्या तुझमें स्वामी होने का प्रबल बोध है? सभी चीजों के स्वामी की व्याख्या कैसे की जानी चाहिए? क्या वास्तव में वही संसार के समस्त सजीव प्राणियों और सभी भौतिक वस्तुओं का स्वामी है? कार्य के अगले चरण की प्रगति के लिए तेरे पास क्या योजनाएँ हैं? कितने लोग प्रतीक्षा कर रहे हैं कि तू उनकी चरवाही करे? क्या तेरा काम बहुत भारी है? वे दरिद्र, दयनीय, अंधे और असहाय हैं और अंधकार में विलाप कर रहे हैं—मार्ग कहाँ है? वे कैसे लालायित रहते हैं कि रोशनी एक टूटते तारे की तरह अचानक नीचे उतरे और अंधकार की उन शक्तियों को भगा दे जिन्होंने इतने सारे वर्षों से मनुष्यों का दमन किया है। वे इसके लिए दिन-रात व्याकुल होकर आस लगाए रहते हैं और लालायित रहते हैं—इसे पूरी तरह कौन जान सकता है? उस दिन भी जब रोशनी कौंधकर जाती है, गहन कष्ट सहते ये लोग रिहाई की उम्मीद के बिना अंधेरी कालकोठरी में कैद रहते हैं; वे कब रोना बंद करेंगे? भयावह है दुर्भाग्य इन दुर्बल आत्माओं का जिन्हें कभी विश्राम नहीं मिला है और बहुत समय से ये क्रूर बंधनों और जमे हुए इतिहास में जकड़ी हुई हैं। और किसने उनके विलाप की आवाज सुनी है? किसने उनकी दयनीय दशा देखी है? क्या तूने कभी सोचा है कि परमेश्वर का हृदय कितना दुखी और चिंतित है? जिस मासूम मानवजाति को उसने अपने हाथों से रचा, उसे वह ऐसी पीड़ा भोगते देखना कैसे सह सकता है? मनुष्य आखिरकार वे पीड़ित हैं जिन्हें जहर दिया गया है। और यूँ तो मनुष्य आज तक बचा हुआ है, लेकिन कौन जान सकता था कि मानवजाति को बहुत पहले ही उस दुष्ट के द्वारा जहर दिया जा चुका है? क्या तू भूल चुका है कि तू भी पीड़ित लोगों में से एक है? क्या तू इन सारे जीवित बचे लोगों को बचाने के लिए परमेश्वर के प्रति अपने प्रेम की खातिर प्रयास करने का इच्छुक नहीं है? क्या तू उस परमेश्वर को प्रतिफल देने के लिए अपनी सारी शक्ति समर्पित करने का इच्छुक नहीं है जो अपनी देह और लहू के समान मानवजाति से प्रेम करता है? अपना असाधारण जीवन जीने के लिए तुम अपने को परमेश्वर द्वारा उपयोग में लाए जाने को वास्तव में कैसे समझते हो? क्या तुम्हारे पास सचमुच यह संकल्प और आस्था है कि तुम एक धर्मपरायण, परमेश्वर-सेवी व्यक्ति का सार्थक जीवन जी सको?
—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, तुझे अपने भविष्य के मिशन से कैसे पेश आना चाहिए?
जो कुछ तुम लोगों ने अनुभव किया और देखा है, वह हर युग के संतों और पैगंबरों के अनुभवों से बढ़कर है, लेकिन क्या तुम लोग मुझे अतीत के इन संतों और पैगंबरों के वचनों से बड़ी गवाही देने में सक्षम हो? अब जो कुछ मैं तुम लोगों को देता हूँ, वह उससे बढ़कर है जो मैंने मूसा और दाऊद को दिया था, उसी प्रकार मैं अपेक्षा करता हूँ कि तुम लोगों की गवाही मूसा की गवाही से बढ़कर हो और तुम लोगों के शब्द दाऊद के शब्दों से बड़े हों। मैं तुम लोगों को सौ गुना देता हूँ—अतः उसी प्रकार मैं तुम लोगों से कहता हूँ कि मुझे सौ गुना वापस करो। तुम्हें पता होना चाहिए कि वह मैं ही हूँ, जो मनुष्य को जीवन देता है, और तुम्हीं लोग हो, जो मुझसे जीवन प्राप्त करते हो और तुम्हें मेरी गवाही अवश्य देनी चाहिए। यह तुम लोगों का वह कर्तव्य है, जिसे मैं नीचे तुम लोगों के लिए भेजता हूँ और जिसे तुम लोगों को मेरे लिए अवश्य निभाना चाहिए। मैंने अपनी सारी महिमा तुम लोगों को दे दी है, मैंने तुम लोगों को वह जीवन दिया है, जो इस्राएल के चुने हुए लोगों को भी कभी नहीं मिला। तुम लोगों को मेरे लिए गवाही देनी चाहिए, अपनी युवावस्था मुझे समर्पित कर दो और अपना जीवन मुझ पर कुर्बान कर दो। जिस किसी को मैं अपनी महिमा दूँगा, वह मेरे लिए गवाही देगा और मेरे लिए अपना जीवन देगा—इसे मैंने पूर्वनियत किया हुआ है। यह एक आशीष है कि मैं अपनी महिमा तुम्हें देता हूँ और यह तुम लोगों का कर्तव्य है कि तुम लोग मेरी महिमा की गवाही दो। अगर तुम लोग केवल आशीष प्राप्त करने की खातिर मुझ पर विश्वास करते हो, तो मेरे कार्य का ज़्यादा महत्व नहीं रह जाएगा, और तुम लोग अपना कर्तव्य नहीं कर रहे होगे। इस्राएलियों ने केवल मेरी दया, प्रेमपूर्ण दयालुता और महानता को देखा था, और यहूदी केवल मेरे धीरज और छुटकारे के गवाह बने थे। उन्होंने मेरे आत्मा के कार्य का बहुत ही छोटा भाग देखा था; और यहाँ तक कि उन्होंने जो समझा था, वह तुम लोगों द्वारा देखी और सुनी गई बातों का केवल दस-हज़ारवाँ हिस्सा ही था। जो कुछ तुम लोगों ने देखा है, वह उससे भी बढ़कर है, जो उनके बीच के महायाजकों ने देखा है। आज तुम लोग जिन सत्यों को समझते हो, वह उनके द्वारा समझे गए सत्यों से बढ़कर है; जो कुछ तुम लोगों ने आज देखा है, वह उससे बढ़कर है जो व्यवस्था के युग में देखा गया था, साथ ही अनुग्रह के युग में भी, और जो कुछ तुम लोगों ने अनुभव किया है, वह उससे कहीं बढ़कर है जो मूसा और एलियाह ने अनुभव किया था। क्योंकि जो कुछ इस्राएलियों ने समझा था, वह केवल यहोवा की व्यवस्था थी, और जो कुछ उन्होंने देखा था, वह केवल यहोवा की पीठ की झलक थी; जो कुछ यहूदियों ने समझा था, वह केवल यीशु का छुटकारा था, जो कुछ उन्होंने प्राप्त किया था, वह केवल यीशु द्वारा दिया गया अनुग्रह था, और जो कुछ उन्होंने देखा था, वह केवल यहूदियों के घर के भीतर यीशु की छवि थी। आज तुम लोग जो देखते हो वह यहोवा की महिमा, यीशु का छुटकारा और वे सारे कर्म हैं जो मैं अब कर रहा हूँ। तुम लोग अपने कानों से मेरे आत्मा के वचनों को भी सुनते हो। और मेरी बुद्धि का अनुभव भी कर चुके हो, मेरी अद्भुतता को जान चुके हो और मेरे स्वभाव के बारे में जान चुके हो। मैंने तुम सब लोगों को अपनी पूरी प्रबंधन योजना भी बताई है। तुम लोगों ने मात्र एक प्रेममय और दयालु परमेश्वर ही नहीं, बल्कि धार्मिकता से भरा हुआ परमेश्वर देखा है। तुम मेरे कार्य की अद्भुतता देख चुके हो और यह जान गए हो कि मैं प्रताप और क्रोध से भरपूर हूँ; इतना ही नहीं, तुम लोग जानते हो कि मैंने एक बार इस्राएल के घराने पर अपना क्रोध बरसाया था और अब यह तुम लोगों पर आ गया है। तुम लोग मेरे स्वर्ग के रहस्यों को यशायाह और यूहन्ना की तुलना में अधिक समझते हो; पिछली पीढ़ियों के सभी संतों की अपेक्षा तुम लोग मेरी मनोहरता और पूजनीयता को कहीं ज्यादा जानते हो। तुम लोगों ने जो प्राप्त किया है वह केवल मेरा सत्य, मेरा मार्ग और मेरा जीवन नहीं है, बल्कि उनसे भी बड़े दर्शन और प्रकाशन हैं जो यूहन्ना ने प्राप्त किए थे। तुम लोग और भी बहुत सारे रहस्य समझते हो और तुम लोगों ने मेरे सच्चे मुखमंडल को भी देखा है; तुम लोगों ने मेरे न्याय को और अधिक स्वीकार किया है और तुम मेरे धार्मिक स्वभाव को और अधिक जानते हो। और इसलिए, यद्यपि तुम लोग अंत के दिनों में जन्मे थे, फिर भी तुम लोग पहले आ चुकी चीजों और अतीत की चीजों को समझते हो और तुम लोगों ने आज की चीजों का भी अनुभव किया है, जो व्यक्तिगत रूप से मेरे द्वारा की गई थीं। जो मैं तुम लोगों से माँगता हूँ वह अत्यधिक नहीं है, क्योंकि मैंने तुम लोगों को इतना ज़्यादा दिया है और तुम लोगों ने मुझमें इतना अधिक देखा है। इसलिए मैं तुम लोगों से अपेक्षा करता हूँ कि बीते युगों के संतों के सामने मेरी गवाही दो, और यह मेरे हृदय की एकमात्र इच्छा है।
—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, तुम आस्था के बारे में क्या जानते हो?
अब मैं तुम्हारी निष्ठा और समर्पण, तुम्हारा प्रेम और गवाही चाहता हूँ। यहाँ तक कि अगर तुम इस समय नहीं जानते कि गवाही क्या होती है या प्रेम क्या होता है, तो तुम्हें अपना सब कुछ मेरे पास ले आना चाहिए और जो एकमात्र खजाना तुम्हारे पास है, यानी तुम्हारी निष्ठा और समर्पण मुझे सौंप देना चाहिए। तुम्हें जानना चाहिए कि मेरे द्वारा शैतान को हराए जाने की गवाही मनुष्य की निष्ठा और समर्पण में निहित है, साथ ही मनुष्य के ऊपर मेरी संपूर्ण विजय की गवाही भी। मुझ पर तुम्हारी आस्था का कर्तव्य है मेरे लिए गवाही देना, किसी अन्य के प्रति नहीं बल्कि मेरे प्रति वफादार होना और अंत तक समर्पित बने रहना। इससे पहले कि मैं अपने कार्य का अगला चरण आरंभ करूँ, तुम्हें मेरी गवाही कैसे देनी चाहिए? तुम्हें मेरे प्रति वफादार और समर्पित कैसे होना चाहिए? क्या तुम अपने कार्य के प्रति अपनी लगन दिखाओगे या उसे ऐसे ही छोड़ दोगे? क्या तुम मेरी हर व्यवस्था (चाहे वह मृत्यु हो या विनाश) के प्रति समर्पित होना चाहोगे, या मेरी ताड़ना से बचने के लिए बीच रास्ते से ही भाग जाओगे? मैं तुम्हें ताड़ना देता हूँ ताकि तुम मेरी गवाही दो, मेरे प्रति निष्ठावान और समर्पित बनो। यह भी कहा जा सकता है कि वर्तमान ताड़ना मेरे कार्य के अगले चरण को करने देने के लिए और भविष्य के कार्य को निर्बाध रूप से आगे बढ़ने देने के लिए है। अतः मैं तुम्हें प्रोत्साहित करता हूँ कि तुम बुद्धिमान हो जाओ और अपने जीवन या अस्तित्व के महत्व को बेकार रेत की तरह मत समझो। क्या तुम सही-सही जान सकते हो कि मेरा आने वाला काम क्या होगा? क्या तुम जानते हो कि आने वाले दिनों में मैं किस तरह काम करूँगा और मेरा कार्य कैसे पूरा किया जाएगा? तुम्हें मेरे कार्य का अनुभव करने का महत्व और इससे भी बढ़कर मुझमें विश्वास रखने का महत्व जानना चाहिए। मैंने इतना कुछ किया है—मैं उसे बीच में कैसे छोड़ सकता हूँ, जैसा कि तुम सोचते हो? मैंने इतनी बड़ी परियोजना शुरू की है—मैं उसे नष्ट कैसे कर सकता हूँ? यह सही है कि मैं इस युग को समाप्त करने आया हूँ, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात जो तुम्हें जाननी चाहिए कि मैं एक नए युग का आरंभ करने वाला हूँ, एक नया कार्य करने वाला हूँ, और इससे भी बढ़कर, राज्य के सुसमाचार को फैलाने वाला हूँ। अतः तुम्हें जानना चाहिए कि वर्तमान कार्य केवल एक युग का आरंभ करने तथा आने वाले समय में सुसमाचार फैलाने और भविष्य में इस युग को समाप्त करने के लिए नींव डालने का कार्य है। मेरा कार्य उतना सरल नहीं है जितना तुम सोचते हो, और न ही वैसा बेकार और निरर्थक है, जैसा तुम्हें लग सकता है। इसलिए मैं अब भी तुमसे कहूँगा: तुम्हें मेरे कार्य के लिए स्वयं को समर्पित करना चाहिए और इससे भी बढ़कर तुम्हें मेरी महिमा के लिए अपने आपको समर्पित करना चाहिए। मेरी लंबे समय से यह लालसा रही है कि तुम मेरी गवाही दो, और इससे भी बढ़कर मैंने लंबे समय से यह देखने के लिए प्रतीक्षा की है कि तुम मेरा सुसमाचार फैलाओ। तुम्हें यह समझना चाहिए कि मेरे हृदय में क्या है।
—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, तुम आस्था के बारे में क्या जानते हो?
पूरे ब्रह्मांड में मैं अपना कार्य कर रहा हूँ और पूर्व में भारी गर्जनाएँ निरंतर जारी हैं और सभी राष्ट्रों और संप्रदायों को झकझोर रही हैं। यह मेरे कथन ही हैं जो सभी लोगों को वर्तमान में ले आए हैं। मैं सब लोगों को अपने कथनों से जीत लेता हूँ, उन्हें इस धारा में गिराता हूँ और उनसे अपने आगे आत्मसमर्पण करवाता हूँ, क्योंकि मैंने बहुत पहले पूरी पृथ्वी से अपनी महिमा वापस लेकर उसे नए सिरे से पूर्व में जारी किया है। भला कौन मेरी महिमा देखने के लिए लालायित नहीं होता? कौन बेसब्री से मेरे लौटने का इंतजार नहीं करता? किसे मेरे पुनः प्रकटन की प्यास नहीं है? कौन मेरी मनोहरता के लिए नहीं तरसता? कौन रोशनी की ओर नहीं आएगा? कौन कनान की समृद्धि नहीं देखेगा? किसे उद्धारकर्ता के लौटने की लालसा नहीं है? कौन उसकी सराहना नहीं करता जिसके पास महान सामर्थ्य है? मेरे कथन पूरी पृथ्वी पर प्रसारित होंगे और मैं अपने चुने हुए लोगों के सामने और अधिक वचन व्यक्त करूँगा और कहूँगा, जैसे शक्तिशाली गर्जन पर्वतों और नदियों को हिला रहा हो। मैं अपने वचन पूरे ब्रह्मांड से और मानवजाति से बोलता हूँ। इस प्रकार मेरे मुँह से निकले वचन मनुष्य की निधि बन गए हैं और सभी लोग मेरे वचनों को सँजोते हैं। बिजली पूर्व से लेकर पश्चिम तक कौंधती है। मेरे वचन ऐसे हैं कि मनुष्य इनसे अलग होने का अनिच्छुक होता है और ये मनुष्य के लिए अथाह भी हैं और यही नहीं, इनके कारण मनुष्य आनन्द का अनुभव करता है। नवजात शिशुओं की तरह सभी लोग खुशी और आनंद से भरे हैं और मेरे आगमन का जश्न मनाते हैं। अपने कथनों के माध्यम से मैं सब लोगों को अपने समक्ष ले आऊँगा। उसके बाद मैं औपचारिक रूप से मानवजाति के बीच प्रवेश करूँगा और ऐसा करूँगा कि वे मेरी पूजा करने आएँ। मुझसे प्रवाहित होती महिमा और मेरे मुँह से निकले वचनों के चलते सब लोग मेरे समक्ष आते हैं और देखते हैं कि बिजली पूर्व से चमकती है और मैं भी पूर्व में “जैतून के पर्वत” पर उतर चुका हूँ, और मैं बहुत पहले पृथ्वी पर आ चुका हूँ, और मैं अब यहूदियों का पुत्र नहीं हूँ, बल्कि पूर्व की बिजली हूँ। क्योंकि बहुत पहले मेरा पुनरुत्थान हो चुका है, और मैं मानवजाति के बीच से जा चुका हूँ, और फिर अपनी महिमा के साथ उसके बीच पुनः प्रकट हुआ हूँ। मैं वही हूँ जिसकी आराधना अब से असंख्य युगों पहले की गई थी, और मैं वह शिशु भी हूँ जिसे अब से असंख्य युगों पहले इस्राएलियों ने त्याग दिया था। उससे भी अधिक, मैं वर्तमान युग का संपूर्ण-महिमामय सर्वशक्तिमान परमेश्वर हूँ! सभी मेरे सिंहासन के सामने आएँ और मेरे महिमामय मुखमंडल को देखें, मेरे कथन सुनें और मेरे कर्मों को देखें। यही मेरा संपूर्ण इरादा है; यही मेरी योजना का अंत और चरमोत्कर्ष है और साथ ही मेरे प्रबंधन का उद्देश्य भी है : तमाम राष्ट्र मेरी पूजा करें, तमाम मुख मुझे स्वीकार करें, तमाम लोग मुझ पर भरोसा रखें और मेरे चुने तमाम लोग मेरे सामने आत्मसमर्पण करें!
—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, सात गर्जनाएँ गरजती हैं—भविष्यवाणी करती हैं कि राज्य का सुसमाचार पूरे ब्रह्मांड में फैल जाएगा