बुरी आत्माओं का कार्य क्या है? बुरी आत्माओं के कार्य की क्या अभिव्यक्तियाँ हैं?

12 मार्च, 2021

परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:

शैतान की ओर से कौन-सा कार्य आता है? शैतान से आने वाले काम में, लोगों के भीतर के दृश्य अस्पष्ट होते हैं; लोगों में सामान्य मानवता नहीं होती है, उनके कार्यों के पीछे की प्रेरणाएं गलत होती हैं, और यद्यपि वे परमेश्वर से प्रेम करना चाहते हैं, फिर भी उनके भीतर सदैव आरोप-प्रत्यारोप चलते रहते हैं और ये दोषारोपण और विचार उनमें निरंतर व्यवधान का कारण बनते हैं, उनके जीवन के विकास को सीमित कर देते हैं और सामान्य स्थिति में परमेश्वर के समक्ष आने से रोक देते हैं। कहने का अर्थ है कि जैसे ही लोगों में शैतान का कार्य आरंभ होता है, तो उनके हृदय परमेश्वर के समक्ष शांत नहीं रह सकते। ऐसे लोगों को पता नहीं होता कि वे स्वयं के साथ क्या करें—जब वे लोगों को इकट्ठा होते देखते हैं, वे भाग जाना चाहते हैं और जब दूसरे प्रार्थना करते हैं तो वे अपनी आँखें बंद नहीं रख पाते। दुष्ट आत्माओं का कार्य मनुष्य और परमेश्वर के बीच का सामान्य संबंध बर्बाद कर देता है और लोगों के पिछले दर्शनों या उनके जीवन प्रवेश के पिछले मार्ग को उलट देता है; अपने हृदयों में वे कभी परमेश्वर के क़रीब नहीं आ सकते, ऐसी बातें हमेशा होती रहती हैं, जो उनमें बाधा पैदा करती हैं और उन्हें बंधन में बांध देती हैं। उनके हृदय शांति प्राप्त नहीं कर पाते और उनमें परमेश्वर से प्रेम करने की शक्ति नहीं बचती, और उनकी आत्माएं पतन की ओर जाने लगती हैं। शैतान के कार्य के प्रकटीकरण ऐसे हैं। शैतान के कार्य के प्रकटीकरण हैं : अपने स्थान पर डटे रह पाने और गवाही दे पाने में असमर्थ होना, यह तुम्हें ऐसा व्यक्ति बना देता है जो परमेश्वर के समक्ष दोषी है और जो परमेश्वर के प्रति निष्ठा नहीं रखता। जब शैतान हस्तक्षेप करता है, तुम अपने भीतर परमेश्वर के प्रति प्रेम और वफ़ादारी खो देते हो, तुम्हारा परमेश्वर के साथ सामान्य संबंध खत्म हो जाता है, तुम सत्य या स्वयं के सुधार का अनुसरण नहीं करते, तुम पीछे हटने लगते हो और निष्क्रिय बन जाते हो, तुम स्वयं को आसक्त कर लेते हो, तुम पाप के फैलाव को खुली छूट दे देते हो और पाप से घृणा नहीं करते; इससे बढ़कर, शैतान का हस्तक्षेप तुम्हें स्वच्छंद बना देता है, इसकी वजह से तुम्हारे भीतर से परमेश्वर का स्पर्श हट जाता है और तुम्हें परमेश्वर के बारे में शिकायत करने और उसका विरोध करने को प्रेरित करता है, जिससे तुम परमेश्वर पर सवाल उठाते हो; तुम्हारे द्वारा परमेश्वर को त्याग देने का खतरा भी होता है। यह सब शैतान की ओर से आता है।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'पवित्र आत्मा का कार्य और शैतान का कार्य' से उद्धृत

आज कुछ दुष्ट आत्माएँ हैं, जो मनुष्य को अलौकिक चीजों के माध्यम से धोखा देती हैं; जो उनके द्वारा नक़ल किए जाने के अलावा और कुछ नहीं है, जो ऐसे कार्य के द्वारा मनुष्य को धोखा देने के लिए की जाती है, जो वर्तमान में पवित्र आत्मा द्वारा नहीं किया जाता। कई लोग चमत्कार करते हैं, बीमारों को चंगा करते हैं और दुष्टात्माओं को निकालते हैं; वे बुरी आत्माओं के कार्य के अलावा और कुछ नहीं हैं, क्योंकि पवित्र आत्मा वर्तमान में ऐसा कार्य नहीं करता, और जिन्होंने उस समय के बाद से पवित्र आत्मा के कार्य की नकल की है, वे निस्संदेह बुरी आत्माएँ हैं। उस समय इस्राएल में किया गया समस्त कार्य अलौकिक प्रकृति का था, लेकिन पवित्र आत्मा अब इस तरीके से कार्य नहीं करता, और अब ऐसा हर कार्य शैतान द्वारा की गई नकल और उसका भेस है और उसके द्वारा की जाने वाली गड़बड़ी है। लेकिन तुम यह नहीं कह सकते कि जो कुछ भी अलौकिक है, वह बुरी आत्माओं से आता है—यह परमेश्वर के कार्य के युग पर निर्भर करता है।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'देहधारण का रहस्य (1)' से उद्धृत

यदि वर्तमान समय में ऐसा कोई व्यक्ति उभरे, जो चिह्न और चमत्कार प्रदर्शित करने, दुष्टात्माओं को निकालने, बीमारों को चंगा करने और कई चमत्कार दिखाने में समर्थ हो, और यदि वह व्यक्ति दावा करे कि वह यीशु है जो आ गया है, तो यह बुरी आत्माओं द्वारा उत्पन्न नकली व्यक्ति होगा, जो यीशु की नकल उतार रहा होगा। यह याद रखो! परमेश्वर वही कार्य नहीं दोहराता। कार्य का यीशु का चरण पहले ही पूरा हो चुका है, और परमेश्वर कार्य के उस चरण को पुनः कभी हाथ में नहीं लेगा। परमेश्वर का कार्य मनुष्य की धारणाओं के साथ मेल नहीं खाता; उदाहरण के लिए, पुराने नियम ने मसीहा के आगमन की भविष्यवाणी की, और इस भविष्यवाणी का परिणाम यीशु का आगमन था। चूँकि यह पहले ही घटित हो चुका है, इसलिए एक और मसीहा का पुनः आना ग़लत होगा। यीशु एक बार पहले ही आ चुका है, और यदि यीशु को इस समय फिर आना पड़ा, तो यह गलत होगा। प्रत्येक युग के लिए एक नाम है, और प्रत्येक नाम में उस युग का चरित्र-चित्रण होता है। मनुष्य की धारणाओं के अनुसार, परमेश्वर को सदैव चिह्न और चमत्कार दिखाने चाहिए, सदैव बीमारों को चंगा करना और दुष्टात्माओं को निकालना चाहिए, और सदैव ठीक यीशु के समान होना चाहिए। परंतु इस बार परमेश्वर इसके समान बिल्कुल नहीं है। यदि अंत के दिनों के दौरान, परमेश्वर अब भी चिह्नों और चमत्कारों को प्रदर्शित करे, और अब भी दुष्टात्माओं को निकाले और बीमारों को चंगा करे—यदि वह बिल्कुल यीशु की तरह करे—तो परमेश्वर वही कार्य दोहरा रहा होगा, और यीशु के कार्य का कोई महत्व या मूल्य नहीं रह जाएगा। इसलिए परमेश्वर प्रत्येक युग में कार्य का एक चरण पूरा करता है। ज्यों ही उसके कार्य का प्रत्येक चरण पूरा होता है, बुरी आत्माएँ शीघ्र ही उसकी नकल करने लगती हैं, और जब शैतान परमेश्वर के बिल्कुल पीछे-पीछे चलने लगता है, तब परमेश्वर तरीक़ा बदलकर भिन्न तरीक़ा अपना लेता है। ज्यों ही परमेश्वर ने अपने कार्य का एक चरण पूरा किया, बुरी आत्माएँ उसकी नकल कर लेती हैं। तुम लोगों को इस बारे में स्पष्ट होना चाहिए।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'आज परमेश्वर के कार्य को जानना' से उद्धृत

कुछ लोग कहते हैं कि पवित्र आत्मा हर समय उनमें कार्य कर रहा है। यह असंभव है। यदि वे कहते कि पवित्र आत्मा हमेशा उनके साथ है, तो यह यथार्थपरक होता। यदि वे कहते कि उनकी सोच और उनका बोध हर समय सामान्य रहता है, तो यह भी यथार्थपरक होता और दिखाता कि पवित्र आत्मा उनके साथ है। यदि वे कहते हैं कि पवित्र आत्मा हमेशा उनके भीतर कार्य कर रहा है, कि वे हर पल परमेश्वर द्वारा प्रबुद्ध और पवित्र आत्मा द्वारा द्रवित किए जाते हैं, और हर समय नया ज्ञान प्राप्त करते हैं, तो यह किसी भी तरह से सामान्य नहीं है। यह पूर्णत: अलौकिक है! बिना किसी संदेह के, ऐसे लोग बुरी आत्माएँ हैं! यहाँ तक कि जब परमेश्वर का आत्मा देह में आता है, तब भी ऐसे समय होते हैं जब उसे भोजन करना चाहिए और आराम करना चाहिए—मनुष्यों की तो बात ही छोड़ दो। जो लोग बुरी आत्माओं से ग्रस्त हो गए हैं, वे देह की कमजोरी से रहित प्रतीत होते हैं। वे सब-कुछ त्यागने और छोड़ने में सक्षम होते हैं, वे भावनाओं से रहित होते हैं, यातना सहने में सक्षम होते हैं और जरा-सी भी थकान महसूस नहीं करते, मानो वे देहातीत हो चुके हों। क्या यह नितांत अलौकिक नहीं है? दुष्ट आत्माओं का कार्य अलौकिक है और कोई मनुष्य ऐसी चीजें प्राप्त नहीं कर सकता। जिन लोगों में विवेक की कमी होती है, वे जब ऐसे लोगों को देखते हैं, तो ईर्ष्या करते हैं : वे कहते हैं कि परमेश्वर पर उनका विश्वास बहुत मजबूत है, उनकी आस्था बहुत बड़ी है, और वे कमज़ोरी का मामूली-सा भी चिह्न प्रदर्शित नहीं करते! वास्तव में, ये सब दुष्ट आत्मा के कार्य की अभिव्यक्तियाँ है। क्योंकि सामान्य लोगों में अनिवार्य रूप से मानवीय कमजोरियाँ होती हैं; यह उन लोगों की सामान्य अवस्था है, जिनमें पवित्र आत्मा की उपस्थिति होती है।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'अभ्यास (4)' से उद्धृत

क्या तुम अपनी आत्मा को महसूस कर पाते हो? क्या तुम अपनी आत्मा को स्पर्श कर पाते हो? क्या तुम समझ पाते हो कि तुम्हारी आत्मा क्या कर रही है? तुम नहीं समझ पाते, है ना? यदि तुम ऐसी बातों को महसूस कर पाते हो या समझ पाते हो, तो यह तुम्हारे भीतर कोई अन्य आत्मा है जो बलपूर्वक कुछ कर रही है-तुमसे चीज़ें करवा और बुलवा रही है। यह तुमसे बाहर की कोई चीज़ है, यह तुम्हारी अंतर्निहित चीज़ नहीं है। जिन लोगों के अंदर दुष्टतात्मा कार्यरत रही है, उन्हें इसकी गहरी समझ होती है।

— "मसीह की बातचीत के अभिलेख" में 'परमेश्वर की देह और आत्मा के एकत्व को कैसे समझें' से उद्धृत

जब लोगों में परमेश्वर के बारे में कुछ समझ होती है, तो वे स्वेच्छा से उसके लिए कष्ट सह सकते हैं और उसके लिए अपना जीवन समर्पित कर सकते हैं। हालाँकि, उनके अंदर की कमजोरियाँ अभी भी शैतान के नियंत्रण में होती हैं, और अभी भी उनके लिए पीड़ा का कारण बन सकती हैं। दुष्ट आत्माएँ अभी भी लोगों में कार्य कर सकती हैं, हस्तक्षेप कर सकती हैं और उलझन की मनःस्थिति पैदा कर सकती हैं, उन्हें पागल कर सकती हैं, असहज महसूस करा सकती हैं और हर तरीके से परेशान कर सकती हैं। अभी भी मन या प्राण की कुछ ऐसी चीज़ें लोगों के भीतर होती हैं जो शैतान के द्वारा नियंत्रित की जा सकती हैं और वह चालाकी से इनसे काम निकाल सकता है। यही कारण है कि तुम बीमार पड़ जाते हो, परेशान हो जाते हो और आत्महत्या कर सकते हो, और कभी-कभी तुम यह भी महसूस कर सकते हो कि दुनिया वीरान है, या कि जीवन का कोई अर्थ नहीं है। दूसरे शब्दों में, ये मानवीय पीड़ाएं अभी भी शैतान के आदेश के अधीन है; यह मनुष्य की घातक कमज़ोरियों में से एक है। शैतान अभी भी उन चीज़ों का उपयोग करने में सक्षम है जिन्हें इसने भ्रष्ट किया और रौंदा है; ये वे हथियार हैं जिन्हें शैतान मानवता के विरुद्ध उपयोग कर सकता है। ... दुष्‍टात्‍माएँ अपना कार्य करने के लिए कोई भी मौका नहीं छोड़ती हैं; वे तुम्‍हारे भीतर से बोल सकती हैं या तुम्‍हारे कानों में खुसर-फुसर कर सकती हैं, तुम्‍हारे विचारों और मन को बेतरतीब बना सकती हैं। वे पवित्र आत्‍मा के स्पर्श को भी दबा सकती हैं ताकि तुम उसे महसूस न कर सको। उसके बाद, तुम्‍हारी सोच को भ्रमित तथा तुम्‍हारे दिमाग को अस्‍तव्‍यस्‍त करने के द्वारा वे तुममें दखल देने लगती हैं, जिस कारण तुम अशांत और परेशान हो जाते हो। दुष्‍टात्‍माओं का लोगों पर कार्य इस प्रकार का होता है। अगर लोग इसे समझ नहीं पाये, तो वे खुद को बड़े खतरे में पायेंगे।

— "मसीह की बातचीत के अभिलेख" में 'परमेश्वर द्वारा जगत की पीड़ा का अनुभव करने का अर्थ' से उद्धृत

संदर्भ के लिए धर्मोपदेश और संगति के उद्धरण:

बुरी आत्माओं के काम की सबसे स्पष्ट विशेषता यह है कि यह अलौकिक है। बुरी आत्माएँ जो शब्द बोलतीं हैं या जो लोगों से वे करने को कहतीं हैं वो बातें असामान्य, बेतुकी और सामान्य मानवता की मूल नैतिकता और आचारनीति से भी विश्वासघात करने वाली होती हैं, और उनके शब्द और कार्य ऐसे होते हैं कि वे लोगों को धोखा देने, परेशान करने और भ्रष्ट करने के अलावा कुछ नहीं करते। जब दुष्ट आत्माएँ लोगों को अपने वश में कर लेतीं हैं, तो वे बेचैन और असहज हो जाते हैं, कुछ तो असामान्य तक हो जाते हैं, जबकि अन्य लोग एक धुंध में पड़ जाते हैं, और कुछ खुद को अत्यधिक चिंतित और शांत बैठने में असमर्थ पाते हैं। किसी भी हाल में, जब दुष्ट आत्माएँ लोगों को अपने वश में कर लेतीं हैं, तो वे बदल जाते हैं, कुछ ऐसा बन जाते हैं जो न तो मानव है और न ही राक्षस, और अपनी सामान्य मानवता और तर्कशक्ति खो देते हैं। यह इस बात को साबित करने के लिए पर्याप्त है कि दुष्ट आत्माओं का सार दुष्ट और बदसूरत है, जो कि बिल्कुल शैतान का सार है।

जिन लोगों में दुष्ट आत्माओं का काम है (जो राक्षसों के वश में हैं) उनकी मुख्य अभिव्यक्तियाँ इस प्रकार हैं:

1. बुरी आत्माएँ जिन लोगों में कार्य कर रही होती हैं वे अक्सर लोगों को ऐसे-वैसे काम करने के लिए कहते हैं, या किसी को कुछ बताने को कहते हैं, या झूठी भविष्यवाणियाँ करने के लिए कहते हैं।

2. बुरी आत्माएँ जिन लोगों में कार्य कर रही होती है वे अक्सर प्रार्थना में तथाकथित "भाषाएँ" बोलते हैं जो कोई नहीं समझता है, खुद बोलने वाला भी इसे नहीं समझता है। कुछ वक्ता स्वयं "भाषाओँ की व्याख्या" भी कर सकते हैं।

3. बुरीआत्माएँ जिन लोगों में कार्य रही होती हैं वे हमेशा, अत्यधिक बारम्बार, प्रकाशन प्राप्त कर रहे होते हैं, एक क्षण में बुरी आत्माओं द्वारा एक दिशा में, तो दूसरे क्षण में दूसरी दिशा में संचालित होता है। वह हर वक्त एक व्याकुलता की स्थिति में रहता है।

4. बुरी आत्माएँ जिन लोगों में कार्य कर रही होती हैं, वे बड़ी तत्परता से कुछ करना चाहते हैं, उनमें इंतजार कर पाने का धीरज नहीं होता है, वे आधी रात में भी दौड़ पड़ते हैं और उनका व्यवहार विशेष रूप से असामान्य होता है।

5. बुरी आत्माएँ जिन लोगों में कार्य कर रही होती हैं वे निरंकुश रूप से घमंडी होते हैं, उनमें विवेक नहीं होता है, उनके सभी कथन दूसरों को नीचा दिखाने वाले होते हैं और आदेश देने वाले पद से आते हैं। वे लोगों को उलझाते हैं और दुष्टात्माओं की तरह उन्हें चीज़ें करने को बाध्य करते हैं।

6. बुरी आत्माएँ जिन लोगों में कार्य कर रही होती हैं वे नहीं जानते कि सत्य के बारे में सहभागिता कैसे करें, परमेश्वर के कार्य पर ध्यान देना तो दूर की बात है, उनमें परमेश्वर के प्रति कोई सम्मान नहीं होता है और सदैव स्वेच्छाचारी और स्वयंभू बनने का प्रयास कर रहे होते हैं, कलीसिया की सामान्य व्यवस्था को भंग करने के लिए सभी प्रकार के उपद्रव करने में सक्षम होते हैं।

7. बुरी आत्माएँ जिन लोगों में का कार्य कर रही होती हैं वे अकथनीय रूप से अपने आपको किसी और के रूप में जताते हैं, किसी की आत्मा होने या किसी के द्वारा भेजे गए होने का दावा करते हैं और कि लोगों को उसकी बात सुननी चाहिए।

8. बुरी आत्माएँ जिन लोगों में कार्य कर रही होती हैं उनमें आम तौर पर कोई सामान्य समझ नहीं होती है। वे कदापि कोई सत्य समझ नहीं सकते हैं; उनमें समझने की बिल्कुल कोई क्षमता नहीं होती, न ही वे पवित्र आत्मा द्वारा प्रबुद्ध किये गये होते हैं, और उनके विचार अस्तव्यस्त होते हैं। चीज़ों को समझते समय, ये लोग असाधारण रूप से बेढंगे होते हैं।

9. बुरी आत्माएँ जिन लोगों में कार्य कर रही होती हैं वे काम करते समय दूसरों को उपदेश देने पर विशेष ध्यान देते हैं। हर चीज़ जो वो कहते और करते हैं वो अन्य लोगों पर हमला करने, बाँधने, भ्रष्ट करने के लिए होता है, वे लोगों के संकल्प तोड़ने की हद तक जाते हैं और उन्हें नकरात्मक बनाते हैं जिसकी वजह से लोग अपने आपको फिर उठा नहीं पाते हैं; केवल तभी वे छोड़ेंगे। उनके सभी कार्यकलाप विघ्न और खलल उत्पन्न करने और सभी प्रकार के उपद्रव करने के बारे में हैं। वे सिर्फ शुद्ध रूप से शैतान हैं, जो दूसरों को हानि पहुंचाते, उनसे खिलवाड़ करते और उन्हें निगल जाते हैं, और ज्यों ही वे अपनी मनमानी कर लेते हैं, वे प्रसन्न महसूस करते हैं। यह दुष्ट आत्माओं के काम का प्राथमिक उद्देश्य है।

10. बुरी आत्माएँ जिन लोगों में कार्य कर रही होती हैं वे बिल्कुल असामान्य जीवन जीते हैं। उनकी आँखों में एक अशुभ चमक होती है, और उनके कहे शब्द बहुत ही भयानक होते हैं मानो कि एक दुष्टात्मा धरती पर उतर आई हो। इस प्रकार के व्यक्ति के जीवन में कोई ढंग नहीं होता, वो अप्रशिक्षित जंगली जानवरों के समान ढुलमुल होते हैं। वे दूसरों के लिए अत्यंत घिनौने और अप्रिय होते हैं। एक ऐसा व्यक्ति जिसे दुष्टात्माओं ने बांध रखा है, ठीक ऐसा ही दिखता है।

ऊपर बताये गये दस प्रकार दुष्ट आत्माओं के काम की मुख्य अभिव्यक्तियाँ हैं। कोई भी व्यक्ति जो इन अभिव्यक्तियों में से किसी एक को भी प्रदर्शित करता है, उसमें निश्चित रूप से दुष्ट आत्माओं का काम होगा। साफ़ तौर पर कहें तो, जो लोग दुष्ट आत्माओं के काम की उपरोक्त अभिव्यक्तियों में से चाहे कोई भी प्रकार प्रदर्शित करते हों, उनके पास बुरी आत्माओं का काम है। वह व्यक्ति जिसमें बुरी आत्माएँ काम कर रही होती हैं अक्सर ऐसे लोगों से नफ़रत करता है और जान-बूझकर दूर रहता है जिनमें पवित्रात्मा काम कर रहा होता है और जो सत्य के बारे में संगति कर सकते हैं। अक्सर, कोई जितना अधिक बेहतर होता है, वो उस पर उतना ही हमला करना और उसकी निंदा करना चाहता है। कोई जितना अधिक मूर्ख होता है, वह उतना ही उसे मक्खन लगाता है, वो खासकर ऐसे लोगों के सम्पर्क में आना चाहता है। जब दुष्ट आत्माएँ काम करती हैं, वे हमेशा सच और झूठ में भ्रम पैदा करती हैं, सकारात्मक को नकारात्मक बताती हैं और नकारात्मक को सकारात्मक। यह सटीक रूप से दुष्टात्माओं का काम है।

— 'कार्य व्यवस्था' से उद्धृत

ज़्यादातर लोग बुरी आत्माओं के काम की पहचान केवल तभी कर सकते हैं जब वह अलौकिक हो, लेकिन जब ऐसा नहीं होता है तब वे संघर्ष करते हैं। इसके लिए लोगों को खुद को सत्य से लैस करने की, और बुरी आत्माओं से पैदा हुई असंख्य भ्रांतियों की पहचान करने के लिए सत्य का उपयोग करने की, आवश्यकता होती है; तब बुरी आत्माओं के काम का असली चेहरा पहचानना आसान हो जाता है। वास्तव में, सभी भ्रांतियाँ और विधर्म बुरी आत्माओं से उत्पन्न होते हैं, और शैतान के सभी दानव राजा बुरी आत्माओं के ही अवतार हैं। लेकिन क्या उनके शब्द और कार्य अलौकिक होते हैं? बिल्कुल नहीं; बाह्य रूप से, कुछ लोग अत्यधिक तर्कसंगत भी दिखाई देते हैं—ठीक यही शैतान को इतना शातिर बनाता है। इस तरह, पहचान के लिए सबसे बुनियादी सिद्धांत, परमेश्वर के वचनों का और सभी सैद्धांतिक तर्कों को आँकने के लिए सत्य का उपयोग करना है। वह सब जो सत्य के अनुसार नहीं है, विधर्म और भ्रांति है, और यह सब बुरी आत्माओं से उत्पन्न होता है। वे सभी जो लोगों को ठगते हैं और परमेश्वर के कार्य में हस्तक्षेप करते हैं बुरी आत्माएँ हैं; सभी झूठे मसीह और मसीह-विरोधी लोग बुरी आत्माएँ हैं; और वे सभी जो सच्चे परमेश्वर की गवाही नहीं देते हैं, जो सच्चे परमेश्वर को आदरपूर्वक ऊँचा नहीं उठाते हैं, जो सच्चे परमेश्वर की आराधना नहीं करते हैं, जो सच्चे परमेश्वर का कहना नहीं मानते हैं, और बजाय इसके वे यह गवाही देते हैं कि वे ही परमेश्वर हैं या वे परमेश्वर बनना चाहते हैं—वे सब बुरी आत्माएँ हैं, चाहे वे कितने भी बड़े चिन्हों और चमत्कारों का प्रदर्शन करें। परमेश्वर के चुने हुए लोगों को समझना चाहिए कि चिन्हों और चमत्कारों का प्रदर्शन करना सच्ची शक्ति नहीं है; केवल सत्य को व्यक्त कर पाना और लोगों को पूर्ण बनाने और सब कुछ संपन्न करने के लिए वचनों का उपयोग कर पाना ही सच्ची शक्ति है। और इसलिए, वे सब जो चिन्हों और चमत्कारों पर ध्यान केन्द्रित करते हैं और आत्माओं के अलौकिक कार्य का अनुसरण करते हैं, बेतुके होते हैं, और वे सत्य से युक्त नहीं होते हैं। वे सब लोग जो सत्य को स्वीकार करने में असमर्थ हैं, और निरपवाद रूप से उन बुरी आत्माओं को स्वीकार करते हैं जो चिन्हों और चमत्कारों को करने में सक्षम होती हैं और जिनका कार्य अलौकिक होता है—वे सब लोग बुरी आत्माएँ हैं; वे सब जिनके हृदय हर तरह की भ्रांति और विधर्म से छलकते हैं—वे सब बुरी आत्माएँ हैं; वे सब लोग जो निरपवाद रूप से हर प्रकार के विधर्म और भ्रांति को गले लगाते हैं, फिर भी सत्य को स्वीकार करने में असमर्थ होते हैं—वे सब बुरी आत्माएँ हैं; वे सब जो परमेश्वर के वचनों की शुद्ध समझ पाने में हमेशा असमर्थ होते हैं, जो हमेशा परमेश्वर के वचनों को विकृत करते और भ्रांतियों को गले लगाते हैं—वे सब निस्संदेह बुरी आत्माएँ हैं; और वे सब जो विशेष रूप से बेतुके और हास्यास्पद होते हैं, बुरी आत्माएँ हैं। यह परम सिद्धांत है। वास्तव में, सभी का एक अतीत होता है, सभी के अंदर एक आत्मा होती है, जो निर्देशित करती है कि वे क्या कहें और क्या करें—यह संदेह से परे है। शैतान की आत्मा प्राचीन सर्प में थी, और बड़े लाल अजगर में भी है; और बुरी आत्माएँ उन सभी दानव राजाओं के भीतर हैं जो परमेश्वर का विरोध करते हैं। जैसे ही उन्हें परमेश्वर के सत्य-वचन के विरुद्ध रोका जाता है, उनकी असलियत उजागर हो जाती है। कुछ लोगों की समझ विशेष रूप से बेतुकी होती है, वैसे ही जैसे चीज़ों के प्रति उनका दृष्टिकोण होता है। क्या तुम दावा कर सकते हो कि उनकी आत्मा के साथ कोई समस्या नहीं है? कुछ लोग विभिन्न विधर्मों और भ्रांतियों के प्रति विशेष रूप से पक्षपाती होते हैं, और सत्य को स्वीकार नहीं करते हैं। क्या तुम दावा कर सकते हो कि उनकी आत्माओं के साथ कोई समस्या नहीं है? कुछ लोग अलौकिक चीज़ों पर ध्यान देते हैं और उनका अनुसरण करना पसंद करते हैं। वे निरपवाद रूप से दावा करते हैं कि बुरी आत्माओं का अलौकिक कार्य ही पवित्र आत्मा का कार्य है, और छले जाने के बाद भी वे वापस नहीं लौटते हैं। क्या तुम कह सकते हो कि उनकी आत्माओं के साथ कोई समस्या नहीं है? कुछ लोगों ने कई वर्षों से सच्चा मार्ग स्वीकार किया है, और कई धर्मोपदेश और संगतियाँ सुनी हैं, और वे कई पत्रों और सिद्धांतों का बयान करने में सक्षम हैं, फिर भी वे सत्य का सार सच्चे अर्थ में समझने में असमर्थ होते हैं, और उनके जीवन स्वभाव में ज़रा-सा भी बदलाव नहीं होता है। क्या तुम कह सकते हो कि उनकी आत्माओं के साथ कोई समस्या नहीं है? वास्तव में, ऐसे लोगों के पास पवित्र आत्मा का कार्य नहीं होता है, और उनमें सत्य को समझने और वास्तविकता में प्रवेश करने के किन्हीं भी साधनों का अभाव है। इसमें कोई संदेह नहीं है। तो फिर बुरी आत्माओं के विभिन्न कार्यों को कैसे पहचाना जा सकता है? सबसे अधिक महत्व की बात है लोगों के सार की पहचान करना, क्योंकि जब तुम उनके सार की पहचान कर सकते हो केवल तभी तुम बता सकते हो कि वे किस प्रकार की आत्मा का कार्य है। यदि लोग विशेष रूप से दुष्ट, कपटी और विषैले होते हैं, तो उनमें निर्विवाद रूप से मानवीय भावना की कमी होती है; यदि उनमें कोई आत्मा है, तो वह बुरी आत्मा है। यदि लोग लगातार सभी तरह की भ्रांतियों को स्वीकार करते और अपनाते हैं, तो निस्संदेह उनके अंदर कोई बेतुकी—और बुरी—आत्मा है। जो लोग पवित्र आत्मा के कार्य से युक्त होते हैं उनकी समझ अपेक्षाकृत शुद्ध होती है, उनकी मानवता अपेक्षाकृत निष्कलंक और ईमानदार होती है, और इसलिए वे जिस ज्ञान की संगति करते हैं वह अपेक्षाकृत शुद्ध होता है, और लोगों के लिए लाभप्रद होता है। केवल ऐसे लोग ही परमेश्वर के चुने हुए लोग होते हैं, और परमेश्वर के चुने हुए लोगों के प्रिय होते हैं, और वे वो हैं जिनके साथ लोग जुड़ने के इच्छुक होते हैं, और जिनके साथ हृदय और मन से एक होने में समर्थ होते हैं। यदि लोग विशेष रूप से धोखेबाज़, कपटी और विषैले होते हैं, तो वे पवित्र आत्मा के कार्य से बिल्कुल युक्त नहीं होते, क्योंकि जो दुष्ट हैं, परमेश्वर उन्हें नहीं बचाता है। परमेश्वर द्वारा पूर्वनियत और चुने गए लोग वे हैं जो सत्य से प्रेम और उसका अनुसरण करते हैं। यहाँ तक कि यदि वे सेवाकर्मी भी हों, तब भी वे निस्संदेह अपेक्षाकृत अच्छी मानवता के होते हैं; अपेक्षाकृत अच्छी मानवता के लोग ही अपने कर्तव्य के निर्वहन में निष्ठावान होते हैं, और दूसरों के साथ अपनी बातचीत में ईमानदार और विवेकपूर्ण होते हैं। कलीसियाओं में, जब केवल सत्य से प्रेम करने वाले लोग इकट्ठा होते हैं, तभी वहाँ पवित्र आत्मा का कार्य, और कलीसिया का सच्चा जीवन होता है। यदि लोगों की बातें और सहभागिता विशेष रूप से बेतुकी हों, अगर उनके पास शुद्ध समझ का अभाव हो चाहे वे कितने भी उपदेश और संगतियाँ सुनते हों, और अगर उनमें प्रगति का कोई चिन्ह दिखाई न देता हो, अगर उनकी मानवता विशेष रूप से अधम, विशेष रूप से बुरी हो, और वे बिल्कुल भी नहीं बदले हों, और वे दूसरों के द्वारा घृणित और तिरस्कृत होते हों, तो इसमें कोई संदेह नहीं है कि उन्हें पवित्र आत्मा द्वारा हटा दिया जाएगा। ऐसे लोगों के साथ रहने और बातचीत करने का कोई लाभ नहीं है; वे केवल तुम पर बुरा प्रभाव डालेंगे और तुम्हें परेशान करेंगे। यह कहा जा सकता है कि जो लोग सत्य से प्रेम नहीं करते हैं, उन सभी की मानवता अपेक्षाकृत धोखेबाज़, विषैली, स्वार्थी और अधम होती है; वे केवल धन्य होने के लिए परमेश्वर में विश्वास करते हैं, और उन्होंने कभी भी परमेश्वर की इच्छा के प्रति सचेत होना और परमेश्वर के प्रेम का ऋण चुकाना तथा परमेश्वर को संतुष्ट करना नहीं जाना है; उनमें अंतःकरण या विवेक का अभाव होता है। ऐसे लोगों द्वारा पवित्र आत्मा का कार्य प्राप्त करने की संभावना नहीं होती है। परमेश्वर के चुने हुए लोगों को यह स्पष्ट होना चाहिए कि उन सब लोगों में जो पवित्र आत्मा के कार्य से वंचित होते हैं, अधिकांश लोग बुरी आत्माओं के काम की दखलंदाज़ी भुगतते हैं। वे लोग जो लंबे समय से पवित्र आत्मा के कार्य से रहित हैं, अत्यधिक खतरनाक होते हैं, और उनके प्रति सावधान रहना चाहिए। यदि लोगों को पवित्र आत्मा द्वारा त्याग दिया जाता है, तो सभी प्रकार की बुरी आत्माएँ उनमें प्रवेश करने के लिए इस मौक़े का फ़ायदा उठाती हैं,उस समय इन लोगों की स्थिति और भी अधिक भीषण हो जाती है, इस हद तक कि वे अपने पुराने तौर-तरीकों में लौट जाते हैं, और यहाँ तक कि वे अविश्वासियों से भिन्न नहीं रह जाते हैं। यह शैतान का स्वयं को प्रदर्शित करना है। स्पष्ट रूप से, भिन्न-भिन्न प्रकार के लोगों की पहचान करना सर्वाधिक महत्वपूर्ण होता है। जब तुम लोगों की पहचान कर सकते हो, केवल तभी तुम आत्माओं की पहचान कर सकते हो। यदि तुम लोगों की पहचान नहीं कर सकते, तो तुम बुरी आत्माओं के विभिन्न कार्यों की पहचान निश्चित रूप से नहीं कर पाओगे।

— 'कार्य व्यवस्था' से उद्धृत

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