1. प्रभु की वापसी के विषय में बाइबल में दी गई भविष्यवाणियाँ अब काफी हद तक पूरी हो चुकी हैं, और प्रभु यहाँ पहले से ही आ चुका हो सकता है। हम देखते हैं कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया सार्वजनिक रूप से ऑनलाइन गवाही दे रही है कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर प्रभु यीशु की वापसी है, और सभी धर्मों और संप्रदायों के कई लोग जो वास्तव में प्रभु में विश्वास करते हैं और जो परमेश्वर के प्रकटन के लिए तरसते हैं, सर्वशक्तिमान परमेश्वर के पास लौट आए हैं। हम जानना चाहेंगे कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर, परमेश्वर का प्रकटन है या नहीं।

संदर्भ के लिए बाइबल के पद :

“आदि में वचन था, और वचन परमेश्वर के साथ था, और वचन परमेश्वर था” (यूहन्ना 1:1)

“मार्ग और सत्य और जीवन मैं ही हूँ; बिना मेरे द्वारा कोई पिता के पास नहीं पहुँच सकता” (यूहन्ना 14:6)

परमेश्वर के प्रासंगिक वचन :

परमेश्वर के प्रकटन का अर्थ है कि परमेश्वर व्यक्तिगत रूप से कार्य करने के लिए पृथ्वी पर आता है। वह अपनी स्वयं की पहचान, अपने स्वभाव और अपने अंतर्निहित तरीके से, एक नए युग का आरंभ करने और पुराने युग का अंत करने का कार्य करने के लिए मनुष्यजाति के बीच उतरता है। इस तरह का प्रकटन किसी अनुष्ठान का रूप नहीं है। यह कोई संकेत, कोई तसवीर, कोई चमत्कार या एक प्रकार का भव्य दर्शन नहीं है, और किसी प्रकार की धार्मिक प्रक्रिया तो दूर की बात है। बल्कि यह एक असली और वास्तविक तथ्य है, जिसे किसी के भी द्वारा छुआ और देखा जा सकता है। इस तरह का प्रकटन केवल औपचारिकता निभाने के लिए या एक प्रकार के अल्पकालिक कार्य की खातिर नहीं है। इसके बजाय यह परमेश्वर की प्रबंधन योजना में कार्य के एक चरण के वास्ते है। परमेश्वर का प्रकटन हमेशा अर्थपूर्ण होता है और हमेशा उसकी प्रबंधन योजना से इसका कुछ संबंध होता है। यहाँ जिसे “प्रकटन” कहा गया है, वह उस प्रकार के “प्रकटन” से बिल्कुल ही भिन्न है, जिसमें परमेश्वर मनुष्य का मार्गदर्शन, अगुआई और प्रबोधन करता है। हर बार जब परमेश्वर प्रकट होता है, वह अपने महान कार्य के एक चरण को कार्यान्वित करता है। यह कार्य किसी भी अन्य युग के कार्य से भिन्न होता है। यह मनुष्य के लिए अकल्पनीय है, और इसका मनुष्य द्वारा पहले कभी भी अनुभव नहीं किया गया है। यह वह कार्य है, जो एक नए युग का आरंभ करता है और पुराने युग का समापन करता है, और यह मनुष्यजाति के उद्धार के कार्य का एक अधिक नया और उच्चतर चरण है; और भी अधिक, यह वह कार्य है जो मनुष्यजाति को नए युग में ले जाता है। यह परमेश्वर के प्रकटन का महत्त्व है।

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, परिशिष्ट 1 : परमेश्वर के प्रकटन ने एक नए युग का सूत्रपात किया है

चूँकि हम परमेश्वर के पदचिह्नों की खोज कर रहे हैं, इसलिए हमारा दायित्व बनता है कि हम परमेश्वर के इरादों, उसके वचनों और कथनों की खोज करें। ऐसा इसलिए क्योंकि जहाँ कहीं भी परमेश्वर द्वारा बोले गए नए वचन हैं, वहाँ परमेश्वर की वाणी है और जहाँ कहीं भी परमेश्वर के पदचिह्न हैं, वहाँ परमेश्वर के कर्म हैं; जहाँ कहीं भी परमेश्वर की अभिव्यक्ति है, वहाँ परमेश्वर प्रकट होता है, और जहाँ कहीं भी परमेश्वर प्रकट होता है, वहाँ सत्य, मार्ग और जीवन विद्यमान होता है। परमेश्वर के कदमों की तलाश में तुम लोगों ने इन वचनों की अनदेखी कर दी है कि “परमेश्वर सत्य, मार्ग और जीवन है।” और इसलिए, बहुत-से लोग सत्य को प्राप्त करके भी यह नहीं मानते कि उन्हें परमेश्वर के पदचिह्न मिल गए हैं और वे परमेश्वर के प्रकटन को तो बिल्कुल भी स्वीकार नहीं करते। कितनी गंभीर ग़लती है! परमेश्वर का प्रकटन मनुष्य की धारणाओं के अनुरूप नहीं हो सकता और परमेश्वर उस तरह तो और भी प्रकट नहीं हो सकता जैसा इंसान उससे माँग करता है। परमेश्वर जब अपना कार्य करता है, तो वह अपनी पसंद और अपनी योजनाएँ बनाता है; इसके अलावा, उसके अपने उद्देश्य और अपने तरीके हैं। वह जो भी कार्य करता है, उसके बारे में उसे मनुष्य से चर्चा करने या उसकी सलाह लेने की आवश्यकता नहीं है, और अपने कार्य के बारे में हर-एक व्यक्ति को सूचित करने की आवश्यकता तो उसे बिल्कुल भी नहीं है। यह परमेश्वर का स्वभाव है, और हर व्यक्ति को इसे पहचानना चाहिए। यदि तुम लोग परमेश्वर के प्रकटन को देखने और उसके पदचिह्नों का अनुसरण करने की इच्छा रखते हो, तो तुम लोगों को पहले अपनी धारणाओं से दूरी बना लेनी चाहिए। तुम लोगों को यह माँग नहीं करनी चाहिए कि परमेश्वर ऐसा करे या वैसा करे, तुम्हें उसे अपनी सीमाओं और अपनी धारणाओं तक सीमित तो बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए। इसके बजाय, तुम लोगों को खुद से यह पूछना चाहिए कि तुम्हें परमेश्वर के कदमों की तलाश कैसे करनी चाहिए, तुम्हें परमेश्वर के प्रकटन को कैसे स्वीकार करना चाहिए, और तुम्हें परमेश्वर के नए कार्य के प्रति कैसे समर्पण करना चाहिए : मनुष्य को ऐसा ही करना चाहिए। चूँकि मनुष्य सत्य नहीं है, और उसके पास भी सत्य नहीं है, इसलिए उसे खोजना, स्वीकार करना और समर्पण करना चाहिए।

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, परिशिष्ट 1 : परमेश्वर के प्रकटन ने एक नए युग का सूत्रपात किया है

पूरे ब्रह्मांड में मैं अपना कार्य कर रहा हूँ और पूरब में भारी गर्जनाएँ निरंतर जारी हैं और सभी राष्ट्रों और संप्रदायों को झकझोर रही हैं। यह मेरे कथन ही हैं जो सभी मनुष्यों को वर्तमान में ले आए हैं। मैं अपने कथनों से सभी मनुष्यों को जीत लेता हूँ, उन्हें इस धारा में बहाता हूँ और उनसे अपने आगे आत्मसमर्पण करवाता हूँ, क्योंकि मैंने बहुत पहले पूरी पृथ्वी से अपनी महिमा वापस लेकर उसे नए सिरे से पूरब में जारी किया है। भला कौन मेरी महिमा देखने के लिए लालायित नहीं होता? कौन बेसब्री से मेरे लौटने का इंतजार नहीं करता? किसे मेरे पुनः प्रकटन की प्यास नहीं है? कौन मेरी सुंदरता के लिए नहीं तरसता? कौन प्रकाश में नहीं आएगा? कौन कनान की समृद्धि नहीं देखेगा? किसे उद्धारकर्ता के लौटने की लालसा नहीं है? कौन उसकी सराहना नहीं करता जिसके पास महान सामर्थ्य है? मेरे कथन पूरी पृथ्वी पर फैल जाएँगे; मैं अपने चुने हुए लोगों के सामने आकर और अधिक बोलूँगा और वचन सुनाऊँगा, जैसे शक्तिशाली गर्जन पर्वतों और नदियों को हिला देता है। मैं अपने वचन पूरे ब्रह्मांड के लिए और मानवजाति के लिए बोलता हूँ। इस प्रकार मेरे मुँह से निकले वचन मनुष्य का खजाना बन गए हैं और सभी मनुष्य मेरे वचनों को सँजोते हैं। बिजली पूरब से चमकते हुए दूर पश्चिम तक जाती है। मेरे वचन ऐसे हैं कि मनुष्य उनसे अलग होने से कतराता है और वे मनुष्य के लिए अथाह भी हैं, और इससे भी अधिक इनके कारण मनुष्य आनन्द का अनुभव करते हैं। नवजात शिशुओं की तरह सभी मनुष्य खुशी और आनंद से भरे हैं और मेरे आगमन का जश्न मनाते हैं। अपने कथनों के माध्यम से मैं सभी मनुष्यों को अपने समक्ष ले आऊँगा। उसके बाद मैं औपचारिक रूप से मनुष्यों के बीच प्रवेश करूँगा और यह सुनिश्चित करूँगा कि वे मेरी पूजा करने आएँ। मुझसे प्रसारित होती महिमा और मेरे मुँह से निकले वचनों से मैं ऐसा करूँगा कि सभी मनुष्य मेरे समक्ष आएँ और देखें कि बिजली पूरब से चमकती है और मैं पूरब में “जैतून के पर्वत” पर उतर चुका हूँ, और मैं बहुत पहले से पृथ्वी पर आ चुका हूँ, और मैं अब यहूदियों का पुत्र नहीं हूँ, बल्कि पूरब की बिजली हूँ। क्योंकि बहुत पहले मेरा पुनरुत्थान हो चुका है, और मैं मनुष्यों के बीच से जा चुका हूँ, और फिर अपनी महिमा के साथ लोगों के बीच पुनः प्रकट हुआ हूँ। मैं वही हूँ जिसकी आराधना अब से असंख्य युगों पहले की गई थी, और मैं वह शिशु भी हूँ जिसे अब से असंख्य युगों पहले इस्राएलियों ने त्याग दिया था। उससे भी अधिक, मैं वर्तमान युग का संपूर्ण-महिमामय सर्वशक्तिमान परमेश्वर हूँ! सभी मेरे सिंहासन के सामने आएँ और मेरे महिमामय मुखमंडल को देखें, मेरे कथन सुनें और मेरे कर्मों को देखें। यही मेरा संपूर्ण इरादा है; यही मेरी योजना का अंत और चरमोत्कर्ष है और साथ ही मेरे प्रबंधन का उद्देश्य भी है : तमाम राष्ट्र मेरी पूजा करें, तमाम मुख मुझे स्वीकार करें, तमाम लोग मुझ पर भरोसा रखें और मेरे चुने तमाम लोग मेरे सामने आत्मसमर्पण करें!

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, सात गर्जनाएँ गरजती हैं—भविष्यवाणी करती हैं कि राज्य का सुसमाचार पूरे ब्रह्मांड में फैल जाएगा

इस बार परमेश्वर कार्य करने के लिए आध्यात्मिक शरीर में नहीं, बल्कि बहुत ही साधारण शरीर में आया है। इसके अलावा, यह परमेश्वर के दूसरे देहधारण का शरीर है और यह वह शरीर भी है, जिसके द्वारा वह देह में लौटकर आया है। यह एक बहुत साधारण देह है। उस पर नजर डालकर तुम ऐसा कुछ नहीं देख सकते जो उसे दूसरों से अलग खड़ा करता हो, लेकिन तुम उससे पहले कभी न सुने गए सत्य प्राप्त कर सकते हो। महज यह तुच्छ देह परमेश्वर के सत्य के समस्त वचनों का मूर्त रूप है, अंत के दिनों में परमेश्वर के कार्य की धारक है और मनुष्य के समझने के लिए परमेश्वर के संपूर्ण स्वभाव की अभिव्यक्ति है। क्या तुम स्वर्ग के परमेश्वर को देखने की प्रबल अभिलाषा नहीं करते? क्या तुम स्वर्ग के परमेश्वर को समझने की प्रबल अभिलाषा नहीं करते? क्या तुम मानवजाति का गंतव्य देखने की प्रबल अभिलाषा नहीं करते? वह तुम्हें ये सभी रहस्य बताएगा—वे रहस्य जो कोई मनुष्य तुम्हें कभी नहीं बता पाया है—और वह तुम्हें वे सत्य भी बताएगा जिन्हें तुम नहीं समझते। वह राज्य में जाने का तुम्हारा द्वार है, और नए युग में जाने के लिए तुम्हारा मार्गदर्शक है। यह साधारण देह कई रहस्यों को समेटे हुए है जिनकी थाह मनुष्य नहीं ले सकता है। उसके कर्म तुम्हारे लिए गूढ़ हैं, लेकिन उसके द्वारा किए जाने वाले कार्य का संपूर्ण लक्ष्य तुम्हें इतना देखने की अनुमति देने के लिए पर्याप्त है कि वह कोई साधारण देह नहीं है, जैसा कि लोग मानते हैं—क्योंकि वह अंत के दिनों के परमेश्वर के इरादों और अंत के दिनों में मानवजाति के प्रति परमेश्वर की परवाह का प्रतिनिधित्व करता है। यद्यपि तुम उसके द्वारा बोले गए उन वचनों को नहीं सुन सकते जो आकाश और पृथ्वी को कँपाते-से लगते हैं, यद्यपि तुम उसकी आँखें आग की लपटों जैसी नहीं देख सकते, और यद्यपि तुम उसके लौह-दंड का अनुशासन नहीं पा सकते, फिर भी तुम उसके वचनों से यह सुन सकते हो कि परमेश्वर क्रोधित हो रहा है और यह जान सकते हो कि परमेश्वर मानवजाति पर दया दिखा रहा है, और तुम परमेश्वर का धार्मिक स्वभाव और उसकी बुद्धि देख सकते हो, और उससे भी अधिक, समस्त मानवजाति के लिए परमेश्वर की परवाह को समझ सकते हो। अंत के दिनों में परमेश्वर का कार्य मनुष्य को स्वर्ग के परमेश्वर का पृथ्वी पर मनुष्यों के बीच रहना दिखाना है और परमेश्वर को जानने, उसके प्रति समर्पण करने, उसका भय मानने और उससे प्रेम करने में सक्षम बनाना है। यही कारण है कि वह दूसरी बार देह में लौटा है। यूँ तो आज मनुष्य जो देखता है वह एक ऐसा परमेश्वर है जो बिल्कुल मनुष्य के ही समान है, एक नाक और दो आँखों वाला परमेश्वर और एक बहुत ही साधारण परमेश्वर, लेकिन अंत में परमेश्वर तुम लोगों को दिखाएगा कि अगर यह व्यक्ति न हो तो स्वर्ग और पृथ्वी एक जबरदस्त बदलाव से गुजरेंगे; अगर यह व्यक्ति न हो तो स्वर्ग धुँधला जाएगा, पृथ्वी पर उथल-पुथल मच जाएगी और समस्त मानवजाति अकाल और महामारियों के बीच जिएगी। वह तुम लोगों को दिखाएगा कि यदि अंत के दिनों का देहधारी परमेश्वर तुम लोगों को बचाने के लिए न आता तो परमेश्वर समस्त मानवजाति को बहुत पहले ही नरक में नष्ट कर चुका होता; यदि यह देह न होती तो तुम लोग सदैव महापापी होते और तुम हमेशा के लिए लाश बन जाते। तुम लोगों को जानना चाहिए कि यदि यह देह न होती तो समस्त मानवजाति के लिए एक महा आपदा से बचना असंभव होता, और उसके लिए अंत के दिनों में परमेश्वर द्वारा मानवजाति को दिए जाने वाले और भी कठोर दंड से बच पाना कठिन होता। यदि इस साधारण देह का जन्म न हुआ होता तो तुम सबकी ऐसी हालत होती कि तुम लोग जीवन की भीख माँगते लेकिन जी न पाते और मरने की भीख माँगते लेकिन मर न पाते; यदि यह देह न होती तो तुम लोग सत्य प्राप्त न कर पाते और आज परमेश्वर के सिंहासन के सामने न आ पाते, बल्कि अपने जघन्य पापों के लिए परमेश्वर द्वारा दंडित किए जाते। क्या तुम लोग जानते थे कि यदि परमेश्वर देह में लौटा न होता तो किसी के पास भी उद्धार का अवसर न होता; और यदि इस देह का आगमन न होता तो परमेश्वर ने बहुत पहले ही पुराने युग को समाप्त कर दिया होता? ऐसा होने से क्या तुम लोग अभी भी परमेश्वर के दूसरे देहधारण को नकारोगे? चूँकि तुम लोग इस साधारण व्यक्ति से इतने बड़े लाभ प्राप्त कर सकते हो तो तुम उसे प्रसन्नतापूर्वक स्वीकार क्यों नहीं करोगे?

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, क्या तुम जानते थे? परमेश्वर ने मनुष्यों के बीच एक महान काम किया है

विभिन्न तरीकों और बहुत से परिप्रेक्ष्यों के उपयोग द्वारा हमें इस बारे में सचेत करते हुए कि हमें क्या करना चाहिए, और साथ ही अपने हृदय की वाणी व्यक्त करते हुए परमेश्वर अपने कथन जारी रखता है। उसके वचनों में जीवन-सामर्थ्य है, वे हमें वह मार्ग देते हैं जिस पर हमें चलना चाहिए और हमें यह अच्छी तरह से समझने में सक्षम बनाते हैं कि सत्य वास्तव में क्या है। हम उसके वचनों से आकर्षित होने लगते हैं, हम उसके बोलने के लहजे और तरीके पर ध्यान देने लगते हैं, और हम इस आसानी से न दिखने वाले व्यक्ति के हृदय की वाणी पर अवचेतन रूप से ध्यान देने लगते हैं। वह हमारे लिए पूरे दिल से अपने दिमाग को मथ डालता है, हमारे लिए नींद और भूख त्याग देता है, हमारे लिए रोता है, हमारे लिए आहें भरता है, हमारे लिए बीमारी में कराहता है; वह हमारे गंतव्य और उद्धार के लिए अपमान सहता है; और हमारी संवेदनहीनता और विद्रोहशीलता के कारण उसका हृदय खून और आँसू बहाता है। ऐसा अस्तित्व और चीजें किसी साधारण व्यक्ति में नहीं हो सकती हैं, न ही ये किसी भ्रष्ट मनुष्य में हो सकती हैं या वह उन्हें हासिल कर सकता है। उसमें ऐसी सहनशीलता और धैर्य है जो किसी साधारण मनुष्य में नहीं होता है और उसके जैसा प्रेम भी किसी सृजित प्राणी में नहीं होता है। उसके अलावा कोई भी हमारे समस्त विचारों को नहीं जान सकता, या हमारी प्रकृति और सार को अपनी हथेली के पीछे की तरह भली-भाँति नहीं जान सकता, या मानवजाति की विद्रोहशीलता और भ्रष्टता का न्याय नहीं कर सकता, या इस तरह से स्वर्ग के परमेश्वर की ओर से हमसे बातचीत या हम पर कार्य नहीं कर सकता। उसके अलावा किसी में परमेश्वर का अधिकार, बुद्धि और गरिमा नहीं है; उसमें परमेश्वर का स्वभाव और परमेश्वर का अस्तित्व और चीजें अपनी संपूर्णता में प्रकट होती हैं। उसके अलावा कोई हमें मार्ग नहीं दिखा सकता या हमारे लिए प्रकाश नहीं ला सकता। उसके अलावा कोई भी उन रहस्यों को प्रकट नहीं कर सकता, जिन्हें परमेश्वर ने सृष्टि के आरंभ से अब तक प्रकट नहीं किया है। उसके अलावा कोई हमें शैतान के बंधन और हमारे भ्रष्ट स्वभावों से नहीं बचा सकता। वह परमेश्वर का प्रतिनिधित्व करता है; वह संपूर्ण मानवजाति के प्रति परमेश्वर के हृदय की वाणी, परमेश्वर के प्रोत्साहनों और परमेश्वर के न्याय के वचनों को व्यक्त करता है। उसने एक नया युग, एक नया काल आरंभ किया है, और वह एक नए स्वर्ग और पृथ्वी और नए कार्य में ले गया है, वह हमारे लिए आशा लेकर आया है और उसने उस जीवन पर विराम लगा दिया है जो हम अस्पष्ट स्थिति में बिता रहे थे, और उसने हमारे संपूर्ण अस्तित्व को उद्धार के मार्ग को पूरी स्पष्टता से देखने में सक्षम बनाया है। उसने हमारे संपूर्ण अस्तित्व को जीत लिया है और हमारे हृदय को प्राप्त कर लिया है। उस क्षण से हमारे दिल जागरूक हो गए हैं, और हमारी आत्माएँ पुनर्जीवित हो गई लगती हैं : क्या यह साधारण, मामूली व्यक्ति, जो हमारे बीच रहता है और जिसे हम इतने लंबे समय से ठुकराते आए हैं—प्रभु यीशु नहीं है; जो सोते-जागते हमेशा हमारे विचारों में रहता है और जिसके लिए हम रात-दिन लालायित रहते हैं? यह वही है! यह वास्तव में वही है! यह हमारा परमेश्वर है! यह सत्य, मार्ग और जीवन है! उसने हमें फिर से जीने और रोशनी देखने लायक बनाया है और हमारे हृदयों को भटकने से रोका है। हम परमेश्वर के घर लौट आए हैं, हम उसके सिंहासन के सामने लौट आए हैं, हम उसके आमने-सामने हैं, हमने उसका मुखमंडल देखा है और हमने आगे का मार्ग देखा है। इस समय हमारे हृदय परमेश्वर द्वारा पूरी तरह से जीत लिए गए हैं; अब हमें संदेह नहीं है कि वह कौन है, अब हम उसके कार्य और वचन का विरोध नहीं करते, और अब हम उसके सामने पूरी तरह से दंडवत हैं। हम अपने शेष जीवन में परमेश्वर के पदचिह्नों का अनुसरण करने, और उसके द्वारा पूर्ण किए जाने, और उसके अनुग्रह का बदला चुकाने, और हमारे प्रति उसके प्रेम का प्रतिदान करने, और उसके आयोजनों और व्यवस्थाओं का पालन करने, और उसके कार्य में सहयोग करने, और उसके द्वारा सौंपे जाने वाला हर कार्य पूरा करने के लिए सब-कुछ करने से अधिक कुछ नहीं चाहते।

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, परिशिष्ट 4 : परमेश्वर के प्रकटन को उसके न्याय और ताड़ना में देखना

यदि लोग अनुग्रह के युग में अटके रहेंगे, तो वे कभी भी अपने भ्रष्ट स्वभाव से छुटकारा नहीं पाएँगे, परमेश्वर के अंतर्निहित स्वभाव को जानने की बात तो दूर है! यदि लोग सदैव अनुग्रह की प्रचुरता में रहते हैं, परंतु उनके पास जीवन का वह मार्ग नहीं है, जो उन्हें परमेश्वर को जानने और उसे संतुष्ट करने का अवसर देता है, तो वे परमेश्वर पर अपने विश्वास में उसे वास्तव में कभी भी प्राप्त नहीं करेंगे। इस प्रकार का विश्वास वास्तव में दयनीय है। जब तुम इस पुस्तक को पूरा पढ़ लोगे, जब तुम राज्य के युग में देहधारी परमेश्वर के कार्य के प्रत्येक चरण का अनुभव कर लोगे, तब तुम महसूस करोगे कि अनेक वर्षों की तुम्हारी आशाएँ अंततः साकार हो गई हैं। तुम महसूस करोगे कि केवल अब तुमने परमेश्वर को वास्तव में आमने-सामने देखा है; केवल अब तुमने परमेश्वर के चेहरे को निहारा है, उसके व्यक्तिगत कथन सुने हैं, उसके कार्य की बुद्धिमत्ता को सराहा है, और वास्तव में महसूस किया है कितना व्यावहारिक और सर्वशक्तिमान है वह। तुम महसूस करोगे कि तुमने ऐसी बहुत-सी चीजें पाई हैं, जिन्हें अतीत में लोगों ने न कभी देखा था, न ही प्राप्त किया था। इस समय, तुम स्पष्ट रूप से जान लोगे कि परमेश्वर पर विश्वास करना क्या होता है, और परमेश्वर के इरादों से मेल खाना क्या होता है। निस्संदेह, यदि तुम अतीत के विचारों से चिपके रहते हो, और परमेश्वर के दूसरे देहधारण के तथ्य को अस्वीकार या उससे इनकार करते हो, तो तुम खाली हाथ रहोगे और कुछ नहीं पाओगे, और अंततः परमेश्वर का विरोध करने के दोषी ठहराए जाओगे। वे जो सत्य के प्रति समर्पण करते हैं और परमेश्वर के कार्य के प्रति समर्पण करते हैं, उनका दूसरे देहधारी परमेश्वर—सर्वशक्तिमान—के नाम पर दावा किया जाएगा। वे परमेश्वर का व्यक्तिगत मार्गदर्शन स्वीकार करने में सक्षम होंगे, वे अधिक और उच्चतर सत्य और वास्तविक जीवन प्राप्त करेंगे। वे उस दृश्य को निहारेंगे, जिसे अतीत के लोगों द्वारा पहले कभी नहीं देखा गया था : “तब मैंने उसे, जो मुझ से बोल रहा था, देखने के लिये अपना मुँह फेरा; और पीछे घूमकर मैंने सोने की सात दीवटें देखीं, और उन दीवटों के बीच में मनुष्य के पुत्र सदृश एक पुरुष को देखा, जो पाँवों तक का वस्त्र पहिने, और छाती पर सोने का पटुका बाँधे हुए था। उसके सिर और बाल श्‍वेत ऊन वरन् पाले के समान उज्ज्वल थे, और उसकी आँखें आग की ज्वाला के समान थीं। उसके पाँव उत्तम पीतल के समान थे जो मानो भट्ठी में तपाया गया हो, और उसका शब्द बहुत जल के शब्द के समान था। वह अपने दाहिने हाथ में सात तारे लिये हुए था, और उसके मुख से तेज दोधारी तलवार निकलती थी। उसका मुँह ऐसा प्रज्‍वलित था, जैसा सूर्य कड़ी धूप के समय चमकता है” (प्रकाशितवाक्य 1:12-16)। यह दृश्य परमेश्वर के संपूर्ण स्वभाव की अभिव्यक्ति है, और उसके संपूर्ण स्वभाव की यह अभिव्यक्ति वर्तमान देहधारण में परमेश्वर के कार्य की अभिव्यक्ति भी है। ताड़ना और न्याय की बौछारों में मनुष्य का पुत्र कथनों के माध्यम से अपने अंर्तनिहित स्वभाव को अभिव्यक्त करता है, और उन सबको जो उसकी ताड़ना और न्याय स्वीकार करते हैं, मनुष्य के पुत्र के वास्तविक चेहरे को निहारने की अनुमति देता है, जो यूहन्ना द्वारा देखे गए मनुष्य के पुत्र के चेहरे का ईमानदार चित्रण है। (निस्संदेह, यह सब उनके लिए अदृश्य होगा, जो राज्य के युग में परमेश्वर के कार्यों को स्वीकार नहीं करते।) परमेश्वर का वास्तविक चेहरा मनुष्य की भाषा के इस्तेमाल द्वारा पूर्णतः व्यक्त नहीं किया जा सकता, और इसलिए परमेश्वर उन साधनों का इस्तेमाल करता है, जिनके द्वारा वह मनुष्य को अपना वास्तविक चेहरा दिखाने के लिए अपने अंर्तनिहित स्वभाव को अभिव्यक्त करने की विधि का उपयोग करता है। अर्थात्, जिन्होंने मनुष्य के पुत्र के अंर्तनिहित स्वभाव को सराहा है, उन सबने मनुष्य के पुत्र का वास्तविक चेहरा देखा है, क्योंकि परमेश्वर बहुत महान है और मनुष्य की भाषा के इस्तेमाल द्वारा उसे पूरी तरह से व्यक्त नहीं किया जा सकता। एक बार जब मनुष्य राज्य के युग में परमेश्वर के कार्य के प्रत्येक चरण का अनुभव कर लेगा, तब वह यूहन्ना के वचनों का वास्तविक अर्थ जान लेगा, जो उसने दीवटों के बीच मनुष्य के पुत्र के बारे में कहे थे : “उसके सिर और बाल श्‍वेत ऊन वरन् पाले के समान उज्ज्वल थे, और उसकी आँखें आग की ज्वाला के समान थीं। उसके पाँव उत्तम पीतल के समान थे जो मानो भट्ठी में तपाया गया हो, और उसका शब्द बहुत जल के शब्द के समान था। वह अपने दाहिने हाथ में सात तारे लिये हुए था, और उसके मुख से तेज दोधारी तलवार निकलती थी। उसका मुँह ऐसा प्रज्‍वलित था, जैसा सूर्य कड़ी धूप के समय चमकता है।” उस समय तुम निस्संदेह जान जाओगे कि इतना कुछ कहने वाला यह साधारण देह निर्विवाद रूप से दूसरा देहधारी परमेश्वर है। इतना ही नहीं, तुम्हें वास्तव में अनुभव होगा कि तुम कितने धन्य हो, और तुम स्वयं को सबसे अधिक भाग्यशाली महसूस करोगे। क्या तुम इस आशीष को प्राप्त करने के इच्छुक नहीं हो?

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, प्रस्तावना

पिछला: 2. विभिन्न धार्मिक संप्रदाय अब धार्मिक अनुष्ठान का कर्तव्यनिष्ठा से पालन करते हुए दिखाई देते हैं, लेकिन पादरी केवल बाइबल और धर्मशास्त्रीय सिद्धांतों के शब्दों और वाक्यांशों का प्रचार करने पर ध्यान केंद्रित करते हैं, और पवित्र आत्मा के ज्ञान और रोशनी का पूरी तरह से अभाव होता है। विश्वासियों का जीवन पूरी तरह से प्रावधान-रहित है। उन्होंने कई वर्षों से प्रभु पर विश्वास किया है लेकिन वे सत्य से अनभिज्ञ हैं और प्रभु के वचनों को अभ्यास में लाने में असमर्थ हैं। प्रभु में उनकी आस्था एक धार्मिक मान्यता के अलावा कुछ नहीं है। मुझे समझ नहीं आता कि आज कलीसियाएँ धर्म में क्यों उतर आईं हैं।

अगला: 2. जैसा कि हम इसे समझते हैं, कई प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक विशेषज्ञों और शिक्षाविदों ने माना है कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया एक उभरती हुई ईसाई कलीसिया है। सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया और पारंपरिक ईसाइयत के बीच क्या अंतर है?

परमेश्वर के बिना जीवन कठिन है। यदि आप सहमत हैं, तो क्या आप परमेश्वर पर भरोसा करने और उसकी सहायता प्राप्त करने के लिए उनके समक्ष आना चाहते हैं?

संबंधित सामग्री

5. पुराने और नए दोनों नियमों के युगों में, परमेश्वर ने इस्राएल में काम किया। प्रभु यीशु ने भविष्यवाणी की कि वह अंतिम दिनों के दौरान लौटेगा, इसलिए जब भी वह लौटता है, तो उसे इस्राएल में आना चाहिए। फिर भी आप गवाही देते हैं कि प्रभु यीशु पहले ही लौट चुका है, कि वह देह में प्रकट हुआ है और चीन में अपना कार्य कर रहा है। चीन एक नास्तिक राजनीतिक दल द्वारा शासित राष्ट्र है। किसी भी (अन्य) देश में परमेश्वर के प्रति इससे अधिक विरोध और ईसाइयों का इससे अधिक उत्पीड़न नहीं है। परमेश्वर की वापसी चीन में कैसे हो सकती है?

संदर्भ के लिए बाइबल के पद :“क्योंकि उदयाचल से लेकर अस्ताचल तक जाति-जाति में मेरा नाम महान् है..., सेनाओं के यहोवा का यही वचन है” (मलाकी...

प्रश्न: प्रभु यीशु कहते हैं: "मेरी भेड़ें मेरा शब्द सुनती हैं" (यूहन्ना 10:27)। तब समझ आया कि प्रभु अपनी भेड़ों को बुलाने के लिए वचन बोलने को लौटते हैं। प्रभु के आगमन की प्रतीक्षा से जुड़ी सबसे महत्वपूर्ण बात है, प्रभु की वाणी सुनने की कोशिश करना। लेकिन अब, सबसे बड़ी मुश्किल ये है कि हमें नहीं पता कि प्रभु की वाणी कैसे सुनें। हम परमेश्वर की वाणी और मनुष्य की आवाज़ के बीच भी अंतर नहीं कर पाते हैं। कृपया हमें बताइये कि हम प्रभु की वाणी की पक्की पहचान कैसे करें।

उत्तर: हम परमेश्वर की वाणी कैसे सुनते हैं? हममें कितने भी गुण हों, हमें कितना भी अनुभव हो, उससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता। प्रभु यीशु में विश्वास...

प्रश्न 1: सर्वशक्तिमान परमेश्वर कहते हैं, "केवल अंत के दिनों का मसीह ही मनुष्य को अनंत जीवन का मार्ग दे सकता है," तो मुझे वह याद आया जो प्रभु यीशु ने एक बार कहा था, "परन्तु जो कोई उस जल में से पीएगा जो मैं उसे दूँगा, वह फिर अनन्तकाल तक प्यासा न होगा; वरन् जो जल मैं उसे दूँगा, वह उसमें एक सोता बन जाएगा जो अनन्त जीवन के लिये उमड़ता रहेगा" (यूहन्ना 4:14)। हम पहले से ही जानते हैं कि प्रभु यीशु जीवन के सजीव जल का स्रोत हैं, और अनन्‍त जीवन का मार्ग हैं। क्या ऐसा हो सकता है कि सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर और प्रभु यीशु समान स्रोत हों? क्या उनके कार्य और वचन दोनों पवित्र आत्मा के कार्य और वचन हैं? क्या उनका कार्य एक ही परमेश्‍वर करते हैं?

उत्तर: दोनों बार जब परमेश्‍वर ने देह धारण की तो अपने कार्य में, उन्होंने यह गवाही दी कि वे सत्‍य, मार्ग, जीवन और अनन्‍त जीवन के मार्ग हैं।...

परमेश्वर का प्रकटन और कार्य परमेश्वर को जानने के बारे में अंत के दिनों के मसीह के प्रवचन मसीह-विरोधियों को उजागर करना अगुआओं और कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारियाँ सत्य के अनुसरण के बारे में सत्य के अनुसरण के बारे में न्याय परमेश्वर के घर से शुरू होता है अंत के दिनों के मसीह, सर्वशक्तिमान परमेश्वर के अत्यावश्यक वचन परमेश्वर के दैनिक वचन सत्य वास्तविकताएं जिनमें परमेश्वर के विश्वासियों को जरूर प्रवेश करना चाहिए मेमने का अनुसरण करो और नए गीत गाओ राज्य का सुसमाचार फ़ैलाने के लिए दिशानिर्देश परमेश्वर की भेड़ें परमेश्वर की आवाज को सुनती हैं परमेश्वर की आवाज़ सुनो परमेश्वर के प्रकटन को देखो राज्य के सुसमाचार पर अत्यावश्यक प्रश्न और उत्तर मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 1) मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 2) मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 3) मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 4) मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 5) मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 6) मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 7) मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 8) मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 9) मैं वापस सर्वशक्तिमान परमेश्वर के पास कैसे गया

सेटिंग

  • इबारत
  • कथ्य

ठोस रंग

कथ्य

फ़ॉन्ट

फ़ॉन्ट आकार

लाइन स्पेस

लाइन स्पेस

पृष्ठ की चौड़ाई

विषय-वस्तु

खोज

  • यह पाठ चुनें
  • यह किताब चुनें

WhatsApp पर हमसे संपर्क करें