2. आप गवाही देते हैं कि, अंतिम दिनों के दौरान, सर्वशक्तिमान परमेश्वर सत्य को व्यक्त करता है और मनुष्य का न्याय और शुद्धिकरण करने का कार्य करता है। बिल्कुल अंत में, वह विजेताओं का एक समूह प्राप्त करेगा, और उसके बाद इस पुराने, दुष्ट युग को ध्वंस कर देगा, जिससे मनुष्य एक नए युग में अग्रसर होगा। क्या आप इस बारे में अधिक विस्तार से सहभागिता कर सकते हैं कि अंतिम दिनों के दौरान परमेश्वर इस पुराने, दुष्ट युग को कैसे नष्ट करता है?
परमेश्वर के प्रासंगिक वचन :
जब परमेश्वर के सभी लोग पूर्ण किए जा चुके होंगे और पृथ्वी के सभी देश मसीह का राज्य बन चुके होंगे, तो यही वह समय होगा जब सात गर्जनाएँ गूँजेंगी। वर्तमान दिन उस चरण की दिशा में एक लंबा कदम है; उस दिन की ओर बढ़ने के लिए धावा बोल दिया गया है। यह परमेश्वर की योजना है और निकट भविष्य में यह साकार हो जाएगी। लेकिन, परमेश्वर जो कुछ भी कहता है, वह सब पहले ही उसके द्वारा पूरा कर दिया गया है। इस प्रकार, यह स्पष्ट है कि धरती के देश केवल रेत के किले हैं, ढह जाने के कगार पर हैं—अंत का दिन सन्निकट है और बड़ा लाल अजगर परमेश्वर के वचन के नीचे गिर जाएगा। यह सुनिश्चित करने के लिए कि परमेश्वर की योजना पूरी तरह से सफल हो, स्वर्गदूत मानव संसार में उतर आए हैं, उन्होंने परमेश्वर को संतुष्ट करने का भरसक प्रयास करना शुरू कर दिया है और देहधारी परमेश्वर दुश्मन से लड़ाई करने के लिए युद्ध के मैदान में स्वयं मौजूद है। जहाँ देहधारी देह होती है, वहीं शत्रु पूर्णतया नष्ट हो जाता है। सबसे पहले चीन नष्ट होगा; परमेश्वर के हाथों इसका सर्वनाश कर दिया जाएगा। परमेश्वर इस पर कतई कोई भी दया नहीं दिखाएगा। जैसे-जैसे परमेश्वर के लोग अधिक परिपक्व होते जाते हैं, वैसे-वैसे यह सिद्ध होता जाता है कि बड़ा लाल अजगर और भी ढहता जा रहा है; यह मनुष्य के लिए स्पष्ट रूप से दृष्टिगोचर है। परमेश्वर के लोगों की परिपक्वता दुश्मन के पतन का संकेत है। यह “प्रतिस्पर्धा करने” के अर्थ का थोड़ा स्पष्टीकरण है।
—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, “संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचनों” के रहस्यों का अनावरण, अध्याय 10
सब कुछ मेरे वचनों से पूरा हो जाएगा; कोई मनुष्य इसमें भाग नहीं ले सकता, और कोई मनुष्य वह काम नहीं कर सकता जिसे मैं करूँगा। मैं सभी देशों की हवा साफ करूँगा और पृथ्वी पर से दुष्टात्माओं के सभी निशान मिटा दूँगा। मैं पहले ही शुरू कर चुका हूँ और मैं अपनी ताड़ना का प्रारंभिक कार्य बड़े लाल अजगर के निवास-स्थान में आरंभ करूँगा। इस प्रकार यह देखा जा सकता है कि मेरी ताड़ना पूरे ब्रह्मांड पर आ गई है। बड़ा लाल अजगर और सभी प्रकार की अशुद्ध आत्माएँ मेरी ताड़ना से बच नहीं सकती हैं, क्योंकि मैं सभी देशों की पड़ताल करता हूँ। जब पृथ्वी पर मेरा कार्य पूरा हो जाएगा, अर्थात् जब न्याय का युग समाप्त होगा, तब मैं औपचारिक रूप से बड़े लाल अजगर को ताड़ना दूँगा। मेरे लोग बड़े लाल अजगर को दी जाने वाली मेरी धार्मिक ताड़ना अवश्य देखेंगे, मेरी धार्मिकता के कारण अनवरत रूप से स्तुति अवश्य व्यक्त करेंगे, और मेरी धार्मिकता के कारण सदा मेरे पवित्र नाम की बड़ाई अवश्य करेंगे। इसलिए तुम लोग औपचारिक रूप से अपने कर्तव्य निभाओगे, और औपचारिक रूप से सभी देशों में मेरी स्तुति करोगे, हमेशा-हमेशा के लिए!
जब न्याय का युग अपने शिखर पर पहुँचेगा, तो मैं अपना कार्य समाप्त करने में जल्दबाजी नहीं करूँगा, बल्कि इसे ताड़ना के युग के प्रमाण के साथ जोड़ दूँगा, ताकि मेरे सारे लोग देख सकें; इसमें अधिक बड़े फल लगेंगे। यह प्रमाण वह साधन है, जिसके द्वारा मैं बड़े लाल अजगर को ताड़ना देता हूँ, और मैं अपने लोगों को उनकी आँखों से यह सब दिखाऊँगा, ताकि वे मेरे स्वभाव के बारे में अधिक जान सकें। जिस समय मेरे लोग मेरा आनंद लेते हैं, वह वही समय होता है जब बड़े लाल अजगर को ताड़ना दी जाती है। बड़े लाल अजगर के लोगों को उसके विरुद्ध खड़ा करना और उनसे उसके विरुद्ध विद्रोह करवाना मेरी योजना है, और यह वह तरीका है जिससे मैं अपने लोगों को पूर्ण करता हूँ, और यह मेरे सभी लोगों के लिए जीवन में प्रगति करने का एक बड़ा अवसर है। ... आज मैं मनुष्य के साथ-साथ चलते हुए, उसके साथ मिलकर ताड़ना के युग में आगे बढ़ता हूँ। मैं अपना कार्य कर रहा हूँ, अर्थात्, मैं मनुष्यों के बीच अपनी छड़ी से प्रहार करता हूँ और मनुष्यों में जो कुछ विद्रोहात्मक है, वह उस पर पड़ती है। मनुष्य की नजर में मेरी छड़ी में विशेष शक्तियाँ प्रतीत होती हैं : यह उन सभी पर पड़ती है, जो मेरे शत्रु हैं, और उन्हें आसानी से नहीं छोड़ती; मेरा विरोध करने वाले सभी लोगों पर यह छड़ी अपना अंतर्निहित कार्य करती है; वे सभी जो मेरे हाथों में हैं मेरे इरादों के अनुसार अपनी-अपनी भूमिका निभाते हैं, और वे कभी मेरे इरादों के विरुद्ध नहीं गए हैं, न ही अपना सार बदला है। परिणामस्वरूप, समुद्र गरजेंगे, पहाड़ गिर जाएँगे, बड़ी-बड़ी नदियाँ विघटित हो जाएँगी, मनुष्य हमेशा अस्थिर रहेगा, सूरज मंद पड़ जाएगा, चाँद काला हो जाएगा, मनुष्य के पास शांति से जीने के लिए और दिन नहीं रहेंगे, भूमि पर शांति का और समय नहीं होगा, स्वर्ग फिर कभी शांत और निर्विघ्न नहीं रहेगा, यह अब खुद को संयमित नहीं करेगा। सभी चीजें नई कर दी जाएँगी और फिर से अपना मूल रूप पा लेंगी। पृथ्वी पर सारे परिवार छिन्न-भिन्न कर दिए जाएँगे, और पृथ्वी पर सारे देश अंदर से विभाजित हो जाएँगे; पति-पत्नी के बीच पुनर्मिलन के दिन चले जाएँगे, माँ-बेटा दोबारा आपस में नहीं मिलेंगे, न बाप-बेटी ही फिर कभी आपस में मिल पाएँगे। पृथ्वी पर चीजें जिस तरह से भी हुआ करती थीं, उन सब को मेरे द्वारा ध्वस्त कर दिया जाएगा।
—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन, अध्याय 28
युग का समापन करने के अपने अंतिम कार्य में परमेश्वर का स्वभाव ताड़ना और न्याय का है, जिसमें वह वो सब प्रकट करता है जो अधार्मिक है, वह अनगिनत लोगों का सरेआम न्याय करता है और उन लोगों को पूर्ण बनाता है जो सच्चे दिल से उससे प्रेम करते हैं। केवल इस तरह का स्वभाव ही युग का समापन कर सकता है। अंत के दिन पहले ही आ चुके हैं। सभी चीजें अपनी किस्म के अनुसार छाँटी जाती हैं और अपनी विभिन्न खूबियों के आधार पर विभिन्न श्रेणियों में विभाजित की जाती हैं। ठीक यही वह समय है जब परमेश्वर लोगों के परिणाम और गंतव्य प्रकट करता है। यदि लोग ताड़ना और न्याय का अनुभव न करें तो उनके विद्रोहीपन और अधार्मिकता को उजागर नहीं किया जा सकता है। केवल ताड़ना और न्याय के माध्यम से ही सभी चीजों का परिणाम प्रकट किया जा सकता है। लोग जो सच में हैं वह केवल तब दिखाते हैं जब उन्हें ताड़ना दी जाती है और उनका न्याय किया जाता है। बुरे को बुरे के साथ रखा जाएगा, भले को भले के साथ, और सभी लोगों को उनकी किस्म के अनुसार छाँटा जाएगा। ताड़ना और न्याय के माध्यम से सभी चीजों के परिणाम प्रकट किए जाएँगे ताकि बुरे को दंडित किया जा सके और अच्छे को पुरस्कृत किया जा सके, और अनगिनत लोग परमेश्वर के प्रभुत्व के सामने आत्मसमर्पण कर लें। यह समस्त कार्य धार्मिक ताड़ना और न्याय के माध्यम से पूरा करना होगा। चूँकि लोगों की भ्रष्टता अपने शिखर पर पहुँच गई है और उनका विद्रोहीपन अत्यंत गंभीर है, इसलिए केवल परमेश्वर का धार्मिक स्वभाव ही, जो मुख्यतः ताड़ना और न्याय से युक्त है और अंत के दिनों में प्रकट होता है, लोगों को पूरी तरह से परिवर्तित कर सकता है और उन्हें पूर्ण कर सकता है, बुराई को उजागर कर सकता है, और इस तरह सभी अधार्मिकों को गंभीर रूप से दंडित किया जाएगा। इसलिए इस तरह के स्वभाव में युग का महत्व निहित है। प्रत्येक नए युग के कार्य की खातिर परमेश्वर के स्वभाव का प्रकटन और खुलासा होता है। ऐसा नहीं है कि परमेश्वर अपने स्वभाव को मनमाने और निरर्थक ढंग से प्रकट करता है। मान लो कि लोगों के परिणामों के प्रकट होने के अंत के दिनों में अगर परमेश्वर अभी भी लोगों पर असीम दया और करुणा बरसाता रहता और उनसे प्रेम करता रहता, उन्हें धार्मिक न्याय के अधीन करने के बजाय उनके प्रति नरमी, धैर्य और क्षमा दर्शाता रहता और उन्हें माफ करता रहता, चाहे उनके पाप कितने भी गंभीर क्यों न हों, उन्हें रत्ती भर भी धार्मिक न्याय के अधीन न करता, तो फिर परमेश्वर के समस्त प्रबंधन का समापन कब होता? कब इस तरह का कोई स्वभाव सही मंजिल की ओर मानवजाति की अगुआई करने में सक्षम होगा? यह किसी ऐसे न्यायाधीश के समान है जो लोगों के प्रति हमेशा प्रेममय होता है, एक दयालु चेहरे और सौम्य हृदय वाला प्रेममय न्यायाधीश जो लोगों से प्यार करता है चाहे उन्होंने जो भी अपराध किए हों, और उन्हें प्रेम और सहनशीलता दिखाता है चाहे वे जो भी हों—ऐसा न्यायाधीश कब न्यायोचित निर्णय पर पहुँचेगा? अंत के दिनों के दौरान केवल धार्मिक न्याय ही लोगों को उनकी किस्म के अनुसार छाँट सकता है और उन्हें एक नए क्षेत्र में ला सकता है। इस तरह से परमेश्वर के न्याय और ताड़ना के धार्मिक स्वभाव के माध्यम से समस्त युग का अंत किया जाता है।
—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, परमेश्वर के कार्य का दर्शन (3)
एक के बाद एक सभी तरह की आपदाएँ आ पड़ेंगी; सभी देश और स्थान आपदाओं का सामना करेंगे : हर जगह महामारी, अकाल, बाढ़, सूखा और भूकंप हैं। ये आपदाएँ बस एक-दो जगहों पर नहीं आ रही हैं, न ही वे एक-दो दिनों में समाप्त होंगी, बल्कि वे अधिकाधिक बड़े क्षेत्र तक फैल जाएँगी और अधिकाधिक गंभीर होती जाएँगी। इस दौरान एक के बाद एक तमाम तरह के कीट-प्रकोप आएँगे, और हर जगह नरभक्षण की घटनाएँ होंगी। असंख्य देशों और लोगों पर यह मेरा न्याय है।
—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, आरंभ में मसीह के कथन, अध्याय 65
यह कहा जा सकता है कि आज के सभी वचन भविष्य के मामलों की भविष्यवाणी करते हैं और वे परमेश्वर के कार्य के अगले कदम के लिए उसकी व्यवस्थाओं का वर्णन करते हैं। परमेश्वर ने कलीसिया के लोगों पर अपना काम लगभग पूरा कर लिया है और इसके बाद वह सभी लोगों के सामने क्रोध के साथ प्रकट होगा। जैसा कि परमेश्वर कहता है, “मैं धरती के लोगों से अपने कार्यों को स्वीकार करवाऊँगा और ‘न्यायपीठ’ के सामने अपने कर्म साबित करवाऊँगा, पूरी पृथ्वी के लोगों के बीच अपने कर्म स्वीकार करवाऊँगा और सभी को झुका दूँगा।” क्या तुम लोगों ने इन वचनों में कुछ देखा? इनमें परमेश्वर के कार्य के अगले हिस्से का सारांश है। पहले परमेश्वर उन सभी संरक्षक कुत्तों को, जो राजनीतिक शक्ति का संचालन करते हैं, पूरी तरह से आश्वस्त करेगा और वे इतिहास के मंच से खुद अपनी मर्जी से पीछे हट जाएँगे, ताकि वे फिर कभी प्रतिष्ठा के लिए न लड़ें और फिर कभी कुचक्रों तथा षड्यंत्रों में न उलझें। यह कार्य परमेश्वर द्वारा पृथ्वी पर लाई गई विभिन्न आपदाओं के जरिये करना होगा। लेकिन परमेश्वर प्रकट नहीं होगा। इस समय, बड़े लाल अजगर का देश अभी भी गंदगी की भूमि होगा, और इसलिए परमेश्वर प्रकट नहीं होगा, परंतु केवल ताड़ना के रूप में उभरेगा। ऐसा है परमेश्वर का धार्मिक स्वभाव, जिससे कोई बच नहीं सकता। इस दौरान, बड़े लाल अजगर के देश में रहने वाले सभी लोग विपत्ति झेलेंगे, जिसमें स्वाभाविक रूप से पृथ्वी पर राज्य (कलीसिया) भी शामिल है। यह वही समय है जब लोगों के ऊपर तथ्य आएँगे। इसलिए इसका अनुभव सभी लोगों द्वारा किया जाता है, और कोई बच नहीं पाएगा। यह परमेश्वर द्वारा पूर्वनियत किया गया है। ठीक कार्य के इसी चरण के कारण परमेश्वर कहता है, “यही समय है महान योजनाओं को पूरा करने का।” क्योंकि भविष्य में पृथ्वी पर कोई कलीसिया नहीं होगी और आपदाओं के आगमन के कारण लोग केवल उसी के बारे में सोच पाएँगे, जो उनके सामने होगा और बाकी हर चीज़ को वे नज़रअंदाज़ कर देंगे, और आपदाओं के बीच परमेश्वर का आनंद लेना उनके लिए मुश्किल होगा। इसलिए, लोगों से कहा जाता है कि वे इस अद्भुत समय में परमेश्वर से खुलकर और पूरी तरह से प्रेम करें, ताकि वे इस अवसर को गँवा न बैठें। जब यह तथ्य गुज़र जाएगा, तो परमेश्वर ने बड़े लाल अजगर को पूरी तरह हरा दिया होगा, और इस प्रकार परमेश्वर के लोगों का उसके लिए गवाही देने का कार्य समाप्त हो गया होगा; इसके बाद परमेश्वर कार्य के अगले चरण की शुरुआत करेगा, वह बड़े लाल अजगर के देश को तबाह कर देगा, और अंततः पूरे ब्रह्मांड के लोगों को सलीब पर उलटा लटका देगा, जिसके बाद वह पूरी मानवजाति को नष्ट कर देगा—ये परमेश्वर के कार्य के भावी चरण हैं।
—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, “संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचनों” के रहस्यों का अनावरण, अध्याय 42
जब परमेश्वर अपना महान कोप प्रकट करेगा, तब परिणामस्वरूप पूरी दुनिया ज्वालामुखी के फटने की तरह हर प्रकार की आपदाओं का अनुभव करेगी। आकाश में ऊपर खड़े हो कर, यह देखा जा सकता है कि पृथ्वी पर सभी प्रकार की आपदाएँ, दिन प्रति दिन मानवजाति को घेर रही हैं। ऊपर से नीचे देखने पर, पृथ्वी विभिन्न दृश्य प्रदर्शित करती है जो भूकंप से पहले के दृश्य जैसे हैं। तरल अग्नि अनियंत्रित बहती है, लावा बेरोकटोक बहता है, पहाड़ सरकते हैं और हर ओर ठंडी रोशनी चमकती है। पूरी दुनिया आग में डूब गई है। यह परमेश्वर के कोप के उत्सर्जन का दृश्य है, और यह उसके न्याय का समय है। वे सभी जो मांस और रक्त वाले हैं भागने में असमर्थ होंगे। इस प्रकार, पूरी दुनिया को नष्ट करने के लिए देशों के बीच युद्ध और लोगों के बीच संघर्ष की आवश्यकता नहीं होगी; इसके बजाय दुनिया परमेश्वर की ताड़ना के पालने में “स्वयं का होशहवास में आनंद” लेगी। कोई भी बच निकलने में सक्षम नहीं होगा; हर एक व्यक्ति को, एक के बाद एक, इस कठिन परीक्षा से गुजरना होगा। इसके बाद संपूर्ण ब्रह्माण्ड एक बार पुनः पवित्र कांति से जगमगाएगा और समस्त मानवजाति एक बार पुनः एक नया जीवन शुरू करेगी। और परमेश्वर ब्रह्मांड के ऊपर आराम करेगा और हर दिन मानवजाति को आशीष देगा।
—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, “संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचनों” के रहस्यों का अनावरण, अध्याय 18
समूची मानवजाति मेरा चेहरे देखने को लालायित है, परंतु जब मैं व्यक्तित्व में पृथ्वी पर नीचे आता हूँ, तब वे सब मेरे आगमन से विमुख हो जाते हैं, और वे सभी रोशनी के आगमन को निर्वासित कर देते हैं, मानो मैं स्वर्ग में मनुष्य का शत्रु होऊँ। मनुष्य अपनी आँखों में रक्षात्मक चमक के साथ मेरा अभिवादन करता है, और निरंतर सतर्क बना रहता है, इससे अत्यंत भयभीत कि शायद मेरे पास उसके लिए इतर योजनाएँ हों। क्योंकि मनुष्य मुझे अपरिचित मित्र मानते हैं, इसलिए उन्हें लगता है मानो मैं भेदभाव किए बिना उन्हें मार डालने का मनोरथ पाले बैठा हूँ। मनुष्य की नज़रों में, मैं जानलेवा बैरी हूँ। विपत्ति के बीच मेरी गर्मजोशी का स्वाद चखने के बाद भी मनुष्य मेरे प्रेम से अनभिज्ञ बना हुआ है, और अब भी मुझे दूर रोके रखने और मेरी अवज्ञा करने पर उतारू है। उसके विरुद्ध कार्रवाई करने के लिए उसकी स्थिति का लाभ उठाना तो दूर, मैं मनुष्य को आलिंगन की गर्माहट में लपेट लेता हूँ, उसके मुँह को मिठास से भर देता हूँ, और उसके पेट में ज़रूरत भर का भोजन डाल देता हूँ। परंतु, जब मेरा प्रचंड कोप से भरा गुस्सा पहाड़ों और नदियों को झकझोरता है, तब, मनुष्य की कायरता के कारण, मैं भिन्न-भिन्न रूपों में यह राहतें अब और उस पर न्योछावर नहीं करूँगा। इस क्षण, प्रचंड क्रोध में मैं अपने आपे से बाहर हो जाऊँगा, समस्त जीवित प्राणियों को पश्चाताप करने का अवसर देने से इनकार करके, और मनुष्य के लिए अपनी समस्त आशा को तिलांजलि देकर, मैं उसे इतना कठोर दण्ड दूँगा जिसका वह पूरी तरह हक़दार है। इस क्षण, गरजते बादल और चमकती बिजली कौंधते और दहाड़ते हैं, उसी तरह जैसे महासागर की लहरें गुस्से से उफन रही हों, जैसे दसियों हजारों पहाड़ भरभराकर ढह रहे हों। अपने विद्रोहीपन के कारण, मनुष्य गरजते बादल और चमकती बिजली के द्वारा मार गिराया जाता है, और गरजते बादल तथा चमकती बिजली के जबरदस्त झोंकों में अन्य जीव-जंतुओं का भी सफाया हो जाता है, समूचा ब्रह्माण्ड अचानक उथल-पुथल हो जाता है, और सृष्टि जीवन की आदिम साँस पुनः प्राप्त नहीं कर पाती है। मानवजाति के असंख्य समुदाय गरजते बादल की दहाड़ से बचकर निकल नहीं सकते; चमकती बिजली की कौंधों के बीच, झुंड के झुंड मनुष्य, तेज़ बहाव में एक के ऊपर एक तेज़ी से गिरते जाते हैं, पहाड़ों से झरनों में गिरती प्रचंड धाराएँ उन्हें दूर बहा ले जाती हैं। देखते ही देखते अचानक, “मनुष्यों” का संसार मनुष्य की “मंज़िल” से मिलता और उसमें समा जाता है। महासागर की सतह पर शव बहते हैं। समस्त मानवजाति मेरे कोप के कारण मुझसे बहुत दूर चली जाती है, क्योंकि मनुष्य ने मेरे आत्मा के सार के विरुद्ध पाप किया है, उसकी विद्रोहशीलता ने मुझे नाराज़ कर दिया है। परंतु, जल से रिक्त स्थानों में, अन्य मनुष्य अब भी, हँसी और गाने के बीच, उन प्रतिज्ञाओं का आनंद ले रहे हैं, जो मैंने कृपापूर्वक उन्हें प्रदान की हैं।
—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन, अध्याय 17
पुराने संसार के अस्तित्वमान रहते हुए, मैं अपना क्रोध हर देश के ऊपर पूरी जोर से बरसाऊंगा और प्रशासनिक आदेश लागू करूँगा जो समूचे ब्रह्मांड में सार्वजनिक किए जाते हैं और जो कोई भी उनका उल्लंघन करेगा उन्हें ताड़ना दी जाएगी :
जब मैं पूरे ब्रह्मांड से बोलता हूँ, सब लोग मेरी आवाज सुनते हैं, यानी सभी लोग उन सभी कर्मों को देखते हैं जिन्हें मैंने समूचे ब्रह्मांड में अंजाम दिया है। जो मेरे इरादों के विरुद्ध जाते हैं, अर्थात जो मनुष्य के कर्मों से मेरा विरोध करते हैं, वे मेरी ताड़ना के बीच गिरेंगे। मैं स्वर्ग के असंख्य तारों को नया बनाऊँगा; मेरी बदौलत, सूर्य और चंद्रमा नए हो जाएँगे, आकाश अब वैसा नहीं रहेगा जैसा वह था; और पृथ्वी पर सभी चीजें फिर से नई बना दी जाएँगी—यह सब मेरे वचनों के कारण संपन्न किया जाएगा। ब्रह्मांड के भीतर सारे देशों को नए सिरे से बाँटा जाएगा और मेरे राज्य द्वारा प्रतिस्थापित किया जाएगा, जिससे पृथ्वी पर विद्यमान देश हमेशा के लिए विलुप्त हो जाएँगे, और केवल वह राज्य होगा जो मेरी आराधना करता है; पृथ्वी के सभी देशों को नष्ट कर दिया जाएगा और उनका अस्तित्व समाप्त हो जाएगा। ब्रह्मांड के भीतर मनुष्यों में से वे सभी जो दानवों के हैं पूर्णतया नष्ट कर दिए जाएँगे। वे सभी जो शैतान की आराधना करते हैं वे मेरी जलती हुई आग के बीच गिर पड़ेंगे—अर्थात् उनको छोड़कर जो अभी धारा के अन्तर्गत हैं, शेष सभी को राख में बदल दिया जाएगा। जब मैं प्रत्येक जनसमूह को ताड़ना दूँगा तो धार्मिक समुदाय मेरे राज्य में अलग-अलग पैमाने पर लौट आएँगे और मेरे कर्मों के माध्यम से जीत लिए जाएँगे, क्योंकि वे यह देख चुके होंगे कि “सफेद बादल पर सवार पवित्र दिव्य जन” पहले ही आ चुका है। सब लोग अपनी किस्म के अनुसार छाँटे जाएँगे और वे अपने क्रियाकलापों के अनुरूप विविध प्रकार की ताड़नाएँ प्राप्त करेंगे; वे सब जिन्होंने मेरा प्रतिरोध किया है नष्ट हो जाएँगे और जहाँ तक उनकी बात है जिनके पृथ्वी पर कर्मों ने मुझे शामिल नहीं किया है, उन्होंने जिस तरह का व्यवहार किया है उस कारण वे पृथ्वी पर मेरी संतान और मेरे लोगों के शासन के अधीन अस्तित्व में बने रहेंगे। मैं असंख्य देशों और असंख्य लोगों के सामने प्रकट होऊँगा और अपनी वाणी को पृथ्वी पर व्यक्त करूँगा, अपने महान कार्य के पूरे होने की उद्घोषणा करूँगा और सब लोगों को अपनी-अपनी आँखों से यह देखने दूँगा।
—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन, अध्याय 26