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परमेश्वर पूर्व में प्रकट हुआ है

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च्यू ज़ेन, चीन

एक दिन, मेरी बहन ने मुझे फ़ोन किया और कहा कि वह उत्तर से वापस आ गई थी और मुझे बताने के लिए उसके पास कोई महत्वपूर्ण बात थी। उसने मुझे तुरंत आने के लिए कहा। मैं सोच रही थी कि क्या हुआ होगा, और फ़ोन के बाद मैं मेरी बहन के यहाँ जा पहुँची। जैसे ही मैंने प्रवेश किया और देखा कि मेरी बहन एक किताब पढ़ रही थी, मुझे कुछ राहत मिली। मेरी बहन ने देखा कि मैं आ चुकी थी, वह अचानक खड़ी हुई और बोली: "बहन! उत्तर में इस बार मुझे कुछ अच्छी खबर मिली: प्रभु यीशु वापस आ गया है!

यह सुनकर, मैंने कुछ विचलित होकर सोचा: इन सभी वर्षों में पूर्वी बिजली ने हमेशा यह प्रमाण दिया है कि प्रभु यीशु वापस आ गया है; तो क्या यह हो सकता है कि मेरी बहन ने पूर्वी बिजली को स्वीकार कर लिया है? मेरे कुछ भी कहने से पहले, मेरी बहन ने गंभीरता से कहा: "बहन! प्रभु ने देहधारण कर लिया है, और वह हमारे देश, चीन में, आया है।" मैंने उसकी बात सुनी और जितनी अधिक उसने बातें की, वह उतने ही कम सामान्य तौर पर बोली, और इसलिए मैंने जल्दी से कहा: "लोग जो भी कहें, उस पर विश्वास मत करो। क्या परमेश्वर चीन में आ सकता है? बाइबल में यह बहुत स्पष्ट रूप से कहा गया है: 'उस दिन वह जैतून के पर्वत पर पाँव रखेगा, जो पूर्व की ओर यरूशलेम के सामने है; तब जैतून का पर्वत पूर्व से लेकर पश्‍चिम तक बीचोबीच से फटकर बहुत बड़ा खड्ड हो जाएगा; तब आधा पर्वत उत्तर की ओर और आधा दक्षिण की ओर हट जाएगा' (जक. 14:4)। परमेश्वर को इस्राएल में ही आना है। वह चीन में नहीं आ सकता है। कितने शर्म की बात है कि तुम प्रभु के लिए काम करती हो, और इतना भी नहीं जानती!"

मेरी बहन ने ईमानदारी से कहा, "बहन, मैं भी तुम्हारी तरह सोचा करती थी, लेकिन सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों और भाइयों और बहनों की सहभागिता के माध्यम से, मुझे एहसास हुआ है कि प्रभु ने वास्तव में चीन में देहधारण किया है। जिस शास्त्र की तुम बात कर रही हो वह एक भविष्यवाणी है, लेकिन भविष्यवाणियों पर हमारी इच्छानुसार टिप्पणी नहीं की जा सकती है। वे परमेश्वर के कार्य के तथ्यों के माध्यम से पूरी की जाती हैं ताकि लोग देख सकें। जब यहोवा काम करने के लिए आया, न तो पतरस और न ही सामरी स्त्री, न ही इथियोपिया का नपुंसक शास्त्रों में प्रभु के आने की भविष्यवाणी से चिपके रहे थे। प्रभु यीशु के कथन के तथ्य ने, और उसने जो कार्य किया उसने, इस बात की पुष्टि की थी कि मसीहा प्रभु यीशु के रूप में आया था। उन सभी ने परमेश्वर के कदमों का पालन किया और प्रभु का उद्धार प्राप्त किया। और उन सभी फरीसियों ने जो बाइबल की भविष्यवाणियों के शब्दों पर ध्यान देते थे, प्रभु यीशु से, वो मसीह जो आ चुका था, एक साधारण व्यक्ति जैसा व्यवहार किया और प्रभु यीशु को अस्वीकार किया, उसका विरोध किया और उसकी निंदा की, और अंत में प्रभु यीशु को क्रूस पर चढ़ा दिया। इसलिए उन्हें परमेश्वर ने दंडित किया था। बहन, हमें प्रभु के आगमन को सावधानीपूर्वक लेना होगा। हमारे पास ईश्वर का आदर करने वाले दिल होने चाहिए। तुम जो कुछ भी करती हो, उसे बिना सोचे समझे न करो!"

मैंने अपनी बहन की ओर देखा और बाइबल उठाकर कहा, "प्रभु यहोवा ने इस्राएल में व्यवस्था का प्रचार किया और प्रभु यीशु को भी इस्राएल में ही क्रूस पर चढ़ाया गया। जब चीन एक नास्तिक पार्टी द्वारा शासित देश है, तो परमेश्वर ऐसे देश में क्यों आएगा? हमने प्रभु में इतने सालों से विश्वास किया है, लेकिन लोग जो भी कहते हैं, हम उसका विश्वास नहीं कर सकते!"

मेरी बहन ने चिंतित होकर कहा, "बहन, उस समय जब प्रभु यीशु ने कार्य किया, तो फरीसियों ने प्रभु का विरोध किया और कहा: 'ढूँढ़ और देख कि गलील से कोई भविष्यद्वक्‍ता प्रगट नहीं होने का' (यूहन्ना 7:52)। 'क्या मसीह गलील से आएगा?' (यूहन्ना 7:41)। लेकिन वास्तव में प्रभु यीशु गलील के नासरत में बड़ा किया गया था। बाइबल कहती है: 'आहा! परमेश्‍वर का धन और बुद्धि और ज्ञान क्या ही गंभीर है! उसके विचार कैसे अथाह, और उसके मार्ग कैसे अगम हैं!' प्रभु की बुद्धि को किसने जाना? या उसका मंत्री कौन हुआ?' (रोमियों 11:33-34)। हम परमेश्वर के ज्ञान को कैसे माप सकते हैं? हम अपने दिमाग के आधार पर परमेश्वर के कार्य का विश्लेषण नहीं कर सकते! हम हर दिन परमेश्वर के आने की प्रतीक्षा करते हैं। अब जब परमेश्वर वास्तव में लौट आया है, यदि हम अपनी अवधारणाओं को थामे रहते हैं और खोज या जाँच नहीं करते हैं, तो हम परमेश्वर से मिलने का मौका चूक जाएँगे और पश्चाताप में डूबे रहेंगे!"

अपनी बहन को इतनी गंभीर देखकर मैंने सोचा: मेरी बहन ईमानदारी से प्रभु में विश्वास करती है और वह एक विचारशील, दृढ़ व्यक्ति है। वह आम तौर पर जो भी करती है उसके बारे में सावधान रहती है, और प्रभु के आगमन जैसे एक बड़े मुद्दे पर वह किसी के कहने पर अंधाधुंध विश्वास कर ले, इसकी संभावना और भी कम है। अब चूँकि वह पूर्वी बिजली को स्वीकार करती है, क्या यह हो सकता है कि प्रभु वास्तव में चीन में अपना कार्य करने के लिए वापस आ गया हो? लेकिन फिर एक और विचार आया: प्रभु चीन में कैसे काम कर सकता है? यह बहुत अकल्पनीय है! तो मैंने दृढ़ता से कहा: "बाइबल उस केक की तरह है जिसकी एक हज़ार परतें हों और इसकी व्याख्या करने का तरीक़ा प्रत्येक व्यक्ति के लिए अलग है। बाइबल भविष्यवाणी करती है कि परमेश्वर वास्तव में अंत के दिनों में इस्राएल में उतरेगा। इसके अलावा, अधिकांश चीनी लोग बुद्ध की पूजा करते हैं और राष्ट्रीय सरकार ने हमेशा धार्मिक मान्यताओं को सताया है। परमेश्वर कार्य करने के लिए चीन में नहीं आएगा!"

मेरी बहन ने उत्सुकता से कहा, "बहन, प्रभु लौट आया है और कार्य करने के लिए चीन में प्रकट हुआ है। यह बहुत महत्वपूर्ण है। मैंने अभी-अभी सर्वशक्तिमान परमेश्वर के अंत के दिनों के कार्य को स्वीकार कर लिया है। मैं अभी भी सच्चाई के इस पहलू के बारे में बहुत कुछ नहीं समझती हूँ, लेकिन मैं सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया के भाइयों और बहनों को एक बहुत ही रोचक तरीके से गवाही देते हुए सुनती हूँ। मैं उन्हें तुम्हारे साथ सहभागिता करने के लिए मिलाऊँगी!" मैंने अपना हाथ हिलाया और कहा, "उन्हें मत बुलाना। मैं जा रही हूँ।" घर लौटने के बाद, मैं सोफे पर सुस्ती से बैठ गई और मेरी बहन ने जो कहा था, उस पर मैंने फिर से सोचा। मैं अंदर से अनियंत्रित महसूस कर रही थी और शांत नहीं हो सकी। मैंने हमेशा जैतून के पर्वत पर प्रभु यीशु के चरणों के पड़ने का इंतजार किया था, तो वह अचानक कैसे कह सकती थी कि प्रभु चीन में आया था? यह कैसे हो सकता है? मैंने लगातार बाइबल के पन्ने पलटाये लेकिन एक भी ऐसा अध्याय नहीं मिला जो भविष्यवाणी करता हो कि प्रभु चीन में अपना कार्य करने आएगा।" उस समय जब प्रभु यीशु ने अपना कार्य किया, तो फरीसियों ने प्रभु का विरोध किया और कहा: 'ढूँढ़ और देख कि गलील से कोई भविष्यद्वक्‍ता प्रगट नहीं होने का' (यूहन्ना 7:52)। 'क्या मसीह गलील से आएगा?' (यूहन्ना 7:41)। लेकिन वास्तव में प्रभु यीशु गलील के नासरत में बड़ा किया गया था...। मेरी बहन के शब्द बार-बार मेरे दिमाग में आए, और मैंने सोचा कि उसने जो कहा, वह सच था। मैंने एक पल के लिए बाइबल पर नज़र डाली और एक पल के लिए मेरी बहन के शब्दों के बारे में सोचा। इस पर बार-बार सोचते हुए, मुझे पता नहीं चला कि सही क्या था, लेकिन अपने दिल में सिर्फ प्रभु से मैंने कहा, "हे प्रभु, मुझे क्या करना चाहिए? प्रभु, तुम कहाँ उतरोगे?

कुछ दिनों बाद मेरी बहन फिर मुझे ढूँढते हुए आई। जैसे ही उसने घर में प्रवेश किया, वह मुस्कुराई और बोली, "बहन, सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया की बहन ज़ी और बहन हाओ मेरे समर्थन के लिए मेरे घर आईं। उन्होंने लंबे समय से सर्वशक्तिमान परमेश्वर में विश्वास किया है और मुझसे कहीं ज्यादा समझती हैं। यदि प्रभु की वापसी के बारे में ऐसा कुछ भी है जो तुम नहीं समझती हो, तो जाओ और उनके साथ सहभागिता करो।" मैंने सोचा कि मैंने प्रभु में कितने वर्षों से विश्वास किया था, कैसे मैं हमेशा प्रभु के आने की आशा किया करती थी और मैं कैसे इससे भी अधिक जानना चाहती थी कि प्रभु आया है या नहीं। बेहतर होगा कि मैं उनके साथ सहभागिता के इस अवसर का लाभ उठा लूँ। तो मैं अपनी बहन के साथ उसके घर गई। जैसे ही मैंने कमरे में प्रवेश किया, दोनों बहनों ने बहुत स्नेह से मेरा अभिवादन किया और बहुत ही खुले दिल से बात की। उन्होंने कहा कि अगर मेरे पास कोई सवाल हों, तो मैं खुलकर बात करूँ ताकि सब मिलकर सहभागिता कर सकें। इसलिए मैंने पूछा, "तुम कहती हो कि प्रभु यीशु पहले ही लौट चुका है और चीन में कार्य कर रहा है? क्या बाइबल में इसका कोई आधार है?" बहन हाओ मुस्कुराई और उसने कहा, "बहन, बाइबल में वास्तव में अंत के दिनों में प्रभु के चीन में कार्य करने के लिए आने के बारे में भविष्यवाणियाँ हैं।" मैंने झट से कहा, "यह कैसे हो सकता है? मैं कई बार बाइबल पढ़ चुकी हूँ, लेकिन बाइबल में मैंने इसका एक भी ज़िक्र नहीं पाया है। बाइबल में इसका आधार कहाँ है?" बहन हाओ ने धैर्यपूर्वक कहा, "बहन, आओ, हम पवित्रशास्त्र के दो छंद पढ़ें और तुम जान लोगी। मलाकी 1:11 में लिखा है: 'क्योंकि उदयाचल से ले कर अस्ताचल तक अन्यजातियों में मेरा नाम महान है; - सेनाओं के यहोवा का यही वचन है।' मत्ती 24:27 में यह कहा गया है: 'क्योंकि जैसे बिजली पूर्व से निकलकर पश्‍चिम तक चमकती है, वैसे ही मनुष्य के पुत्र का भी आना होगा।' पवित्रशास्त्र के इन दो छंदों से, हम स्पष्ट रूप से देख सकते हैं कि वह स्थान जहाँ परमेश्वर एक बार फिर उतरेगा, वह दुनिया का पूर्व है और यह अन्यजातियों के देश में है। हम सभी जानते हैं कि चीन दुनिया का पूर्व है। परमेश्वर के कार्य के पहले दो चरण इस्राएल में थे। इस्राएल के लिए चीन एक अन्यजातियों का राष्ट्र है। इसलिए अंत के दिनों में काम करने के लिए परमेश्वर का चीन में आगमन इन भविष्यवाणियों को पूरा करता है!" बहनों की सहभागिता सुनने और पवित्रशास्त्र के इन दो छंदों के अर्थ पर विचार करने के बाद, मैंने सोचा कि उनकी सहभागिता बहुत ज्ञानवर्धक थी। हालाँकि मैंने इन दो छंदों को पहले पढ़ा था, लेकिन मैंने प्रभु की पूर्व में वापसी का अर्थ चीन नहीं समझा था। उनके समझाने को अब सुनकर, मुझे लगा कि यह पवित्र आत्मा के प्रबोधन से निकला हुआ था।

बहन हाओ ने आगे कहा, "हम सोचते हैं कि जब प्रभु आएगा,तब वह यहूदिया में जैतून के पहाड़ पर उतरेगा। बाइबल की भविष्यवाणी के अनुसार, जब प्रभु आता है तो जैतून का पर्वत दो भागों में विभाजित हो जाएगा। वास्तव में, इस्राएल का जैतून का पर्वत बहुत पहले दो भागों में विभाजित हो गया था। फिर हमने जैतून के पर्वत पर उतरने वाले मनुष्य के पुत्र को क्यों नहीं देखा? वास्तव में, इसमें ढूँढने के लिए कुछ सच्चाइयाँ और रहस्य हैं। चलो, देखते हैं कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर ने क्या कहा: "पूर्ण ब्रह्माण्ड में मैं अपना कार्य कर रहा हूं, और पूर्व में गर्जना करते हुए धमाके निरंतर होते हैं और सभी सम्प्रदायों और पंथों को हिला देते हैं। मेरी वाणी ने सभी लोगों को वर्तमान में लाने में अगुवाई की है। मैं अपनी वाणी से सभी लोगों को जीत लूंगा, ताकि वे इस धारा में आएं, मेरे सामने नतमस्तक हों, क्योंकि मैंने बहुत पहले अपनी महिमा सारी धरती से वापस ले ली है और इसे नए रूप में पूर्व में जारी कर दिया है। ऐसा कौन है जो मेरी महिमा नहीं देखना चाहता? कौन है जिसे उत्सुकता से मेरी वापसी की प्रतीक्षा नहीं है? कौन है जिसे मेरे पुन: प्रकटन की प्यास नहीं है? कौन है जिसे मेरी मनोरमता की अभिलाषा नहीं है? कौन है जो रोशनी में नहीं आना चाहेगा? कौन है जो कनान की समृद्धि नहीं देखना चाहेगा? कौन है जो उद्धारक के लौटने की इच्छा नहीं रखता? कौन है जो महान सर्वशक्तिमान की आराधना नहीं करता? मेरी वाणी समस्त धरती पर फैल जाएगी; मैं चाहता हूं कि मैं अपने पसंदीदा लोगों के सामने अपने अधिक वचन व्यक्त करूं। भयंकर गर्जना की तरह जो पर्वतों और नदियों को हिलाकर रख देती है, मैं अपने वचन पूर्ण ब्रह्माण्ड और मानवता के सामने बोलता हूँ। अत: मेरे मुख के वचन इंसान के लिए खज़ाना बन गए हैं, और सभी लोग मेरे वचनों को संजोकर रखते हैं। बिजली पूर्व से लेकर पश्चिम तक चमकती है। मेरे वचन ऐसे हैं कि इंसान इन्हें त्यागना नहीं चाहता और साथ ही उन्हें कल्पना से परे पाता है, लेकिन उसमें भरपूर आनंद लेता है। किसी नवजात शिशु की तरह, लोग मेरे आगमन की खुशियां और आनंद मना रहे हैं। अपनी वाणी के ज़रिए मैं सभी लोगों को अपने सामने लाऊंगा। उसके बाद, मैं औपचारिक रूप से इंसानी नस्ल में प्रवेश करूंगा ताकि वे आकर मेरी आराधना करें। उस महिमा के साथ जो मुझसे प्रसारित होती है और उन वचनों के साथ जो मेरे मुख में हैं, मैं इसे ऐसा बनाऊंगा कि सभी लोग मेरे सामने आएं और देखें कि बिजली पूर्व से चमकती है और मैं पूर्व के 'जैतून के पर्वत' पर्यंत अवतरित हो चुका हूं। वे देखेंगे कि मैं बहुत पहले से ही इस धरती पर हूं, यहूदियों का पुत्र होकर नहीं बल्कि पूर्व की बिजली होकर क्योंकि मैं बहुत पहले ही पुनर्जीवित हो चुका हूं, और लोगों के बीच से जा चुका हूं, और लोगों के बीच पुन: अपनी महिमा के साथ प्रकट हुआ हूं। मैं वो हूं जिसे अनंत युगों पहले पूजा जाता था, और मैं वो शिशु भी हूं जिसे अनंत युगों पहले इस्राएलियों द्वारा त्याग दिया गया था। इसके अलावा, मैं आज के युग का सर्व-महिमामय सर्वशक्तिमान परमेश्वर हूं! सभी मेरे सिंहासन के समक्ष आओ और मेरी महिमामयी मुखाकृति का अवलोकन करो, मेरी वाणी सुनो, और मेरे कर्मों को देखो। यही मेरी इच्छा की समग्रता है; यही मेरी योजना का अंत और चरम है, तथा मेरे प्रबंधन का प्रयोजन है। सभी देश मेरी आराधना करें, सभी जिह्वा मुझे स्वीकृति दें, हर व्यक्ति मुझमें निष्ठा रखे, और प्रत्येक व्यक्ति मेरी प्रजा बने!" ("वचन देह में प्रकट होता है" से " सात गर्जनाएँ – भविष्यवाणी करती हैं कि राज्य के सुसमाचार पूरे ब्रह्माण्ड में फैल जाएंगे")। हम सभी जानते हैं कि परमेश्वर अपने पहले देहधारण के समय राज्य का सुसमाचार ले आया था। यह सुसमाचार पश्चिम से पूर्व में पारित किया गया था। लेकिन लोगों ने यह उम्मीद नहीं की थी कि परमेश्वर दुनिया के पूर्व—चीन में, लौटेगा, अनन्त सुसमाचार लाएगा और लोगों का न्याय, शुद्धिकरण करने और उन्हें बचाने का काम करेगा। इस बार परमेश्वर का काम पूर्व से पश्चिम तक है...।"

जब मैंने यह सुना, तो मैंने बहन को रोका और परेशान होकर पूछा, "बहन, पुराने नियम में दर्ज है कि यहोवा परमेश्वर ने इस्राएल में कार्य किया था, प्रभु यीशु का कार्य यहूदिया में था और परमेश्वर के कार्य के दोनों चरण इस्राएल में थे, इसलिए प्रभु की वापसी इस्राएल में ही होनी चाहिए। तुम कैसे कह सकती हो कि यह चीन में है?" बहन हाओ मुस्कुराई और बोली, "हम सोचते हैं कि परमेश्वर के कार्य के पहले दोनों चरण इस्राएल में थे, इसलिए जब प्रभु लौटता है तो निश्चित रूप से वह इस्राएल में ही अपना कार्य करेगा। क्या इस तरह की सोच तथ्यों के अनुरूप है? क्या यह हो सकता है कि परमेश्वर सिर्फ इस्राएलियों का परमेश्वर है? क्या यह हो सकता है कि परमेश्वर सिर्फ इस्राएलियों को नियंत्रित करता और बचाता है? चलो, देखते हैं कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर क्या कहता है।"

बहन ज़ी ने परमेश्वर के वचनों की किताब खोली और इन वचनों को पढ़ा: "जब अंत के दिनों के दौरान उद्धारकर्त्ता का आगमन होता है, यदि उसे तब भी यीशु कहकर पुकारा जाता, और उसने एक बार फिर से यहूदिया में जन्म लिया होता, और यहूदिया में अपना काम किया होता, तो इससे यह प्रमाणित होता कि मैंने केवल इस्राएलियों की रचना की और केवल इस्राएलियों के लोगों को ही छुटकारा दिलाया, और अन्यजातियों से मेरा कोई वास्ता नहीं है। क्या यह मेरे वचनों के विपरीत नहीं होगा कि 'मैं वह प्रभु हूँ जिसने आकाश और पृथ्वी और सभी वस्तुओं को बनाया है?' मैंने यहूदिया को छोड़ दिया और अन्यजातियों के बीच में कार्य करता हूँ क्योंकि मैं मात्र इस्राएल के लोगों का ही परमेश्वर नहीं हूँ, बल्कि सभी प्राणियों का परमेश्वर हूँ। मैं अंत के दिनों के दौरान अन्यजातियों के बीच में प्रकट होता हूँ क्योंकि मैं न केवल इस्राएल के लोगों का परमेश्वर यहोवा हूँ, बल्कि, इसके अतिरिक्त, क्योंकि मैं अन्यजातियों के बीच में अपने चुने हुए सभी लोगों का रचयिता भी हूँ। मैंने न केवल इस्राएल, मिस्र और लेबनान की रचना की, बल्कि मैंने इस्राएल से बाहर के सभी अन्यजाति के राष्ट्रों की भी रचना की" ("वचन देह में प्रकट होता है" से "उद्धारकर्त्ता पहले ही एक 'सफेद बादल' पर सवार होकर वापस आ चुका है")। "मैं सभी लोगों को ज्ञात करवाऊँगा कि मैं केवल इस्राएलियों का ही परमेश्वर नहीं हूँ, बल्कि अन्यजातियों का भी हूँ, यहाँ तक कि उनका भी हूँ जिन्हें मैंने शाप दिया है। मैं सभी लोगों को यह देखने दूँगा कि मैं समस्त सृष्टि का परमेश्वर हूँ। यह मेरा सबसे बड़ा कार्य है, अंत के दिनों के लिए मेरी कार्य योजना का उद्देश्य है, और अंत के दिनों में पूरा किया जाने वाला एकमात्र कार्य है" ("वचन देह में प्रकट होता है" से "सुसमाचार को फैलाने का कार्य मनुष्यों को बचाने का कार्य भी है")। "उसने इज़राइलियों की अगुवाई की और यहूदिया में पैदा हुआ, और वह एक गैर-यहूदि भूमि में भी पैदा हुआ है। क्या उसका सभी कार्य उस मानव जाति के लिए नहीं जिसका उसने निर्माण किया? क्या वह इज़राइलियों को सौ गुना पसंद करता है और गैर-यहूदियों से एक हज़ार गुना घृणा करता है? क्या यह तुम्हारी धारणा नहीं है? …यदि तुम अभी भी मानते हो कि परमेश्वर केवल इज़राइलियों का परमेश्वर है, और अभी भी यह मानते हो कि इज़राइल में दाऊद का घर परमेश्वर के जन्म का स्थान है और इज़राइल के अलावा कोई भी राष्ट्र परमेश्वर को 'उत्पन्न' करने के योग्य नहीं है, और तो और यह भी मानते हो कि कोई गैर-यहूदी परिवार यहोवा के कार्यों को निजी तौर पर प्राप्त करने के लिए सक्षम नहीं है—अगर तुम अभी भी इस तरह सोचते हो, तो क्या यह तुम्हें एक ज़िद्दी विरोधी नहीं बनाता? …तुम लोगों ने यह भी कभी नहीं सोचा कि कैसे एक गैर-यहूदी भूमि में परमेश्वर व्यक्तिगत रूप से उतर सकता है। उसे तो सिनाई पर्वत पर या जैतून पर्वत पर उतरना चाहिए और इज़राइलियों के समक्ष प्रकट होना चाहिए। क्या गैर-यहूदी (जो इज़राइल के बाहर के लोग है) सभी उसकी घृणा के पात्र नहीं हैं? वह व्यक्तिगत रूप से उनके बीच कैसे काम कर सकता है? ये सभी गहरी जड़ों वाली धारणाएं हैं जिन्हें तुम लोगों ने कई वर्षों से विकसित किया है। आज तुम लोगों पर विजय प्राप्त करने का उद्देश्य है तुम लोगों की इन धारणों को ध्वस्त कर देना। इस तरह तुम लोगों ने परमेश्वर को व्यक्तिगत रूप से अपने बीच में प्रकट होते हुए देखा है—सिनाई पर्वत पर या जैतून पर्वत पर नहीं, बल्कि उन लोगों के बीच जिनकी उसने अतीत में कभी अगुवाई नहीं की है" ("वचन देह में प्रकट होता है" से "विजयी कार्यों का आंतरिक सत्य (3)")। "यदि उसका वर्तमान का कार्य इस्राएलियों के मध्य किया गया होता, उसके छः हज़ार सालों के प्रबंधन के कार्य के समाप्त होने के समय तक, प्रत्येक व्यक्ति यह विश्वास करता कि परमेश्वर केवल इस्राएलियों का परमेश्वर है, यह कि सिर्फ इस्राएल के लोग परमेश्वर के चुने हुए लोग हैं, यह कि केवल इस्राएली ही परमेश्वर की आशीष और प्रतिज्ञाओं को प्राप्त करने के योग्य हैं। अंतिम दिनों में, परमेश्वर बड़े लाल अजगर के गैर यहूदी देश में देहधारी के तौर पर है; उसने सम्पूर्ण सृष्टि के परमेश्वर के तौर पर परमेश्वर का कार्य पूर्ण कर लिया है; उसने अपना सम्पूर्ण प्रबंधन कार्य पूर्ण कर लिया है... इसलिए, इस कार्य का प्रत्येक चरण बहुत ही सार्थक है; परमेश्वर बिल्कुल भी बिना अर्थ या मूल्य का कार्य नहीं करेगा" ("वचन देह में प्रकट होता है" से "परमेश्वर सम्पूर्ण सृष्टि का प्रभु है")।

तब बहन हाओ ने सहभागिता में कहा: "अतीत में हमने अपने दिल में तय कर लिया था कि परमेश्वर इस्राएलियों का परमेश्वर था क्योंकि कार्य के पहले दोनों चरणों को इस्राएल में किया गया था। इस्राएल परमेश्वर के कार्य का जन्मस्थल था और यह परमेश्वर के कार्य का आधार क्षेत्र भी था, इसलिए हमने सोचा कि परमेश्वर का कार्य केवल इस्राएल में ही हो सकता है, कि सुसमाचार केवल इस्राएल से ही आ सकता है और केवल इस्राएल के लोग ही परमेश्वर के चुने हुए लोग हैं। यदि परमेश्वर अब भी अंत के दिनों में इस्राएल में ही कार्य करे, तो हम और भी सोचेंगे कि परमेश्वर केवल इस्राएल में ही कार्य कर सकता है, कि परमेश्वर केवल इस्राएलियों को ही आशीर्वाद दे सकता है और उनके आशीर्वाद के साथ अन्यजातियों का कोई भी सरोकार नहीं है। अंत के दिनों में, परमेश्वर ने लोगों के न्याय और शुद्धिकरण करने के अपने कार्य को पूरा करने के लिए एक अन्यजाति के देश को चुना है। यह वह भूमि—अर्थात चीन है, जहाँ बड़ा लाल अजगर भी रहता है। यह हर किसी की अवधारणा को पलट देता है और लोगों को वास्तव में यह देखने देता है कि परमेश्वर केवल इस्राएलियों का परमेश्वर नहीं है, बल्कि अन्यजातियों के सभी राष्ट्रों का, सभी सर्जित प्राणियों का परमेश्वर भी है। परमेश्वर न केवल इस्राएलियों को आशीर्वाद देता है, बल्कि अन्यजातियों को भी आशीर्वाद देता है। यह 'परमेश्वर सम्पूर्ण सृष्टि का प्रभु है' के कार्य को पूरा करता है। यह स्पष्ट है कि परमेश्वर का अंत के दिनों में कार्य करने के लिए चीन को चुनना बहुत महत्वपूर्ण है। परमेश्वर वास्तव में सर्वशक्तिमान और बहुत बुद्धिमान है।"

बहन की सहभागिता को सुनकर, मैं चिंतन में डूब गई: हाँ, परमेश्वर समूची सृष्टि का प्रभु है। क्या पूरी मानव जाति परमेश्वर द्वारा रचित नहीं है? परमेश्वर केवल इस्राएलियों को ही नहीं बचाता, बल्कि वह चीनी लोगों को भी बचाता है। क्या परमेश्वर का आज चीन में कार्य करने के लिए आना अन्यजातियों के लिए उसका प्रेम नहीं है? ऐसा लगता है कि मैं वास्तव में परमेश्वर की इच्छा को नहीं समझती हूँ! इस बारे में सोचकर, मुझे कुछ हद तक शर्मिंदगी महसूस हुई, मैंने अपना स्वर हलका किया और कहा: "बहन, मैं समझती हूँ कि तुम क्या कह रही हो। यदि परमेश्वर फिर से इस्राएल में काम करने के लिए आता है, तो हम परमेश्वर के बारे में एक नियम स्थापित कर लेंगे और सोचेंगे कि परमेश्वर सिर्फ इस्राएलियों का प्रभु है। आज परमेश्वर का कार्य लोगों की अवधारणाओं को तोड़ना और लोगों को यह समझाना है कि परमेश्वर सभी सर्जित प्राणियों का प्रभु है। परमेश्वर इस्राएल में और चीन में भी काम कर सकता है और इसलिए हम परमेश्वर के कार्य के बारे में नियम स्थापित नहीं करते हैं। ऐसा लगता है कि अवधारणाओं और कल्पनाओं के आधार पर परमेश्वर के कार्य के बारे में नियम स्थापित करना वास्तव में बहुत मूर्खतापूर्ण और अज्ञानपूर्ण है! हालांकि, अभी भी एक बात है जिसे मैं समझ नहीं पा रही हूँ। दुनिया में इतने सारे देश हैं, जैसे यूरोप और अमेरिका के कई देश, जहाँ ईसाई और कैथलिक धर्म वहाँ के राष्ट्रीय धर्म हैं। क्या परमेश्वर के लिए उन देशों में आकर लोगों के न्याय और शुद्धिकरण का कार्य करना अधिक आसान नहीं होगा? चीन एक नास्तिक देश है, मूर्तिपूजकों से भरा है। राष्ट्रीय सरकार उन लोगों पर अंधाधुंध अत्याचार करती है जो परमेश्वर पर विश्वास करते हैं, तो परमेश्वर चीन में कार्य क्यों करेगा?"

बहन ज़ी मुस्कुराई और बोली, "बहन, तुम्हारा सवाल बहुत सारगर्भित है! परमेश्वर एक ऐसे देश में न्याय और शुद्धिकरण का कार्य क्यों करता है जो परमेश्वर को दुश्मन मानता है? अगर हम परमेश्वर का केवल इस्राएल और चीन में कार्य करने का उद्देश्य और महत्व समझें, तो हम सच्चाई के इस पहलू को समझ लेंगे। आओ, हम देखें कि परमेश्वर का वचन क्या कहता है। सर्वशक्तिमान परमेश्वर कहता है: "'पुराने विधान (ओल्ड टेस्टामेंट) में इस्राएलियों के लिए यहोवा के वचनों को और इस्राएल में उसके कार्यों कोदर्ज किया गया है; नये विधान में यहूदिया में यीशु के कार्य को दर्ज किया गया है। किन्तु बाइबल में कोई चीनी नाम क्यों नहीं है? क्योंकि परमेश्वर के कार्य के पहले दो हिस्से इस्राएल में किये गए थे, क्योंकि इस्राएल के लोग चुने हुए लोग थे—जिसका अर्थ है कि वे यहोवा के कार्य को स्वीकार करने वाले सबसे पहले लोग थे। वे समस्त मानवजाति में सबसे कम भ्रष्ट थे, और आरंभ में, वे परमेश्वर की खोज करने और उसका आदर करने का मन रखने वाले लोग थे। वे यहोवा के वचनों का पालन करते थे, और हमेशा मंदिर में सेवा करते थे, और याजकीय लबादे या मुकुट पहनते थे। वे परमेश्वर की पूजा करने वाले सबसे आरंभिक लोग थे, और उसके कार्य के सबसे आरंभिक विषयवस्तुथे। ये लोग संपूर्ण मानवजाति के लिए एक प्रतिदर्श और नमूना थे। वे पवित्रता और धार्मिकता के प्रतिदर्श और नमूने थे। अय्यूब,इब्राहीम,लूत या पतरस और तीमुथियुस जैसे लोग—सभी इस्राएली, और सर्वाधिक पवित्र प्रतिदर्श और नमूने थे। इस्राएल मानव जाति के बीच परमेश्वर की पूजा करने वाला सबसे आरंभिक देश था, और कहीं अन्यत्र की तुलना में अधिक धर्मी लोग यहाँ से आते थे। परमेश्वर ने उनमें कार्य किया ताकि भविष्य में वह पूरे देश में मानव जाति को बेहतर ढंग से प्रबंधित कर सके। उनकी उपलब्धियाँ और यहोवा की उनकी आराधना की धार्मिकता दर्ज की गई थी, ताकि वे अनुग्रह के युग के दौरान इस्राएल से परे लोगों के लिए प्रतिदर्शों और नमूनों के रूप में काम कर सकें; और उनकी क्रियाओं ने, आज के दिन तक, कई हजार वर्षों के कार्य को कायम रखा है।' 'यहोवा का कार्य दुनिया का सृजन था, यह आरंभ था; कार्य का यह चरण कार्य का अंत है, और यह समापन है। आरंभ में, परमेश्वर का कार्य इस्राएल के चुने हुए लोगों के बीच किया गया था,और यह सभी जगहों में से सबसे पवित्र में एक नए युग का उद्भव था। कार्य का अंतिम चरण, दुनिया का न्याय करने और युग को समाप्त करने के लिए, सभी देशों में से सबसे अशुद्ध में किया जाता है। पहले चरण में, परमेश्वर का कार्य सबसे प्रकाशमान स्थान में किया गया था, और अंतिम चरण सबसे अंधकारमय स्थान में किया जाता है, और इस अंधकार को बाहर निकाल दिया जाएगा,प्रकाश को प्रकट किया जाएगा, और सभी लोगों पर विजय प्राप्त की जाएगी। जब सभी जगहों में इस सबसे अशुद्ध और सबसे अंधकारमय स्थान के लोगों पर विजय प्राप्त कर ली जाएगी, और समस्त आबादी स्वीकार कर लेगी कि एक परमेश्वर है, जो सच्चा परमेश्वर है, और हर व्यक्ति सर्वथा आश्वस्त हो जाएगा, तब समस्त जगत में विजय का कार्य करने के लिए इस तथ्य का उपयोग किया जाएगा। कार्य का यह चरण प्रतीकात्मक है: एक बार इस युग का कार्य समाप्त हो गया, तो प्रबंधन का 6000 वर्षों कार्य पूरा हो जाएगा। एक बार सबसे अंधकारमय स्थान के लोगों को जीत लिया, तो कहने की आवश्यकता नहीं कि हर अन्य जगह पर भी ऐसा ही होगा। वैसे तो, केवल चीन में विजय का कार्य सार्थक प्रतीकात्मकता रखता है। चीन अंधकार की सभी शक्तियों का मूर्तरूप है, और चीन के लोग उन सभी लोगों का प्रतिनिधित्व करते हैं जो देह के हैं,शैतान के हैं,मांस और रक्त के हैं। ये चीनी लोग हैं जो बड़े लाल अजगर द्वारा सबसे ज़्यादा भ्रष्ट किए गए हैं, जिनका परमेश्वर के प्रति सबसे मज़बूत विरोध है, जिनकी मानवता सर्वाधिक अधम और अशुद्ध है, और इसलिए वे समस्त भ्रष्ट मानवता के मूलरूप आदर्श हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि अन्य देशों में कोई भी समस्या नहीं है; मनुष्य की धारणाएँ पूरी तरह से समान हैं,और यद्यपि इन देशों के लोग अच्छी क्षमता वाले हो सकते हैं, किन्तु यदि वे परमेश्वर को नहीं जानते हैं,तो यह अवश्य होगा कि वे उसका विरोध करते हैं। यहूदियों ने भी क्यों परमेश्वर का विरोध किया और उसकी अवहेलना की? फ़रीसियों ने भी क्यों उसका विरोध किया? यहूदा ने क्यों यीशु के साथ विश्वासघात किया? उस समय, बहुत से अनुयायी यीशु को नहीं जानते थे। क्यों यीशु को सलीब पर चढ़ाये जाने और उसके फिर से जी उठने के बाद भी, लोगों ने फिर भी उस पर विश्वास नहीं किया? क्या मनुष्य की अवज्ञा पूरी तरह से समान नहीं है? यह केवल ऐसा है कि चीन के लोग इसका एक उदाहरण बनाए जाते हैं, और जब उन पर विजय प्राप्त कर ली जाएगी तो वे एक नमूना और प्रतिदर्श बन जाएँगे, और दूसरों के लिए संदर्भ के रूप में कार्य करेंगे। मैंने हमेशा क्यों कहा है कि तुम लोग मेरी प्रबंधन योजना के सहायक हो? यह चीन के लोगों में है कि भ्रष्टाचार, अशुद्धता, अधार्मिकता, विरोध और विद्रोहशीलता सर्वाधिक पूर्णता से व्यक्त होते हैं और अपने सभी विविध रूपों में प्रकट होते हैं। एक ओर, वे खराब क्षमता के हैं, और दूसरी ओर, उनके जीवन और उनकी मानसिकता पिछड़े हुए हैं, और उनकी आदतें, सामाजिक वातावरण, जन्म का परिवार—सभी गरीब और सबसे पिछड़े हुए हैं। उनकी हैसियत भी कम है। इस स्थान में कार्य प्रतीकात्मक है, और इस परीक्षा के कार्य के इसकी संपूर्णता में पूरा कर दिए जाने के बाद, उसका बाद का कार्य बहुत बेहतर तरीके से होगा। यदि कार्य के इस चरण को पूरा किया जा सकता है, तो इसके बाद का कार्य ज़ाहिर तौर पर होगा ही। एक बार कार्य का यह चरण सम्पन्न हो जाता है, तो बड़ी सफलता पूर्णतः प्राप्त कर ली गई होगी, और समस्त विश्व में विजय का कार्य पूर्णतः पूरा हो गया होगा। वास्तव में, एक बार तुम लोगों के बीच कार्य सफल हो जाता है, तो यह समस्त विश्व में सफलता के बराबर होगा। यही इस बात का महत्व है कि क्यों मैं तुम लोगों से एक प्रतिदर्श और नमूने के रूप में कार्यकलाप करवाता हूँ। विद्रोहशीलता, विरोध, अशुद्धता, अधार्मिकता..., इन लोगों में सभी पाए जाते हैं,और इनमें मानव जाति की सभी विद्रोहशीलता का प्रतिनिधित्व होता है—वे वास्तव में कुछ हैं। इस प्रकार, उन्हें विजय के प्रतीक के रूप में प्रदर्शित किया जाता है, और एक बार जब वे जीत लिए जाते हैं तो वे स्वाभाविक रूप से दूसरों के लिए एक प्रतिदर्श और आदर्श बन जाएँगे'" ("वचन देह में प्रकट होता है" से "परमेश्वर के कार्य का दर्शन (2)")।

परमेश्वर के वचनों को पढ़ने के बाद, बहन ज़ी ने अपनी सहभागिता जारी रखी: "सर्वशक्तिमान परमेश्वर का वचन हमें स्पष्ट रूप से बताता है कि वह अपने कार्य के हर चरण के लिए किस प्रकार का कार्यस्थल और लक्ष्य चुनता है, वह सब उसके कार्य की ज़रूरतों पर आधारित होता है और वह सब काफ़ी अर्थपूर्ण होता है। मिसाल के तौर पर, परमेश्वर के कार्य के पहले दो चरण इस्राएल में थे क्योंकि इस्राएली परमेश्वर के चुने हुए लोग थे। वे समस्त मानवजाति में सबसे कम भ्रष्ट थे और उनके पास परमेश्वर से डरने वाले दिल थे। परमेश्वर के लिए, उनके बीच कार्य करके, परमेश्वर की आराधना करने के लिए आदर्श और नमूने का एक समूह बनाना सबसे आसान था। इस प्रकार परमेश्वर का कार्य तेज़ी से और अधिक आसानी से फैल सकता था, ताकि पूरी मानवजाति परमेश्वर के अस्तित्व और परमेश्वर के कार्य को जान सके, और अधिक लोग परमेश्वर के सामने आने और परमेश्वर के उद्धार को प्राप्त करने में, सक्षम हो सकें। इसलिए, परमेश्वर के लिए कार्य के पहले दो चरणों को इस्राएल में करना अधिक उपयुक्त लगता है। अंत के दिनों में, परमेश्वर लोगों को जीतने और शुद्ध करने का कार्य करता है। उन्हें परमेश्वर के विजय और शुद्धिकरण को पहले स्वीकार करने वाले प्रतिनिधि लोगों की भी आवश्यकता है। पूरी मानवजाति में, चीन के लोग सबसे भ्रष्ट और पिछड़े हैं और चीन वह राष्ट्र है जो परमेश्वर में सब से कम विश्वास करता है और जो परमेश्वर के प्रति सबसे बुरे प्रतिरोध का स्थान है। तो अंत के दिनों में, परमेश्वर का अपने न्याय और विजय का कार्य पहले चीन में करना, जो सबसे अधिक भ्रष्ट हैं उन लोगों की ताड़ना और उनके न्याय का कार्य करना, और हम लोगों को जो सबसे भ्रष्ट हैं जीतना और हमारा शुद्धिकरण करना, परमेश्वर की सर्वशक्तिमत्ता, पवित्रता और धार्मिकता को आरम्भ कर देगा और शैतान को शर्मिंदा करेगा। जब वे जो सबसे ज्यादा भ्रष्ट हैं परमेश्वर द्वारा विजित हो जाते हैं, तो कहने की आवश्यकता न होगी कि यह पूरे ब्रह्मांड की शेष मानव जाति को लागू होगा और शैतान भी पूरी तरह से पराजित हो जाएगा। अपने कार्य के हर चरण के लिए परमेश्वर द्वारा चुने गए स्थान और लक्ष्य से, और प्राप्त किये गए अंतिम परिणामों से, हम यह और भी बेहतर ढंग से देख सकते हैं कि परमेश्वर का कार्य कितना बुद्धिमत्तापूर्ण और अद्भुत है!"

सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों और बहनों की सहभागिता को सुनने के बाद मैंने समझा: परमेश्वर ने पहले इस्राएल में कार्य किया क्योंकि वह सबसे कम दूषित लोगों में आदर्श और नमूने लोगों का एक समूह बनाना चाहता था, और उनकी गवाही और परमेश्वर के सुसमाचार की घोषणा के माध्यम से और भी लोग परमेश्वर का उद्धार प्राप्त करेंगे। अंत के दिनों में परमेश्वर जो कार्य करता है वह विजय और शुद्धिकरण का कार्य है और वह सबसे भ्रष्ट, सबसे दूषित चीनी लोगों को परमेश्वर के कार्य के लक्ष्य के रूप में चुनता है, जिससे ये लोग वो आदर्श और नमूने बनते हैं जिन्हें जीत लिया और बचाया गया हो। यह परमेश्वर के ज्ञान और सर्वशक्तिमत्ता को और भी अधिक प्रकट करता है। मैं परमेश्वर के इरादे को नहीं समझ पाई थी, और मैंने बाइबल में यह पढ़ा कि परमेश्वर इस्राएल के जैतून पर्वत पर फिर से उतरेगा, इसलिए मैंने इसके शाब्दिक अर्थ को स्वीकार किया और सोचा कि परमेश्वर निश्चित रूप से इस्राएल में कार्य करेगा। कौन सोचेगा कि परमेश्वर बहुत पहले चीन में आ गया था! ऐसा लगता है कि परमेश्वर का कार्य वैसा सरल नहीं है जैसा कि लोग कल्पना करते हैं!

इस समय, बहन ज़ी ने आगे कहा: "इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि परमेश्वर किस देश में काम करता है, यह सब उसके ही काम के लिए और मानवजाति को बेहतर तरीके से बचाने के लिए है, और यह सब बहुत अर्थपूर्ण है। अगर हम आज परमेश्वर के प्रकटन को खोजना चाहते हैं, तो हमें पहले अपनी कल्पनाओं और अवधारणाओं को दूर करना होगा। हमें परमेश्वर के कदमों को सीमित नहीं मानना चाहिए, यह नहीं सोचना चाहिए कि परमेश्वर को इस या उस देश में आना होगा। परमेश्वर समस्त मानवजाति का परमेश्वर है। वह अपने कार्य की ज़रूरतों के हिसाब से कार्य की जगह स्वतंत्र रूप से चुन सकता है। सर्वशक्तिमान परमेश्वर कहता है: "परमेश्वर सभी मानव जाति का परमेश्वर है। वह अपने आप को किसी भी देश या राष्ट्र की निजी संपत्ति नहीं बनाता है, और वह किसी भी रूप, देश, या राष्ट्र द्वारा बाधित हुए बिना अपनी योजना का कार्य करता है। शायद तूने इस रूप की कभी कल्पना भी नहीं की होगी, या शायद तू इसके अस्तित्व का इनकार करता है, या शायद उस देश या राष्ट्र के साथ, जिसमें परमेश्वर प्रकट होता है, भेदभाव किया जाता है और पृथ्वी पर सबसे कम विकसित माना जाता है। फिर भी परमेश्वर के पास उसकी बुद्धि है। उसकी शक्ति के द्वारा और उसकी सत्यता और स्वभाव के माध्यम से उसे ऐसे लोगों का समूह मिल गया है जो उसके साथ एक विचार के हैं। और उसे ऐसे लोगों का समूह मिल गया है जैसा वह बनाना चाहता थाः उसके द्वारा जीता गया एक समूह, जो अति पीड़ादायक दुख और सब प्रकार के अत्याचार को सह लेता है और अंत तक उसका अनुसरण कर सकता है" ("वचन देह में प्रकट होता है" से "परमेश्वर का प्रकटीकरण एक नया युग लाया है")।

सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों को सुनने के बाद, मैं उत्तेजना में रो पड़ी और मैंने बहनों से कहा, "ये वचन परमेश्वर के सामर्थ्य और अधिकार लिए हुए हैं और वे परमेश्वर से आते हैं। अब मैं अंततः समझती हूँ: परमेश्वर न केवल इस्राएलियों का परमेश्वर है, बल्कि चीनी लोगों का परमेश्वर और उससे अधिक, पूरी मानवजाति का परमेश्वर भी है। परमेश्वर वास्तव में वापस आ गया है! इन दिनों में, मैं अच्छी तरह से खाने या सोने में सक्षम नहीं थी क्योंकि मैं गलत रास्ता लेने से डरती थी! आज आपके साथ हुई सहभागिता के लिए धन्यवाद, मेरे दिल का पत्थर हटकर ज़मीन पर गिर गया है। सचमुच परमेश्वर को धन्यवाद हो, कि उसने मुझे त्याग नहीं दिया!" बाद में, दोनों बहनों ने मुझे "वचन देह में प्रकट होता है" पुस्तक की एक प्रति दी। मैं खुशी से दोनों हाथों में किताब लिए घर लौट आई। सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों को पढ़ने के माध्यम से, मैं आश्वस्त हो गई कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर ही लौटा हुआ परमेश्वर यीशु था। हमारा प्रभु यीशु वास्तव में लौट आया है!