बुद्धिमान कुंवारियों ने प्रभु का स्वागत कैसे किया

28 अक्टूबर, 2020

अनिक, फ्रांस

सर्वशक्तिमान परमेश्वर कहता है : “जहाँ कहीं परमेश्वर प्रकट होगा, वहीं सत्य व्यक्त किया जाएगा और वहीं परमेश्वर की वाणी होगी। जो लोग सत्य स्वीकार कर सकते हैं केवल वे ही परमेश्वर की वाणी सुनने में सक्षम हैं और केवल इसी तरह के लोग परमेश्वर का प्रकटन देखने के योग्य हैं। अपनी धारणाओं को जाने दो! खुद को शांत करो और इन शब्दों को ध्यान से पढ़ो। जब तक तुम्हारे पास ऐसा दिल है जो सत्य के लिए लालायित रहता है, तब तक परमेश्वर तुम्हें प्रबुद्ध करेगा ताकि तुम उसके इरादे और वचन समझ सको। ‘असंभवता’ के अपने तर्क छोड़ दो! लोग किसी चीज़ को जितना अधिक असंभव मानते हैं, उसके घटित होने की उतनी ही अधिक संभावना होती है, क्योंकि परमेश्वर की बुद्धि स्वर्ग से ऊँची है, परमेश्वर के विचार मनुष्य के विचारों से ऊँचे हैं और परमेश्वर अपना कार्य मनुष्य की सोच और धारणा की सीमाओं से परे करता है। जितना अधिक कुछ असंभव होता है, उतना ही अधिक उसमें खोजने लायक सत्य होता है; जितना अधिक किसी चीज की कल्पना मनुष्य की धारणाओं द्वारा नहीं की जा सकती है, उसमें परमेश्वर के इरादे उतने ही अधिक होते हैं(वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, परिशिष्ट 1 : परमेश्वर के प्रकटन ने एक नए युग का सूत्रपात किया है)। हर बार जब परमेश्वर मानवता के बीच कार्य करने के लिए प्रकट होता है तो वह अपने वचनों को व्यक्त करता है और केवल वे लोग ही परमेश्वर के प्रकटन को देख पाएँगे जो अपनी धारणाओं को छोड़ देते हैं और सत्य को स्वीकार करने में सक्षम होते हैं। इसलिए, प्रभु का स्वागत करने की कुंजी प्रभु की वाणी को सुनने पर ध्यान देना और फिर उसके आधार पर प्रभु को पहचान कर उसका स्वागत करना है। जिन लोगों ने सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों में परमेश्वर की वाणी को पहचान लिया है, वे परमेश्वर के सिंहासन के सामने उठाए जाते हैं और उसके साथ प्रभु के भोज में शामिल होते हैं। वे ही बुद्धिमान कुंवारियाँ हैं, लोगों में सबसे धन्य। प्रभु पर अपने पहले के विश्वास में, मैं बस बाइबल के शाब्दिक अर्थ से चिपकी रहती और अपनी धारणाओं और कल्पनाओं के भरोसे रहती थी, मैं प्रभु के बादल पर आकर मुझे स्वर्ग के राज्य में ले जाने को लालायित थी। प्रभु के वापस आ जाने की बात सुनकर भी मैंने न तो इसकी जाँच और खोजबीन की और न ही परमेश्वर की वाणी को सुना। मैं करीब-करीब एक मूर्ख कुंवारी बन गई, प्रभु की वापसी का स्वागत करने से चूक गई। परमेश्वर के मार्गदर्शन से ही, मैं परमेश्वर की वाणी को सुन पाई और मेमने के विवाह-भोज में शामिल हो पाई।

अप्रैल 2018 में एक दिन, प्रभु में आस्था रखने वाली एक बहन ने मेरी अच्छी मित्र मिरेइल को एक फिल्म भेजी, जिसका नाम था “कहाँ है घर मेरा” और कहा कि यह बहुत बढ़िया और वास्तविकता पर आधारित फिल्म है। मिरेइल मेरे घर आ गई ताकि हम साथ बैठ कर फ़िल्म देख सकें। फिल्म की मुख्य किरदार जब दुखी और मायूस थी, तब मैंने देखा कि उसने एक मोटी-सी क़िताब खोली, उसके पृष्ठों में उसे फिर से जीवन की आशा मिल गयी। लेकिन उसके हाथ में बाइबल नहीं थी, उस क़िताब की सामग्री हमारे लिए बिल्कुल नयी थी। हम दोनों हैरान होकर देखती रहीं। बाद में जब मुख्य किरदार मुश्किल में पड़ी तो कलीसिया के भाई-बहन उसकी मदद करने के लिए आ गये। उन्होंने इस क़िताब को साथ मिलकर पढ़ा, एक-दूसरे को प्रोत्साहित कर मदद भी की। जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ी, मेरी आँखों में आंसू आने लगे। फिल्म के किरदार हमारे अँधेरे समाज के तमाम स्वार्थी लोगों से अलग हैं और मुझे लगा कि वे जो पढ़ रहे थे, वह ख़ास है। हम वाकई जानना चाहती थीं कि इस क़िताब में क्या है, इसलिए हमने वीडियो के नीचे लिखी जानकारी पढ़ी। लेकिन जब मैंने उसमें देखा कि प्रभु यीशु प्रकट हो चुका है, मैं यकीन नहीं कर पायी, सोचा, “हो ही नहीं सकता! प्रेरितों 1:11 में कहा गया है : ‘हे गलीली पुरुषो, तुम क्यों खड़े आकाश की ओर देख रहे हो? यही यीशु, जो तुम्हारे पास से स्वर्ग पर उठा लिया गया है, जिस रीति से तुम ने उसे स्वर्ग को जाते देखा है उसी रीति से वह फिर आएगा।’ प्रभु यीशु एक बादल पर गया था, अंत के दिनों में वापस आते समय उसे भव्य महिमा के साथ फिर बादल पर आना चाहिए। अब, ऐसा तो नहीं हुआ, लेकिन यहाँ कहा गया है कि प्रभु यीशु प्रकट हो गया है। यह बाइबल से मेल नहीं खाता है।” मैंने मिरेइल को अपने मन की बात बताई, उसे मेरी बात ठीक लगी। इसके बाद, हमने सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया के बारे में ज़्यादा कुछ भी मालूम नहीं किया, बस उस फिल्म को दो-चार बार और देखा।

कुछ समय तक, प्रभु की वापसी की ख़बर मेरे दिमाग में घूमती रही, फिर दो-चार महीने बाद ही मिरेइल और मेरे बीच यह विषय दोबारा उठा। हमने इस बारे में बात की कि फिल्म में पढ़े हुए वचनों से उनकी आस्था कितनी बढ़ी और उनमें कैसी आशा जगी, कैसे ये वचन किसी ऐसे-वैसे इंसान के कहे हुए नहीं लग रहे थे। पूरी धार्मिक दुनिया में, सिर्फ़ सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया ही प्रभु के लौटकर आने की गवाही दे रही है, यानी शायद बात इतनी सरल नहीं है। फिर मुझे याद आया कि बाइबल में साफ़ तौर पर कहा गया है, प्रभु बादल पर वापस आयेगा, पादरियों और एल्डरों ने भी यही कहा है। तो फिर यह कलीसिया क्यों कह रही है कि प्रभु वापस आ चुका है? ये सब किस बारे में है? हमें इसे खोजना और इसकी जाँच-पड़ताल करनी चाहिए या नहीं? मैं बड़े पशोपेश में थी, इसलिए मिरेइल और मैंने साथ में प्रार्थना की, प्रभु से सही विकल्प चुनने के लिए राह दिखाने की विनती की। बाद में, मैंने सोचा, “परमेश्वर हर चीज़ का संप्रभु है, उसमें अपनी हर इच्छा पूरी करने की सामर्थ्य है। हम उसके कार्य को अपनी सोच और धारणाओं तक ही सीमित कैसे कर सकते हैं? अगर सर्वशक्तिमान परमेश्वर सच में वापस आए हुए प्रभु यीशु हैं और मैं न तो खोजूँ न जाँच-पड़ताल करूँ, प्रभु का स्वागत करने का अपना मौका गँवा दूँ तो क्या पूरी जिंदगी पछताती नहीं रहूँगी?” इसलिए हमने सर्वशक्तिमान परमेश्वर के अंत के दिनों के कार्य की जाँच करने का फैसला किया। सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया की वेबसाइट के जरिये हमने बहन आना से संपर्क किया। उन्होंने भाई पियर से हमारा परिचय करवाया और हम सबने मिलकर प्रभु की वापसी के विषय पर चर्चा करने के लिए एक सभा की।

उस सभा में, मैंने उन्हें अपनी उलझन के बारे में बताया, मैंने कहा, “प्रेरितों 1:11 में कहा गया है कि प्रभु उसी तरह से वापस आयेगा जैसे वह गया था। वह सफ़ेद बादल पर गया था, इसलिए अंत के दिनों में वापस आते समय यकीनन वह सफ़ेद बादल पर ही आयेगा। कलीसिया में हमारे पादरी और एल्डर हमेशा यही कहते हैं और हम भी इसी पर यकीन करते हैं। हमने अभी तक प्रभु को सफ़ेद बादल पर आते नहीं देखा है, फिर आप कैसे कह सकते हैं कि वह वापस आ चुका है?” भाई पियर ने कहा, “प्रभु के बादल पर आने की भविष्यवाणी ज़रूर पूरी होगी, लेकिन हम प्रभु के वापस आने के तरीके को सिर्फ़ एक भविष्यवाणी की सीमा में नहीं बाँध सकते। बाइबल में भविष्यवाणियाँ सिर्फ़ प्रभु के बादल पर सवार होकर आने के बारे में नहीं, उसके गुप्त रूप से आने के बारे में भी हैं। उदाहरण के लिए, प्रकाशितवाक्य 3:3 में कहा गया है : ‘यदि तू जागृत न रहेगा तो मैं चोर के समान आ जाऊँगा, और तू कदापि न जान सकेगा कि मैं किस घड़ी तुझ पर आ पड़ूँगा।’ फिर प्रकाशितवाक्य 16:15 में कहा है : ‘देख, मैं चोर के समान आता हूँ।’ मत्ती 25:6 में कहा है : ‘आधी रात को धूम मची : “देखो, दूल्हा आ रहा है! उससे भेंट करने के लिए चलो।”’ फिर मरकुस 13:32 है, जिसमें कहा गया है : ‘उस दिन या उस घड़ी के विषय में कोई नहीं जानता, न स्वर्ग के दूत और न पुत्र; परन्तु केवल पिता।’ इन भविष्यवाणियों में प्रभु की वापसी ‘एक चोर के समान’ बताई गई है और ‘उस दिन या उस घड़ी के विषय में कोई नहीं जानता’ यानी प्रभु चुपचाप, गुप्त रूप से, किसी के जाने बिना आएगा और उसे देखकर कोई उसे पहचान नहीं पाएगा। इन भविष्यवाणियों का अर्थ है कि प्रभु गुप्त रूप से आयेगा। बाइबल में अनेक भविष्यवाणियाँ हैं, जिनमें प्रभु के मनुष्य का पुत्र के रूप में आने का जिक्र किया गया है, जैसे कि लूका 12:40 : ‘तुम भी तैयार रहो; क्योंकि जिस घड़ी तुम सोचते भी नहीं, उसी घड़ी मनुष्य का पुत्र आ जाएगा।’ और 17:24-25 : ‘क्योंकि जैसे बिजली आकाश के एक छोर से कौंध कर आकाश के दूसरे छोर तक चमकती है, वैसे ही मनुष्य का पुत्र भी अपने दिन में प्रगट होगा। किन्तु सर्वप्रथम यह आवश्यक है कि वह अनेक कष्ट भोगे, और यह पीढ़ी उसे खारिज कर दे।’ यहाँ ‘मनुष्य का पुत्र’ का अर्थ इंसान से पैदा हुआ, सामान्य इंसानियत वाला है। परमेश्वर के आत्मा या आत्मिक देह को ‘मनुष्य का पुत्र’ नहीं कहा जा सकता। यहोवा परमेश्वर आत्मा है, इसलिए उसे ‘मनुष्य का पुत्र’ नहीं कहा जा सकता। प्रभु यीशु को ‘मनुष्य का पुत्र’ और ‘मसीह’ इसलिए कहा जाता है क्योंकि वे देह में परमेश्वर के आत्मा थे। इसलिए प्रभु द्वारा बताई गई मनुष्य के पुत्र के आने की बात का अर्थ है कि परमेश्वर वापस आते समय मनुष्य के पुत्र के रूप में अंत के दिनों में देहधारी होगा। ख़ास तौर से एक पद में कहा गया है, ‘किन्तु सर्वप्रथम यह आवश्यक है कि वह अनेक कष्ट भोगे, और यह पीढ़ी उसे खारिज कर दे।’ यह और भी ठोस सबूत है कि वापस आते समय प्रभु देहधारी होकर आयेगा। अगर प्रभु देहधारी होकर आने के बजाय अपने आत्मिक रूप में आये तो सब इतने भयभीत हो जाएँगे कि कोई भी उसका प्रतिरोध या निंदा करने की हिम्मत नहीं करेगा। उसे इस पीढ़ी द्वारा कष्ट झेलने या ठुकराये जाने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी। इसलिए परमेश्वर के देहधारी होकर मनुष्य के पुत्र के रूप में गुप्त रूप से आना अंत के दिनों में प्रभु के आने का एक और तरीका है।” इस बिंदु पर मैंने सोचा, “यह तो अविश्वसनीय है और मेरी कल्पना के बिल्कुल बाहर है! लेकिन भाई पियर ने अपनी संगति सबूत के साथ पेश की थी, उनकी हर बात का पूरी तरह बाइबल और प्रभु यीशु की भविष्यवाणियों के साथ तालमेल था। उनकी बातें पूरी तरह आश्वस्त करने वाली थीं।” मैंने इन पदों को कई-कई बार पढ़ा, लेकिन मुझे कभी एहसास नहीं हुआ कि ये प्रभु के गुप्त रूप से देहधारी होने के बारे में हैं। मेरी पुरानी सोच का पूर्णतः खंडन हो गया। मिरेइल भी सोच में डूबी सिर हिला रही थी, उसने कहा, “हाँ, आपकी बात प्रभु के वचनों के अनुरूप है।” लेकिन मैं एक बात को लेकर अब भी उलझन में थी, इसलिए मैंने उनसे पूछा, “अगर प्रभु मनुष्य के पुत्र के रूप में देहधारी होकर गुप्त रूप से आता है तो उसके बादल पर आने की भविष्यवाणी कैसे पूरी होगी? यह तो विरोधाभास है, है न?” भाई पियर ने यह कहकर जवाब दिया, “इन दो तरह की भविष्यवाणियों में कोई विरोधाभास नहीं है, क्योंकि प्रभु के वचन कभी व्यर्थ नहीं हो सकते। उसकी भविष्यवाणियाँ हमेशा पूरी होंगी। बात सिर्फ इतनी है कि ये परमेश्वर के कार्य के चरणों के अनुरूप क्रमशः पूरी होती हैं। वापस आये हुए प्रभु के प्रकटन और कार्य में वह पहले मनुष्य के पुत्र के रूप में देहधारी होकर मानवता के बीच प्रकट होकर गुप्त रूप से कार्य करने आता है, फिर वह एक बादल पर खुले तौर पर प्रकट होता है।” मैंने पशोपेश में पड़कर पूछा, “पहले वह गुप्त रूप से आता है, फिर खुले तौर पर प्रकट होता है? भाई, क्या आप इसे विस्तार से समझा सकते हैं?”

भाई पियर ने बात जारी रखी, “परमेश्वर सत्य व्यक्त करने और परमेश्वर के घर से शुरू करके न्याय का कार्य करने और विनाशों के आने से पहले विजेताओं का समूह बनाने के लिए पहले देहधारी होकर अंत के दिनों में गुप्त रूप से आता है। फिर परमेश्वर महाविनाश लाएगा, नेक लोगों को पुरस्कृत करेगा, बुरे लोगों को दंड देगा। महा विनाश के बाद परमेश्वर बादल पर आएगा और सभी राष्ट्रों और लोगों को खुले तौर पर दिखाई देगा। जब परमेश्वर गुप्त रूप से देहधारी होकर कार्य करता है, तब सभी सच्चे विश्वासी जो उसके आने को लालायित रहते हैं, उसकी वाणी को सुनकर सर्वशक्तिमान परमेश्वर की ओर मुड़ जाते हैं। ये सभी बुद्धिमान कुंवारियाँ हैं; यदि उनका परमेश्वर के वचनों से न्याय और शुद्धिकरण होता है और उन्हें विजेता बनाया जाता है तो वे महाविनाश से बच जाएँगी। जो लोग सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कार्य को स्वीकार नहीं करते, जो उसका प्रतिरोध और निंदा तक करते हैं, वे परमेश्वर के बादल पर आने और खुले में प्रकट होने पर देखेंगे कि उन्होंने जिस सर्वशक्तिमान परमेश्वर का विरोध किया, निंदा की, वह वापस आया हुआ प्रभु यीशु है। तब वे अपनी छाती पीटेंगे, रोयेंगे और दांत पीसेंगे। इससे प्रभु के बादल पर सवार होकर आने की भविष्यवाणियाँ पूरी होंगी, जिनमें कहा गया है : ‘तब मनुष्य के पुत्र का चिह्न आकाश में दिखाई देगा, और तब पृथ्वी के सब कुलों के लोग छाती पीटेंगे; और मनुष्य के पुत्र को बड़ी सामर्थ्य और ऐश्‍वर्य के साथ आकाश के बादलों पर आते देखेंगे(मत्ती 24:30)। ‘देखो, वह बादलों के साथ आनेवाला है, और हर एक आँख उसे देखेगी, वरन् जिन्होंने उसे बेधा था वे भी उसे देखेंगे, और पृथ्वी के सारे कुल उसके कारण छाती पीटेंगे(प्रकाशितवाक्य 1:7)।” फिर भाई पियर ने हमारे लिए सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों का एक अंश पढ़ा : “बहुत-से लोगों को शायद इसकी परवाह न हो कि मैं क्या कहता हूँ, किंतु फिर भी मैं यीशु का अनुसरण करने वाले हर तथाकथित संत को बताना चाहता हूँ कि जब तुम लोग यीशु को एक श्वेत बादल पर स्वर्ग से उतरते अपनी आँखों से देखोगे तो यह धार्मिकता के सूर्य के सार्वजनिक प्रकटन का समय होगा। शायद वह तुम्हारे लिए एक बड़ी उत्तेजना का समय होगा। हालाँकि तुम्हें पता होना चाहिए कि जिस समय तुम यीशु को स्वर्ग से उतरते देखोगे तो यह वह समय भी होगा जब तुम दंडित किए जाने के लिए नीचे नरक में जाओगे, वह समय होगा जब परमेश्वर की प्रबंधन योजना की समाप्ति की घोषणा की जा चुकी होगी और जब परमेश्वर अच्छे लोगों को पुरस्कार और बुरे लोगों को दंड देगा। क्योंकि परमेश्वर का न्याय उस समय से पहले ही समाप्त हो चुका होगा जब मनुष्य चिह्न देखता है, जब सिर्फ सत्य की अभिव्यक्ति होगी। वे जो सत्य को स्वीकार करते हैं और चिह्न नहीं खोजते हैं और इस प्रकार शुद्ध कर दिए गए हैं, वे परमेश्वर के सिंहासन के सामने लाए जा चुके होंगे और सृष्टिकर्ता के आलिंगन में प्रवेश कर चुके होंगे। सिर्फ वे जो इस विश्वास में बने रहते हैं कि ‘ऐसा यीशु जो श्वेत बादल पर सवारी नहीं करता, एक झूठा मसीह है’ अनंत दंड के अधीन कर दिए जाएँगे, क्योंकि वे सिर्फ उस यीशु में विश्वास करते हैं जो चिह्न प्रदर्शित करता है, पर उस यीशु को स्वीकार नहीं करते जो कड़ा न्याय अभिव्यक्त करता है और जीवन और सच्चा मार्ग प्रदान करता है। इसलिए केवल यही हो सकता है कि जब यीशु खुलेआम श्वेत बादल पर वापस लौटे तो वह उनसे निपटे। ... यीशु की वापसी उन लोगों के लिए एक महान उद्धार है, जो सत्य को स्वीकार करने में सक्षम हैं, पर जो सत्य को स्वीकार करने में असमर्थ हैं उनके लिए यह दोषी ठहराए जाने का संकेत है। तुम लोगों को अपना स्वयं का रास्ता चुनना चाहिए, और पवित्र आत्मा के खिलाफ ईशनिंदा नहीं करनी चाहिए और सत्य को अस्वीकार नहीं करना चाहिए। तुम लोगों को अज्ञानी और अभिमानी व्यक्ति नहीं बनना चाहिए, बल्कि ऐसा बनना चाहिए जो पवित्र आत्मा के मार्गदर्शन के प्रति समर्पण करता हो और सत्य के लिए प्यासा होकर इसकी खोज करता हो; सिर्फ इसी तरीके से तुम लोग लाभान्वित होगे(वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, जब तक तुम यीशु के आध्यात्मिक शरीर को देखोगे, परमेश्वर स्वर्ग और पृथ्वी को फिर से बना चुका होगा)। तब मैं समझ पाई। यह पता चला कि वापसी के समय प्रभु पहले गुप्त रूप से आकर विजेताओं का एक समूह बनाता है, फिर वह महाविनाश लाता है, अच्छों को पुरस्कार देता है और दुष्टों को दंड देता है। इसके बाद वह बड़ी महिमा के साथ बादल पर आता है और सभी राष्ट्रों और लोगों के सामने खुले तौर पर प्रकट होता है। इन दोनों भविष्यवाणियों में बिल्कुल भी विरोधाभास नहीं है। मैं बहुत अंधी थी! प्रभु का आना इतनी बड़ी बात है और मैं अपनी धारणाओं और कल्पनाओं के अनुसार चली, प्रभु के बादल पर आने से जुड़े पदों से चिपकी रही और परमेश्वर की वाणी नहीं सुनी। मैं करीब-करीब मूर्ख कुंवारी बनकर प्रभु की वापसी का स्वागत करने का मौका गंवा देती। बाल-बाल बच गई!

तब मैंने भाई पियर से पूछा, “आप गवाही देते हैं कि प्रभु देहधारी रूप में वापस आया है, लेकिन यह ‘देहधारण’ क्या है?” फिर उन्होंने सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों के कुछ अंश पढ़े : “‘देहधारण’ परमेश्वर का देह में प्रकट होना है; परमेश्वर सृष्टि के मनुष्यों के मध्य देह की छवि में कार्य करता है। चूँकि वह देहधारी परमेश्वर है, तो वह सबसे पहले देह बनेगा, सामान्य मानवता वाली देह बनेगा; यह सबसे मौलिक पूर्वापेक्षा है। वास्तव में, परमेश्वर के देहधारण का निहितार्थ यह है कि परमेश्वर देह में रहकर कार्य करता है, परमेश्वर अपने सार में देह बन जाता है, वह एक व्यक्ति बन जाता है(वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, परमेश्वर द्वारा धारण किए गए देह का सार)। “सामान्य मानवता वाला मसीह ऐसी देह है जिसमें आत्मा साकार हुआ है, जिसमें सामान्य मानवता है, सामान्य समझ है और मानवीय विचार हैं। ‘साकार होने’ का अर्थ है परमेश्वर का मानव बनना, आत्मा का देह बनना; इसे और स्पष्ट रूप से कहें, तो यह तब होता है जब स्वयं परमेश्वर सामान्य मानवता वाली देह में वास करके उसके माध्यम से अपने दिव्य कार्य को व्यक्त करता है—यही साकार होने या देहधारी होने का अर्थ है(वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, परमेश्वर द्वारा धारण किए गए देह का सार)। उन्होंने अपनी बात जारी रखी, “देहधारी परमेश्वर, देह में लिपटा परमेश्वर का आत्मा है, यानी स्वर्ग का परमेश्वर हमें बचाने की खातिर, इंसानों के बीच कार्य करने और वचन बोलने के लिए मनुष्य का पुत्र बना है। देहधारी परमेश्वर पूरी तरह से साधारण दिखता है, महान या असाधारण नहीं। उसमें सामान्य मानवता है, वह सच में लोगों के संपर्क में आता है और वह हमारे बीच रहता है। कोई नहीं कह सकता कि वह देहधारी परमेश्वर है। लेकिन मसीह परमेश्वर के आत्मा का मूर्तरूप है और उसमें पूर्ण दिव्यता है। वह सत्य व्यक्त कर सकता है, परमेश्वर का कार्य कर सकता है और परमेश्वर का स्वभाव तथा जो उसके पास है और जो वह स्वयं है उसे व्यक्त कर सकता है। वह मनुष्य को सत्य, मार्ग और जीवन देता है और भ्रष्ट मनुष्य को सदा के लिए शुद्ध करके बचा सकता है। किसी भी मनुष्य में ये गुण नहीं होते और न ही कोई ये चीजें हासिल कर सकता है। ठीक वैसे ही जैसे देहधारी प्रभु यीशु देखने में एक साधारण इंसान लगता था, लेकिन सार में, वह देह रूप में साकार हुआ परमेश्वर का आत्मा था। वह लोगों का पोषण और सिंचन करने के लिए किसी भी समय सत्य व्यक्त कर सकता था। उसने लोगों को प्रायश्चित का मार्ग दिया। वह परमेश्वर का अपना कार्य कर सकता था और इंसान को पाप से छुटकारा दिला सकता था। इसलिए देहधारी परमेश्वर किसी भी सृजित इंसान जैसा नहीं होता, उसका सार स्वयं परमेश्वर का होता है।” आखिरकार मैं समझ पाई कि देहधारण परमेश्वर का मनुष्य का पुत्र बनना है, जो वचन बोलने और कार्य करने के लिए दुनिया में आता है। इस देह में सामान्य मानवता और पूर्ण दिव्यता होती है। हालाँकि वह साधारण नजर आता है, मगर वह सत्य व्यक्त करके मनुष्य को बचाने के लिए परमेश्वर का कार्य कर सकता है। यह मसीह है! मैंने हमेशा “यीशु मसीह” का नाम पुकारा, लेकिन मैंने सच में यह कभी नहीं जाना कि मसीह कौन है। मैं इतनी अनजान थी!

फिर भाई पियर ने हमें सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों का एक और अंश पढ़कर सुनाया : “परमेश्वर द्वारा मनुष्य को बचाने का कार्य सीधे आत्मा के तरीके से और आत्मा की पहचान के साथ नहीं किया जाता, क्योंकि उसके आत्मा को मनुष्य द्वारा न तो छुआ जा सकता है, न देखा जा सकता है और न ही मनुष्य उसके निकट जा सकता है। अगर वह सीधे आत्मा के रूप में मनुष्य को बचाने का प्रयास करता तो मनुष्य उसके उद्धार को प्राप्त न कर पाता। यदि परमेश्वर एक सृजित मनुष्य का बाहरी रूप धारण न करता तो मनुष्य के लिए इस उद्धार को प्राप्त करने का कोई उपाय न होता। क्योंकि मनुष्य के पास उस तक पहुँचने का कतई कोई तरीका नहीं है, ठीक वैसे ही जैसे कोई भी यहोवा के बादल के पास नहीं जा पाया था। केवल एक सृजित मनुष्य बनकर, यानी परमेश्वर जो देह बनने वाला है उस देह में अपने वचन को रखकर ही वह व्यक्तिगत रूप से वचन को उन सभी लोगों में ढाल सकता है जो उसका अनुसरण करते हैं। केवल तभी मनुष्य व्यक्तिगत रूप से उसके वचन को सुन और देख सकता है और उसके वचन को प्राप्त तक कर सकता है और इस तरीके से पूरी तरह बचाया जा सकता है। यदि परमेश्वर देहधारी न बनता तो देह और रक्त युक्त कोई भी मनुष्य ऐसा महान उद्धार प्राप्त न कर पाता, न ही एक भी मनुष्य बचाया जाता। यदि परमेश्वर का आत्मा सीधे मानवजाति के बीच कार्य करता तो पूरी मानवजाति मारी जाती या फिर परमेश्वर के संपर्क में आने का कोई उपाय न होने के कारण वह शैतान द्वारा पूरी तरह से बंदी बना ली जाती। प्रथम देहधारण मनुष्य को पाप से छुटकारा देने के लिए था, उसे यीशु के दैहिक शरीर के माध्यम से छुटकारा देने के लिए था, अर्थात् यीशु ने मनुष्य को सलीब से बचाया, किंतु शैतानी भ्रष्ट स्वभाव अभी भी मनुष्य के भीतर बचे रह गए। दूसरा देहधारण अब पापबलि के रूप में कार्य करने के लिए नहीं है, अपितु उन लोगों को पूरी तरह से बचाने के लिए है जिन्हें पाप से छुटकारा दिया गया था। यह इसलिए किया जाता है ताकि जिनके पापों को क्षमा किया जा चुका है वे अपने पाप से मुक्त और पूरी तरह से शुद्ध हो सकें और वे स्वभावगत बदलाव हासिल कर सकें और इस प्रकार शैतान के अंधकार के प्रभाव को तोड़कर मुक्त हो जाएँ और परमेश्वर के सिंहासन के सामने लौट आएँ। केवल इसी तरीके से मनुष्य पूरी तरह से पावनीकृत हो सकता है(वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, देहधारण का रहस्य (4))। फिर उन्होंने यह संगति साझा की : “हालाँकि प्रभु यीशु के छुटकारे के कार्य का अर्थ था कि हमारे पापों को क्षमा किया गया, मगर हमारी शैतानी प्रकृति बरकरार रही। हम अभी भी अहंकार और कपट जैसे अपने शैतानी स्वभाव के साथ जीते हैं। हम अपने हितों के लिए झूठ बोलते और धोखा देते हैं, प्रतिष्ठा और फायदे के लिए दूसरों से होड़ लगाते हैं और एक-दूसरे के खिलाफ साजिश करते हैं। हम पाप करने और परमेश्वर का प्रतिरोध करने से बच नहीं पाते। भले ही ऐसा दिखे कि हम त्याग कर रहे हैं, खुद को खपा रहे हैं, कष्ट झेल रहे हैं, मगर दरअसल हम परमेश्वर के साथ सौदे कर रहे हैं, प्रतिफल के रूप में स्वर्ग के राज्य के आशीष पाने की आशा करते हैं। हम परमेश्वर की इच्छा के अनुसार बिल्कुल भी नहीं चलते। परमेश्वर पवित्र है, हम जैसे गंदे और भ्रष्ट लोग परमेश्वर के राज्य में प्रवेश के बिल्कुल भी योग्य नहीं हैं। परमेश्वर अंत के दिनों में फिर से देहधारी हुआ है ताकि वह मनुष्यजाति को पूरी तरह बचाए, हमें पाप से मुक्त करे और हमें शुद्ध करे। वह हमें पोषण देने और हमारी अगुवाई करने के लिए सत्य व्यक्त करता है और हमारे भ्रष्ट स्वभाव और शैतानी प्रकृति को उजागर कर उनका न्याय करता है। वह हमें अपने स्वभाव को बदलने का मार्ग भी दिखाता है और हमें बताता है कि सामान्य मानवता को कैसे जिएँ और ऐसे ईमानदार लोग कैसे बनें जो उसे प्रसन्न करें। परमेश्वर के वचनों के न्याय और ताड़ना का अनुभव करके, हम अपनी भ्रष्टता और शैतानी प्रकृति को सच में जानकर उससे घृणा करते हैं और प्रायश्चित करके उसके वचन के अनुसार काम और आचरण करना चाहते हैं। हम धीरे-धीरे कुछ भ्रष्ट स्वभावों को त्यागते हैं और कुछ हद तक मनुष्य जैसी समानता जीने लगते हैं। सिर्फ़ देहधारी परमेश्वर ही अपने कार्य में यह हासिल कर सकता है। अगर परमेश्वर, यहोवा परमेश्वर की तरह अंत के दिनों में वचन बोलकर कार्य करने के लिए अपने आत्मा-रूप में आए तो वह मनुष्य को शुद्ध करके बचाने में असमर्थ होगा। क्योंकि लोग परमेश्वर के आत्मा को देख या छू नहीं सकते, अगर वह उनसे सीधे बात करे तो वे उसे समझ नहीं पायेंगे। यही नहीं, भ्रष्ट मनुष्य परमेश्वर के आत्मा के करीब नहीं जा सकता, बल्कि गंदा और भ्रष्ट होने के कारण मार गिराया जाएगा। पुराने नियम में कहा गया है कि यहोवा परमेश्वर गड़गड़ाहट की आवाज़ के साथ सिनाई पर्वत पर प्रकट हुआ। इस्राएलियों ने पर्वत पर धुआँ और कड़कती बिजली की चमक देखी, गड़गड़ाहट और भोंपू की आवाज़ सुनी। उन्होंने बहुत दूर खड़े होकर मूसा से कहा, ‘तू ही हम से बातें कर, तब तो हम सुन सकेंगे; परन्तु परमेश्वर हम से बातें न करे, ऐसा न हो कि हम मर जाएँ’ (निर्गमन 20:19)। अंत के दिनों में शैतान ने मनुष्य को गहराई से भ्रष्ट कर दिया है। अगर परमेश्वर आत्मा के रूप में कार्य करने आए तो कोई भी नहीं बच पाएगा। हम सभी गंदे और भ्रष्ट होने के कारण परमेश्वर द्वारा मार गिराए जाएँगे। इसलिए परमेश्वर ने हमें बचाने के लिए सबसे फायदेमंद रास्ता चुना है—वह देहधारी बन जाता है, सत्य व्यक्त कर भ्रष्ट इंसान का न्याय और शुद्धिकरण करता है। यह इंसान के लिए परमेश्वर का महानतम प्रेम और उद्धार है!” मैं इतनी अधिक द्रवित हुई कि मैंने उत्साह से कहा, “सच में अंत के दिनों में कार्य करने के लिए हमें मनुष्य के पुत्र के रूप में देहधारी परमेश्वर की ज़रूरत है। यह भ्रष्ट इंसान के लिए सबसे बड़ा उद्धार है! मैं परमेश्वर के कार्य करने के तरीकों के बारे में पहले जानती ही नहीं थी। मैंने उसकी वाणी को सुनने की कोशिश नहीं की और न उसकी वाणी के अनुसार मैं उसे पहचान पाई न ही उसका स्वागत किया। मैं बेवकूफ-सी प्रभु के बादल पर आने और हमें स्वर्ग के राज्य में ले जाने का इंतजार करती रही। मैं कितनी बेवकूफ थी!”

फिर हमने सर्वशक्तिमान परमेश्वर के अनेक वचन पढ़े और हमें पता चला कि बुद्धिमान कुंवारियाँ कौन हैं, मूर्ख कुंवारियाँ कौन हैं, परमेश्वर कैसे प्रकट होता है, परमेश्वर के नामों, उसके देहधारणों और अंत के दिनों में उसके न्याय-कार्य के रहस्य क्या हैं। हम यह समझ पाईं कि परमेश्वर मनुष्य को बचाने के लिए व्यवस्था के युग, अनुग्रह के युग और राज्य के युग में तीन चरणों का कार्य करता है। कार्य के ये तीन चरण ही मनुष्य को शैतान की शक्ति से पूरी तरह बचा सकते हैं। यहोवा परमेश्वर, प्रभु यीशु और सर्वशक्तिमान परमेश्वर सभी एक ही परमेश्वर हैं। हमने पक्का किया कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर वापस आया हुआ प्रभु यीशु है और उसे स्वीकार कर लिया। हमने आखिरकार प्रभु का स्वागत किया! सर्वशक्तिमान परमेश्वर का धन्यवाद!

परमेश्वर के बिना जीवन कठिन है। यदि आप सहमत हैं, तो क्या आप परमेश्वर पर भरोसा करने और उसकी सहायता प्राप्त करने के लिए उनके समक्ष आना चाहते हैं?

संबंधित सामग्री

घर वापसी

मुयी, दक्षिण कोरिया "परमेश्वर का लबालब प्यार मिलता है इंसान को उदारता से, उसके आसपास ही है प्यार परमेश्वर का, परमेश्वर का। मासूम, निर्मल,...

मैंने परमेश्वर का प्रकटन देखा है

मार्टिन, दक्षिण कोरियामैं एक कोरियाई प्रेस्बिटेरियन कलीसिया का सदस्य हुआ करता था। मेरी बेटी बीमार पड़ी तो मेरे परिवार के सभी लोग विश्वासी बन...

एक कैथोलिक याजक की घर-वापसी

झांग जियान, चीनमेरा परिवार पीढ़ियों से कैथोलिक रहा है। जब मैं 20 साल का था, तो मैंने मठवासी बनकर प्रभु की सेवा में अपना जीवन अर्पित करने का...

WhatsApp पर हमसे संपर्क करें